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मणिपुर में इनर लाइन परमिट व्यवस्था लागू, राष्ट्रपति ने आदेश पर किए हस्ताक्षर

भाषा
Updated: December 11, 2019, 4:29 PM IST
मणिपुर में इनर लाइन परमिट व्यवस्था लागू, राष्ट्रपति ने आदेश पर किए हस्ताक्षर
आईएलपी व्यवस्था का मुख्य मकसद मूल आबादी के हितों की रक्षा के लिए तीनों राज्यों में अन्य भारतीय नागरिकों की बसाहट को रोकना है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

इनर लाइन परमिट (Inner Line Permit) व्यवस्था वाले राज्यों में देश के दूसरे राज्यों के लोगों सहित बाहरियों को अनुमति लेनी पड़ेगी. भूमि, रोजगार के संबंध में स्थानीय लोगों को संरक्षण और अन्य सुविधाएं मिलेंगी.

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नई दिल्ली. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (President Ramnath Kovind) के दस्तखत करने के साथ इनर लाइन परमिट (Inner Line Permit) व्यवस्था बुधवार को मणिपुर (Manipur) में लागू कर दी गई. इसके दो दिन पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Home Minister Amit Shah) ने लोकसभा (Loksabha) में घोषणा की थी कि विवादास्पद नागरिकता संशोधन विधेयक, 2019 (Citizenship Amendment Bill 2019) के बारे में पूर्वोत्तर (Northeast) के राज्य के लोगों की आशंकाओं को दूर करने के लिए आईएलपी (ILP) को मणिपुर में लागू किया जाएगा.

गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) ने इस संबंध में एक अधिसूचना जारी की है. आईएलपी व्यवस्था वाले राज्यों में देश के दूसरे राज्यों के लोगों सहित बाहरियों को अनुमति लेनी पड़ेगी. भूमि, रोजगार के संबंध में स्थानीय लोगों को संरक्षण और अन्य सुविधाएं मिलेंगी.

पूर्वोत्तर का चौथा राज्य है मणिपुर 
अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh), नगालैंड (Nagaland) और मिजोरम (Mizoram) के बाद मणिपुर (Manipur) चौथा राज्य है जहां पर आईएलपी को लागू किया गया है. बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर नियमन 1873 (Eastern Frontier Regulation 1873) के अंतर्गत आईएलपी व्यवस्था लागू की गई थी. इनर लाइन परमिट ईस्टर्न फ्रंटियर नियमन 1873 के अंतर्गत जारी किया जाने वाला एक ट्रैवल डॉक्यूमेंट है. वर्तमान में इन राज्यों में लंबे समय तक रहने वाले उन निवासियों को भी परमिट की जरूरत पड़ती है जो इन राज्यों में 'मूलवासी' नहीं हैं. ऐसे लोगों को अपना परमिट हर छह महीने में रीन्यू कराना होता है.

आईएलपी व्यवस्था का मुख्य मकसद मूल आबादी के हितों की रक्षा के लिए तीनों राज्यों में अन्य भारतीय नागरिकों की बसाहट को रोकना है. नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर पूर्वोत्तर में हर तरफ विरोध प्रदर्शन हुआ, जिसके बाद गृह मंत्री ने घोषणा की थी कि प्रस्तावित कानून आईएलपी व्यवस्था वाले राज्यों और संविधान की छठी अनुसूची के तहत शासित क्षेत्रों में लागू नहीं होगी .

राज्यसभा में पेश हुआ नागरिकता संशोधन बिल
संविधान की छठी अनुसूची के तहत असम, मेघालय और त्रिपुरा के कुछ जनजातीय क्षेत्रों में स्वायत्त परिषद् और जिले बनाए गए. स्वायत्त परिषदों और जिलों को कुछ कार्यकारी और विधायी ताकतें मिली हुई हैं.शाह ने सोमवार को लोकसभा में नागरिकता (संशोधन) विधेयक पेश करते हुए कहा था कि मणिपुर में आईएलपी व्यवस्था लागू की जाएगी. उन्होंने यह भी कहा था कि इस संबंध में एक आदेश प्रस्तावित कानून को अधिसूचित करने के पहले जारी कर दिया जाएगा.

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First published: December 11, 2019, 4:12 PM IST
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