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INS Dhruv: भारत के पहले परमाणु मिसाइल ट्रैकिंग जहाज INS 'ध्रुव' की लॉन्चिंग आज, जानें खासियत

इस जहाज के सर्विलांस सिस्टम के ऑपरेशन में 14 मेगावाट बिजली की आवश्यकता पड़ेगी जो INS ध्रुव खुद बनाएगा. (सांकेतिक तस्वीर)

इस जहाज के सर्विलांस सिस्टम के ऑपरेशन में 14 मेगावाट बिजली की आवश्यकता पड़ेगी जो INS ध्रुव खुद बनाएगा. (सांकेतिक तस्वीर)

INS Dhruv: इस मौके पर भारतीय नौसेना, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठन (NTRO) के ...अधिक पढ़ें

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    नई दिल्ली. समुद्र में भारत की ताकत बढ़ने वाली है. आज भारत के पहले परमाणु मिसाइल ट्रैकिंग जहाज INS ‘ध्रुव’ (INS Dhruv) को लॉन्च किया जाएगा. 10,000 टन के इस बेहद खास जहाज को आज आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में भारतीय नौसेना में शामिल किया जाएगा. इस मौके पर भारतीय नौसेना, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठन (NTRO) के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे. यह भारत का ऐसा पहला जहाज है जो परमाणु और बैलेस्टिक मिसाइल को ट्रैक कर सकता है. कहा जा रहा है कि जहाज हिंद-प्रशांत क्षेत्र में देश की उपस्थिति को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.

    ऐसे जहाजों का संचालन अभी तक सिर्फ फ्रांस, अमेरिका, ब्रिटेन, रूस और चीन में ही होता है. जहाज को कमीशन किए जाने के बाद ऐसा जहाज ऑपरेट करने वाला भारत दुनिया का छठा देश होगा. इस जहाज के सर्विलांस सिस्टम के ऑपरेशन में 14 मेगावाट बिजली की आवश्यकता पड़ेगी जो INS ध्रुव खुद बनाएगा.

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    क्या है इसकी खासियत?
    >>आईएनएस ध्रुव, अपनी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं के साथ, भारतीय शहरों और सैन्य प्रतिष्ठानों की ओर जाने वाली दुश्मन के मिसाइलों के लिए एक शुरुआती चेतावनी प्रणाली के तौर पर काम करेगा.

    >> ध्रुव के पास डीआरडीओ द्वारा विकसित एक अत्याधुनिक सक्रिय स्कैन एरे रडार (एईएसए) भी है. इससे भारत पर नजर रखने वाले जासूसी उपग्रहों की निगरानी की जा सकेगी. साथ-साथ पूरे क्षेत्र में मिसाइल परीक्षणों की निगरानी करने में भी ये सक्षम होगा.

    >>ध्रुव भारत का पहला नौसैनिक पोत है जो लंबी दूरी पर परमाणु मिसाइलों को ट्रैक करने में सक्षम है. लिहाज़ा भारत-प्रशांत क्षेत्र में परमाणु बैलिस्टिक युद्ध के बढ़ते खतरे के साथ ये एक विशेष महत्व रखता है

    >>इनके अलावा, आईएनएस ध्रुव दुश्मन की पनडुब्बियों पर नज़र रखेगा. साथ ही रिसर्च में भी इसकी मदद ली जा सकती है. समुद्र तल को मैप करने की क्षमता से भी ये लैस है.

    Tags: DRDO, India Navy

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