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Know Your Army Heroes: जब 15 साथियों के साथ 8 गुना ताकतवर दुश्‍मन से भिड़ गया यह गोरखा जाबांज और फिर...

Know Your Army Heroes: जब 15 साथियों के साथ 8 गुना ताकतवर दुश्‍मन से भिड़ गया यह गोरखा जाबांज और फिर...

जमादार लाल बहादुर पुन की साहसिक कार्रवाई को देखते हुए वीर चक्र से सम्‍मानित किया गया था.

जमादार लाल बहादुर पुन की साहसिक कार्रवाई को देखते हुए वीर चक्र से सम्‍मानित किया गया था.

Know Your Army Heroes: 5 गोरखा राइफल्‍स के जमादार लाल बहादुर पुन के सामने दो विकल्‍प थे. पहला विकल्‍प नदी पार कर आने वाले अपने साथियों का इंतजार करना और दूसरा विकल्‍प था सामने 8 गुना ज्‍यादा क्षमता के साथ मौजूद दुश्‍मन पर हमला करना. पहला विकल्‍प चुनने पर खतरा एक ही था कि कहीं दुश्‍मन हांथ से न निकल जाए, लिहाजा जमादार लाल बहादुन पुन ने फैसला किया कि ....

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नई दिल्‍ली. 1948 के पोलो-हैदराबाद ऑपरेशन के दौरान 5 गोरखा राइफल्‍स की पहली बटालियन को कारगिल रोड और खारल ब्रिज के सामने स्थि‍त पहाडि़यों मौजूद पाकिस्‍तानी दुश्‍मनों को नेस्तनाबूद करने की जिम्‍मेदारी मिली थी. इस ऑपरेशन के लिए रवाना होने वाले भारतीय जाबांजों में जमादार लाल बहादुर पुन भी शामिल थे. 23 नवंबर 1948 को जमादार लाल बहादुर पुन अपने 15 साथियों के साथ उस जगह तक पहुंचने में कामयाब रहे, जहां से दुश्‍मन की पोजीशन बिल्‍कुल साफ थी.

जमादार लाल बहादुर पुन अपने साथियों के साथ वहीं रुक गए. अब इंतजार कंपनी के उन साथियों का, जो नदी पार कर उनके पास पहुंचने वाले थे. जमादार लाल बहादुर पुन को लगा कि नदी पार करके कंपनी के अन्‍य साथियों को उन तक पहुंचने में अधिक समय लगेगा. इस बीच, कहीं ऐसा न हो कि हमले का बेहतरीन अवसर उनके हाथों से निकल जाए. इसी सोच के साथ जमादार लाल बहादुर पुन ने अपने साथियों का इंतजार करने की बजाय हमले का फैसला किया. दूसरी तरफ, दुश्‍मन की संख्‍या और क्षमता आठ गुना से भी अधिक थी.

बिना नुकसान मार गिराए 10 पाकिस्‍तानी दुश्‍मन
दुश्‍मन की संख्‍या और क्षमता की परवाह किए बगैर जमादार लाल बहादुर पुन ने अपने साथियों को हमले के लिए तैयार किया. बेहद सटीक युद्धक रणनीति के साथ उन्‍होंने अपने साथियों को पहाड़ी पर चढ़ाया और दूसरी तरफ से खुद मोर्चा संभाल कर हमले के लिए तैयार हो गए. सही समय पर दोनों तरफ से एक साथ दुश्‍मन पर हमला किया गया. इस हमले ने पाकिस्‍तानी दुश्‍मन भौचक्‍का रह गया. इस ऑपरेशन में भारतीय सेना के जांबाजों ने 10 दुश्‍मन मार गिराए. बाकी बचे दुश्‍मनों ने युद्ध भूमि से भागने में ही अपनी बेहतरी समझी.

वीर चक्र से सम्‍मानित हुए जमादार लाल बहादुर
इस ऑपरेशन में भारतीय सेना का एक भी जांबाज हताहत नहीं हुआ था. 5 गोरखा राइफल्‍स की पहली बटालियन के जमादार लाल बहादुर पुन की इस शानदार पहल और साहसी नेतृत्व को देखते हुए उन्‍हें वीर चक्र से सम्‍मानित किया गया. यह सम्‍मान उन्‍हें 21 जून 1950 को प्रदान किया गया था.

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Tags: Heroes of the Indian Army, Indian army, Indian Army Heroes, Indo pak war 1947

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