ICMR का दावा, कोरोना के नए स्‍ट्रेन में भी कारगर है भारत में बनी COVID-19 वैक्‍सीन

कोरोना के नए स्‍ट्रेन में भी कारगर है भारत में बनी वक्‍सीन.(Pic- AP)

ICMR के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव ने कहा है कि देश में चल रहे क्लीनिकल ट्रायल के अंतरिम परिणामों से संकेत मिले हैं कि स्वदेशी कोविड-19 टीके (Covid-19 vaccines) ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील में सामने आए कोरोना वायरस (Coronavirus) के नए स्‍ट्रेन में भी प्रभावी होंगे.

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    तिरुवनंतपुरम. ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील में मिले कोरोना (Corona) के नए स्‍ट्रेन का पता लगने के बाद से भारत (India) में भी कोरोना के नए मामले सामने आने लगे हैं. हर किसी को इस बात का डर सता रहा है कि कहीं कोरोना का नया स्‍ट्रेन (Corona New Strain) भारत पर भी तो अपना असर नहीं दिखा रहा है. इन सबके बीच अब भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने कोरोना के नए स्‍ट्रेन से जुड़ी राहत देने वाली खबर दी है. आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव ने कहा है कि देश में चल रहे क्लीनिकल ट्रायल के अंतरिम परिणामों से संकेत मिले हैं कि स्वदेशी कोविड-19 टीके ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील में सामने आए कोरोना वायरस के नए स्‍ट्रेन में भी प्रभावी होंगे.

    भार्गव ने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग, केरल सरकार द्वारा आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय वेबिनार ‘केरल हेल्थ: मेकिंग द एसडीजी ए रियलिटी’ को संबोधित करते हुए कहा कि ब्रिटेन में सामने आए कोविड-19 के नए प्रकार के खिलाफ कोवैक्सीन की क्षमता को लेकर एक पेपर प्रकाशन के लिए स्वीकार किया गया है. उन्होंने कहा कि दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील के प्रकारों के मामले में, इन दोनों देशों के यात्रियों से एकत्र किए गए नमूनों से उत्परिवर्तित वायरस को अलग करने के प्रयास किए जा रहे हैं.

    अधिकारी ने कहा कि कोवैक्सीन बीबी152 का तीसरा क्लीनिकल ट्रायल पूरा हो गया है क्योंकि इस कवायद में शामिल सभी 25,800 स्वयंसेवकों को दोनों खुराक दे दी गई हैं. उन्होंने कहा, 'अंतरिम विश्लेषण रिपोर्ट एक हफ्ते में आ जानी चाहिए.' डॉ. भार्गव ने बताया कि कोविड-19 प्रकोप के खिलाफ शुरुआत से ही महामारी के प्रसार को नियंत्रण में रखने की अपनी प्रतिक्रिया के तहत भारत ने इस अवधि का उपयोग सरकारी और निजी दोनों चिकित्सा बुनियादी ढांचे की क्षमता को बढ़ाने के लिए किया है.

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    उन्होंने कहा, 'ब्रिटेन और इटली सहित कई यूरोपीय देशों के विपरीत भारत सामूहिक प्रतिरोधक क्षमता हासिल करने के विचार के खिलाफ था.' उन्होंने कहा, 'उन पश्चिमी देशों में जिन्होंने महामारी को फैलने दिया, उनकी स्थिति को देखते हुए यह निर्णय सही साबित हुआ.' उन्होंने कहा कि इसके परिणामस्वरूप, भारत ने न केवल घरेलू उपयोग के लिए अपने चिकित्सा बुनियादी ढांचे को बढ़ाया बल्कि बड़े पैमाने पर टीके और उपचार किट निर्यात करने के स्तर पर भी पहुंचा.

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