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भारत में प्रजनन दर घटी, गर्भ निरोधक का हो रहा सबसे ज्यादा इस्तेमाल, जानें NHFS की चौंकाने वाली रिपोर्ट

भारत में प्रजनन दर घटी, गर्भ निरोधक का हो रहा सबसे ज्यादा इस्तेमाल, जानें NHFS की चौंकाने वाली रिपोर्ट

NHFS ने रिपोर्ट जारी की है. (FILE PHOTO)

NHFS ने रिपोर्ट जारी की है. (FILE PHOTO)

India’s Fertility Rate Drops: नेशनल हेल्थ फैमिली सर्वे-5 के अनुसार, भारत की प्रजनन दर में गिरावट आई है और यह 2.2 से घटकर 2 हो गई है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को यह आंकड़े जारी किए और कहा कि इससे यह संकेत मिलता है कि देश की जनसंख्या स्थिरता आ रही है.

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    नई दिल्ली. देश में टोटल फर्टिलिटी रेट (Total Fertility Rate) यानि कुल प्रजनन दर में गिरावट आई है. नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 के दूसरे चरण के अनुसार, एक महिला द्वारा अपने जीवनकाल में बच्चों को जन्म देने की औसत संख्या 2.2 से घटकर 2 हो गई है. जबकि गर्भ निरोधक प्रसार दर 54% से बढ़कर 67% हो गई है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को यह आंकड़े जारी किए. इससे यह संकेत मिलता है कि देश की जनसंख्या स्थिर हो रही है. 2.1 टोटल फर्टिलिटी रेट को प्रतिस्थापन दर के तौर पर देखा जाता है, जो कि आबादी की बढ़ोतरी में एक अहम कारक है.

    2015 से 2016 में हुए इस सर्वे के चौथे संस्करण में देश की कुल प्रजनन दर 2.2 थी. वहीं 5वें चरण का यह सर्वे 2019 से 2021 के बीच हुआ है. यह जनसंख्या नियंत्रण के लिए किए गए प्रयासों की सफलता को दर्शाता है.

    गर्भ निरोधक प्रसार दर में बढ़ोतरी

    नीति आयोग (NITI Aayog)  में स्वास्थ्य समिति के सदस्य, वी के पॉल ने कहा कि, नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 यह दिखाता है कि सतत विकास के लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में और तेजी आ रही है. इस सर्वे में मिले डाटा से सरकार को यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज को लेकर मदद मिलेगी.

    दूसरे चरण का सर्वे अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, हरियाणा, झारखंड, मध्य प्रदेश, दिल्ली, ओडिशा, पुदुचेरी, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में किया गया. एमपी, राजस्थान, झारखंड और उत्तर प्रदेश को छोड़कर, अन्य सभी राज्यों ने टोटल फर्टिलिटी रेट में रिप्लेसमेंट लेवल को हासिल किया है.

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    वहीं राष्ट्रीय स्तर पर गर्भ निरोधक प्रसार दर 57 फीसदी से बढ़कर 67 फीसदी हुई है. इस सर्वे से पता चलता है कि परिवार नियोजन (Family Planning)  की अपूर्ण जरुरतें भी 13 प्रतिशत से गिरकर 9 प्रतिशत हो गई है.

    भारत सरकार ने 1952 में जनसंख्या नियंत्रण को लेकर परिवार नियोजन कार्यक्रम की शुरुआत की थी. हालांकि शुरुआत में गलत नीतियों की वजह से कई परेशानियों का सामना करना पड़ता था जिसकी वजह से बड़े पैमाने पर महिलाएं गर्भनिरोधक उपायों का उपयोग कर रही थीं. नवविवाहित लोगों के पास भी गर्भ निरोधक साधनों के सीमित संसाधन थे. हालांकि पिछले कुछ सालों में इस कार्यक्रम में हुए बदलावों से इसमें सुधार आया है.

    केंद्र सरकार के अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर हिन्दुस्तान टाइम्स को बताया कि, भारत में लंबे समय से जनसंख्या नियंत्रण पर काम चल रहा था. वास्तव में भारत, पहला देश था जिसने राष्ट्रीय स्तर पर परिवार नियोजन कार्यक्रम शुरू किया था और अब हमें जो उत्साहजनक परिणाम देखने को मिल रहे हैं, वे केंद्र और राज्य सरकारों के निरंतर व ठोस प्रयासों का नतीजा है.

    पूर्व में किए गए प्रयासों से मिली सफलता

    गर्भ निरोधक साधनों और परिवार नियोजन से जुड़ी बेहतर सेवाएं प्रदान करने के लिए मिशन परिवार विकास को 2016 में लॉन्च किया गया था. इसमें उच्च प्रजनन दर वाले बिहार, उत्तर प्रदेश, असम, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान और झारखंड के 146 जिलों पर विशेष जोर दिया गया था और यह सुनिश्चित किया गया था कि गर्भ निरोधक साधन सभी स्तरों पर उपलब्ध हों. जानकारों का कहना है कि इस कार्यक्रम से परिवार नियोजन को लेकर बेहतर काम हुआ.

    12-23 महीनों की आयु के बच्चों में पूर्ण टीकाकरण 62% से बढ़कर 76% हुआ है. प्रसव से पूर्व गर्भवती महिलाओं को हेल्थ केयर प्रोवाइडर की ओर 4 से अधिक परामर्श सेवाएं मिली.

    संस्थागत जन्म 79 फीसदी से बढ़कर 89 फीसदी हुए. बाल पोषण संकेतों में मामूली सुधार देखने को मिला. वहीं अंडरवेट बच्चों की संख्या 36 फीसदी से घटकर 32 फीसदी हो गई. इसके अलावा 6 माह के अंदर स्तनपान की दर में 55 से 64 फीसदी की वृद्धि हुई.

    Tags: Central government, Family planning, Health ministry

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