40 दिन पत्नी से दूर रहने के बाद ही सबरीमाला में होती है पुरुषों की एंट्री, जानिए ये फैक्ट्स

40 दिन पत्नी से दूर रहने के बाद ही सबरीमाला में होती है पुरुषों की एंट्री, जानिए ये फैक्ट्स
सबरीमाला मंदिर में पूजा करते पुजारी.

केरल के सबरीमाला मंदिर में दो महिलाओं ने प्रवेश कर 1500 साल पुरानी प्रथा को तोड़ दिया है. दोनों महिलाएं सुबह मंदिर के गर्भगृह तक पहुंचीं और उन्होंने पूजा-अर्चना की.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 2, 2019, 12:33 PM IST
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केरल के सबरीमाला मंदिर में दो महिलाओं ने प्रवेश कर 1500 साल पुरानी प्रथा को तोड़ दिया है. दोनों महिलाएं सुबह मंदिर के गर्भगृह तक पहुंचीं और उन्होंने पूजा-अर्चना की. सदियों से मंदिर में 10 साल की बच्‍चियों से लेकर 50 साल की महिलाओं के प्रवेश पर रोक थी. सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रथा पर रोक लगाते हुए मंदिर में महिलाओं के प्रवेश करने की इजाजत दे दी थी. इसके बावजूद महिलाओं को मंदिर में जाने से रोका जा रहा था. आइए जानते हैं सबरीमाला मंदिर को लेकर कुछ रोचक जानकारी...

1-सबरीमाला मंदिर में भगवान अयप्‍पा के दर्शन के लिए यहां आने वाले पुरुषों को भी कई टेस्‍ट पास करने पड़ते हैं. पुरुषों को मंदिर में प्रवेश से 40 दिन पहले से सात्विक और पवित्र जीवनशैली अपनानी पड़ती है. इस दौरान वह पूरी तरह से सादा जीवन बिताता और पत्‍नी से भी दूर रहना पड़ता है.
2-मंदिर में प्रवेश करने वाले भक्‍तों को काली और नीली पोशाक पहननी होती है. जब तक भक्‍तों की यात्रा पूरी नहीं हो जाती तब तक उन्‍‍‍‍‍हें दाढ़ी बनाने की इजाजत नहीं होती है. भक्‍तों के पूरे समय माथे पर चंदन का टीका लगाना जरूरी होता है.
3- सबरीमाला दुनिया को अकेला ऐसा मंदिर है जहां पर हर साल पांच करोड़ लोग दर्शन के लिए आते हैं. सबरीमाला मंदिर 18 पर्वतमालाओं के बीच बना हुआ है और मंदिर में भगवान अयप्‍पा की पूजा की जाती है.
4- सबरीमाला मंदिर श्रद्धालुओं के लिए साल में सिर्फ 15 नवंबर से जनवरी तक ही खुलता है. इसके अलावा मकर संक्रांति और महा विश्‍व संक्रांति और हमर मलयालम महीने के शुरुआती पांच दिनों में मंदिर में पूजा अर्चना की जाती है.
5- मंदिर के चोरों तरफ सभी पहाड़ियों में मंदिर बने हुए हैं. भगवान अयप्‍पा के साथ ही नीलाकल, कलाकेती और करीमाला मंदिर में भी भक्‍तों की काफी भीड़ रहती है.


6- इस मंदिर में जाने के लिए सैकड़ों भक्‍त घने जंगल से होकर पैदल ही रास्‍ता तय करते हैं. यह यात्रा इरुमली से शुरू होती है. यह रास्‍ता 61 किलोमीटर लंबा है
7- वंदीपेरियार से इस मंदिर की दूरी करीब 12.8 किलोमीटर और चालकयम से आठ किलोमीटर की दूरी है. कहते हैं कि भगवान अयप्‍पा चालयकम से यहां आए थे.
8- इस मंदिर तक पहुंचने के लिए 18 पवित्र सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं. जिनमें से पहली पांच सीढ़ियां मनुष्य की 5 इंद्रियों, फिर 8 सीढ़ियां मानवीय भावनाओं, अगली 3 सीढ़ियां मानवीय गुणों और आखिर की 2 सीढ़ियां ज्ञान और अज्ञान का प्रतीक मानी जाती हैं.
9- यहां पर आने वाले भक्‍तों को तत त्‍वं असि मंत्र का जाप करना होता है. इस मंत्र का अर्थ होता है वह तुम ही हो. इस मंदिर में दिया जाने वाला संदेश है कि हर किसी के अंदर भगवान का वास होता है.
10- मंदिर में प्रवेश करने वाले भक्‍त एक दूसरे को स्‍वामी कहकर बुलाते हैं. उनका मानना है कि वह जिस भी व्‍यक्‍ति से बात कर रहे हैं वह भगवान का रूप है.
11-आस्‍था है कि जब भगवान राम को वनवास हुआ था तब वह इसी जगह पर आए थे. भगवान राम ने सबरीमाला में रहने वाली भक्‍त शबरी ने अपने झूठे बेर खिलाए थे.
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