Goa oxygen crisis: गोवा में कोविड अस्पताल में मौतों पर जागी सरकार, लगवा रही ऑक्सीजन टैंक

पिछले चार दिनों में अस्पताल में रात दो बजे से सुबह छह बजे के बीच मरने वाले मरीजों की संख्या 75 हो गयी है.

पिछले चार दिनों में अस्पताल में रात दो बजे से सुबह छह बजे के बीच मरने वाले मरीजों की संख्या 75 हो गयी है.

मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत (CM Pramod Sawant) ने कहा कि गोवा में ऑक्सीजन आपूर्ति सुनिश्चित करने और ट्रॉली सिस्टम की निर्भरता कम करने के लिए, हमने गोवा मेडिकल कॉलेज में 20,000 लीटर मेडिकल ऑक्सीजन टैंक की स्थापना का काम शुरू कर दिया है.

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पणजी. गोवा में बीती रात ऑक्सीजन की कमी (Oxygen Crisis in Goa) से मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (जीएमसीएच) में 15 और मरीजों की मौत हो गई. पिछले चार दिनों में 75 मरीजों की मौत हो चुकी है. ऑक्सीजन की कमी से लगातार हो रही मौतों पर राज्य सरकार ने अब एक्शन लिया है. जीएमसीएच में ऑक्सीजन की कमी को पूरा करने के लिए वहां टैंक की स्थापना की जा रही है.

मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत (CM Pramod Sawant) ने कहा कि गोवा में ऑक्सीजन आपूर्ति सुनिश्चित करने और ट्रॉली सिस्टम की निर्भरता कम करने के लिए, हमने गोवा मेडिकल कॉलेज में 20,000 लीटर मेडिकल ऑक्सीजन टैंक की स्थापना का काम शुरू कर दिया है. इस टैंक की स्थापना का काम तेजी से किया जा रहा, ताकि मरीजों को वक्त रहते ऑक्सीजन की सप्लाई की जा सके.

विपक्ष ने सीएम पर लगाए गंभीर आरोप

पिछले चार दिनों में 75 मरीजों की मौतों की मामले की जांच के लिए गोवा सरकार ने तीन सदस्यीय टीम बनाई है. गोवा फॉरवर्ड पार्टी ने राज्य के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत के खिलाफ शिकायत की. गोवा फॉरवर्ड पार्टी के नेता विजय सरदेसाई ने आरोप लगाया कि सीएम और स्वास्थ्य मंत्री के बीच कलह की वजह से लोगों की मौत हुई है. वहीं कांग्रेस ने पूरे मामले को दिनदहाड़े की गई हत्या बताया है.
बताया जा रहा है कि अस्पताल के डॉक्टर और भर्ती मरीजों के रिश्तेदार पूरी रात ऑक्सीजन प्रेशर के गिरने को लेकर फोन करते रहे. हाईकोर्ट में 26 लोगों की मौत को लेकर पीआईएल दाखिल करने वाले एक याचिकाकर्ता ने बताया कि रात में उन्हें भी अस्पताल को लेकर एक आपात फोन आया था.


उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर उन्होंने तुरंत ही स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को फोन किया और पुलिस मौके पर पहुंची. हालांकि, डॉक्टरों का कहना है कि अस्पताल में ऑक्सीजन प्रेशर 20 मिनट बाद ही ठीक किया जा सका, जो कि 15 मरीजों के लिए घातक साबित हुआ.

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