इज़राइल के लिए इस कारण खास है तीन मूर्ति चौक

तीन मूर्ति चौक का इज़राइल के साथ ऐतिहासिक संबंध है. तीन मूर्ति मेमोरियल की तीनों मूर्तियां तांबे की बनी हैं और हैदराबाद, जोधपुर और मैसूर लेंसर्स को रि-प्रेजेंट करती हैं. ये तीनों 15 इम्पिरियल सर्विस कैवलरी ब्रिगेड का हिस्सा रह चुके हैं.

News18Hindi
Updated: January 14, 2018, 3:46 PM IST
इज़राइल के लिए इस कारण खास है तीन मूर्ति चौक
तीन मूर्ति चौक अब इज़राइल के शहर 'हाइफा' के नाम पर 'तीन मूर्ति हाइफा चौक' के नाम से जाना जाएगा.
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Updated: January 14, 2018, 3:46 PM IST
इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू छह दिनों की अपनी पहली भारत यात्रा पर आ रहे हैं. नेतन्याहू इस दौरान पीएम मोदी के साथ एयरपोर्ट से सीधे तीन मूर्ति चौक जाएंगे और भारतीय सेना के जवानों को श्रद्धांजलि देंगे. आज तीन मूर्ति चौक का नाम भी बदला गया. तीन मूर्ति चौक अब इज़राइल के शहर 'हाइफा' के नाम पर 'तीन मूर्ति हाइफा चौक' के नाम से जाना जाएगा.

तीन मूर्ति चौक का इज़राइल के साथ ऐतिहासिक संबंध है. तीन मूर्ति स्मारक की तीनों मूर्तियां तांबे की बनी हैं, जो हैदराबाद, जोधपुर और मैसूर लेंसर्स को रि-प्रेजेंट करती हैं. ये तीनों 15 इम्पिरियल सर्विस कैवलरी ब्रिगेड का हिस्सा रह चुके हैं. इज़राइल के हाइफा शहर में 23 सितंबर 1918 को जंग लड़ी गई. इस लड़ाई में राजपूताने की सेना का नेतृत्व जोधपुर रियासत के सेनापति दलपत सिंह ने किया था.

इस लड़ाई में जोधपुर की सेना के करीब 900 सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए. आखिर में राठौड़ों को विजय मिली और उन्होंने हाइफा पर कब्जा कर लिया. राठौड़ों की इस बहादुरी के प्रभावित होकर भारत में ब्रिटिश सेना के कमांडर-इन-चीफ ने फ्लैग-स्टाफ हाउस के नाम से अपने लिए एक रिहायसी भवन का निर्माण करवाया.

भवन एक चौराहे से लगा हुआ है, इस चौराहे के बीच में गोल चक्कर के बीचों बीच एक स्तंभ के किनारे तीन दिशाओं में मुंह किए हुए तीन सैनिकों की मूर्तियां लगी हुई हैं. जो रणबांका राठौड़ों की बहादुरी को यादगार बनाने के लिए बनाई गई.

इसी स्मारक को तीन मूर्ति स्मारक चौक के नाम से जाना जाता है. आज इसका नाम 'तीन मूर्ति हाइफा चौक' रखा जाएगा. उत्तरी दिल्ली नगर निगम (NDMC) पहले ही तीन मूर्ति चौक का नाम बदलने की परमिशन दे चुकी है.

बता दें कि इजरायल की सरकार आज तक हाइफा, यरुशलम, रमल्लाह और ख्यात के समुद्री तटों पर बनी 900 भारतीय सैनिकों की समाधियों की अच्छी तरह देखरेख करती है. इजरायल के बच्चों को इतिहास की पाठ्य-पुस्तकों में भारतीय सैनिकों के शौर्य और पराक्रम की कहानियां पढ़ाई जाती हैं.


हर साल 23 सितंबर को भारतीय योद्धाओं को सम्मान देने के लिए हाइफा के मेयर, इजरायल की जनता और भारतीय दूतावास के लोग एकत्र होकर 'हाइफा दिवस' मनाते हैं. भारतीय सेना भी 23 सितंबर को 'हाइफा दिवस' मनाती है.

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