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स्वदेशी पोत, दक्षिण चीन सागर में युद्धाभ्यास, हर कदम से चीन को संदेश दे रहा भारत

विमान वाहक पोत विक्रांत. (तस्वीर- Narendra Modi Twitter)

विमान वाहक पोत विक्रांत. (तस्वीर- Narendra Modi Twitter)

भारत के पहले स्वदेश निर्मित विमानवाहक जहाज ‘विक्रांत’ (Vikrant) का समुद्र में परीक्षण शुरू हो गया. यह देश में निर्मित सबसे बड़ा और ताकतवर युद्धपोत है. सिर्फ विक्रांत ही नहीं, बीते समय में भारत ने लगातार समुद्र में अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर बीजिंग को संदेश देने की कोशिश की है.

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    नई दिल्ली. भारत समुद्र में अपनी शक्ति में लगातार इजाफा कर रहा है. हिंद महासागर (Indian Ocean) और अन्य समुद्रीय इलाकों में भारत द्वारा अपनी शक्ति बढ़ाया जाना लगातार ड्रैगन यानी चीन (China) के लिए एक मजबूत संदेश का भी काम कर रहा है. इसी क्रम में बुधवार को भारत के पहले स्वदेश निर्मित विमानवाहक जहाज ‘विक्रांत’ (Vikrant) का समुद्र में परीक्षण शुरू हो गया. यह देश में निर्मित सबसे बड़ा और ताकतवर युद्धपोत है. भारतीय नौसेना ने इसे देश के लिए ‘गौरवान्वित करने वाला और ऐतिहासिक’ दिन बताया और कहा कि भारत उन चुनिंदा देशों में शुमार हो गया है जिनके पास विशिष्ट क्षमता वाला स्वदेशी रूप से डिजाइन किया, निर्मित और एकीकृत अत्याधुनिक विमानवाहक पोत है.

    इसे ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ की सफलता के रूप में भी देखा जा रहा है. दुनिया को भारत यह संदेश में सक्षम हुआ कि वो एक विशालकाय और आधुनिकतम युद्धपोत तैयार करने की भी क्षमता रखता है. समुद्र में सामर्थ्य की दृष्टि से ये कदम भारत को दुनिया के शक्तिशाली देशों की सूची में खड़ा करता है. लेकिन सिर्फ विक्रांत ही नहीं बल्कि बीते समय में भारत ने लगातार समुद्र में अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर बीजिंग को संदेश देने की कोशिश की है.

    युद्धाभ्यास के लिए भेजी चार पोतों की टास्क फोर्स
    भारत ने दक्षिण चीन सागर में अमेरिका और दूसरे सहयोगियों के साथ युद्धाभ्यास के लिए भी चार युद्धपोतों की एक टास्क फोर्स भेजी है. ये टास्क फोर्स अगले दो महीने तक दक्षिण चीन सागर और अन्य समुद्री क्षेत्रों में रहेगी. इस दौरान अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया, वियतनाम और फिलिपिन्स जैसे देशों के साथ अभ्यास भी करेगी. ये युद्धाभ्यास बेहद आधुनिक तकनीकों पर आधारित होंगे. दक्षिण चीन सागर में बीते सालों में चीन लगातार अपनी दादागीरी दिखाने की कोशिश करता रहा है जिसका भारत ने हमेशा जोरदार विरोध किया है. इससे पहले भारत ने क्वाड देशों के साथ समुद्र और हवा में युद्धाभ्यास कर अपनी शक्तियों का प्रदर्शन किया है.

    रक्षा क्षेत्र में खर्च के मामले में दुनिया में तीसरे नंबर पर भारत
    अगर दुनिया में रक्षा क्षेत्र में सर्वाधिक खर्च करने वाले देशों का जिक्र किया जाए तो भारत का नंबर अब तीसरा है. उससे ऊपर सिर्फ चीन और अमेरिका हैं. रूस, यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी और फ्रांस जैसे देशों का नंबर भारत के बाद है. दरअसल क्वाड देशों के साथ अपना मजबूत गठबंधन प्रदर्शित करने में भारत पूरी तरह सफल रहा है. ताकतवर लोकतांत्रिक देशों के साथ आने से तानाशाही छवि वाले चीन पर वैश्विक दबाव भी बढ़ा है. यही वजह है कि चीन हर बार क्वाड की बैठकों को लेकर अपनी झल्लाहट सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करता है.

    वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भी भारत का सख्त रुख
    दरअसल बीते साल चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सीमा विवाद में उलझने के बाद से ही भारत ड्रैगन को घेरने की कोशिश कर रहा है. भारत ने लगातार यह संदेश देने की कोशिश की है कि सीमा पर अशांति के साथ दोनों देशों के संबंध सामान्य नहीं रह सकते हैं. हाल में दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच 12वें राउंड की सैन्य बैठक के दौरान पूर्वी लद्दाख के कुछ इलाकों में डिसइंगेजमेंट पर सहमति भी बनी है.

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