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चीन सीमा पर भारत बना रहा सबसे लंबा ब्रिज, ऊपर चलेंगी गाड़ियां और नीचे ट्रेन

चीन सीमा पर भारत बना रहा सबसे लंबा ब्रिज, ऊपर चलेंगी गाड़ियां और नीचे ट्रेन

प्रतीकात्मक चित्र

प्रतीकात्मक चित्र

इस साल के आखिर तक ब्रिज का उद्घाटन प्रधानमंत्री मोदी कर सकते हैं. यह एशिया का दूसरा सबसे बड़ा ब्रिज होगा. इसमें ऊपर तीन लेन सड़कें और नीचे डबल लाइन रेल है.

    भारत-चीन सीमा पर सामान की ढुलाई के कामों को सुधारने की दिशा में सबसे लंबा रेल ब्रिज शुरू किया जाएगा. असम के डिब्रूगढ़ से अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट को जोड़ने वाले इस ब्रिज का उद्घाटन पीएम मोदी करेंगे. ब्रिज चीन के बॉर्डर से नजदीक है.

    बोगीबील प्रोजेक्ट के चीफ इंजीनियर महेन्द्र सिंह ने बताया कि ब्रिज से जुड़े कंस्ट्रक्शन का काम इस साल जुलाई तक हो जाएगा. इसके बाद 4.94 किलोमीटर लंबे इस ब्रिज में बिजली और सिग्नल के काम में दो महीने का समय और लगेगा.

    अधिकारियों की जानकारी के मुताबिक, इस साल के आखिर तक ब्रिज का उद्घाटन प्रधानमंत्री मोदी कर सकते हैं. एशिया के दूसरे सबसे बड़े ब्रिज में टॉप पर तीन लेन सड़कें और नीचे डबल लाइन रेल है.

    ये रेल ब्रिज ब्रह्मपुत्र नदी स्तर से 32 मीटर की उंचाई पर है. अधिकारियों ने बताया कि ब्रिज नॉर्थ-ईस्ट में किए जाने वाले विकास की ओर एक अच्छा कदम है. साथ ही इस ब्रिज से चीन सीमा पर सप्लाई में आने वाली दिक्कतों को सुधारने में भी सहूलियत मिलेगी.

    बोगीबील प्रोजेक्ट के अंतर्गत वो सारे कंस्ट्रक्शन के काम आते है जो अरुणाचल प्रदेश से लगने वाली चीन सीमा पर सप्लाई के मुद्दों को सुधारने की दिशा में कारगर होंगे. भारत-चीन लगभग 4000 किलोमीटर की सीमा साझा करते हैं, जिसमें से 75 प्रतिशत अरुणाचल प्रदेश में है.

    अभी तक जो रेल और रोड लिंक अरुणाचल प्रदेश में हैं, वो असम के तीन ब्रिजों से जुड़ें है. इसका मतलब सामान को डिब्रूगढ़ से ब्रह्मपुत्र पार करने के लिए 600 किलोमीटर का चक्कर काटना पड़ता है. इसके लिए दूसरा विकल्प नाव है, लेकिन ये विकल्प भारी सामानों के लिए कारगर नहीं है. साथ ही मई से अक्टूबर के बीच मानसून की वजह से नाव का विकल्प बंद हो जाता है.

    बोगीबील प्रोजेक्ट इंजीनियर महेन्द्र सिंह ने कहा कि अभी डिब्रूगढ़ से अरुणाचल तक ट्रेन से जाने में 500 किलोमीटर से ज्यादा का चक्कर काटना पड़ता है लेकिन इस ब्रिज के बाद ये रास्ता 100 किलोमीटर से कम का हो जाएगा.

    इस प्रोजेक्ट को 1996 में ही मंजूरी मिल गई थी, लेकिन इसका काम 2002 में बीजेपी की एनडीए सरकार में शुरु किया गया था. कांग्रेस की यूपीए सरकार ने 2007 में इस प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय प्रोजेक्ट घोषित किया था.

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