Women's Day 2020: मां के भेदभाव की शिकार ‘शीरो’ ने जिद से बदली जिंदगी, लड़के भी हौसला देख रह जाते हैं दंग


पैरों में घुंघरू बांध दिन रात भरतनाट्यम करने वाली शंकरी की शादी 12 साल की उम्र कर दी गयी थी.
पैरों में घुंघरू बांध दिन रात भरतनाट्यम करने वाली शंकरी की शादी 12 साल की उम्र कर दी गयी थी.

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (international women's day) के मौके पर देशभर की तमाम महिलाओं की जीविटता की कहानी चर्चा में है. जबकि इसी फेहरिस्‍त में कोलकाता की शंकरी हाल्दर (Shankari Haldar) का नाम भी शामिल है. बचपन में मां से भेदभाव सहने वाली ये महिला आज शहर में अपनी पिंक टैक्‍सी की वजह से पहचान रखती है.

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कोलकाता. रोज सुबह खाना पकाने के साथ बच्चों को तैयार करने और उन्हें टिफिन देकर स्कूल भेजने तक कोलकाता (Kolkata) की शंकरी हाल्दर (Shankari Haldar) सिर्फ एक मां होती हैं. इसके बाद वो अपने सपनों और जिंदगी की ‘स्टीयरिंग व्हील’ खुद अपने हाथों में ले लेती हैं. फिर वह ख्‍वाबों के दरवाजे को खोलकर और उम्मीद की चाबी घुमाकर कोलकाता की सड़कों पर निकल पड़ती हैं. यकीनन एक मां से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) की #SheInspiresUs वाली ‘शीरो’ ने अपने जज्‍बे से हर मुश्किल चुनौती को मात दी है.

इस वजह से बदला मन
2015 में पश्चिम बंगाल के बारासात से बेटे की दिमागी चोट का इलाज करवाने कोलकाता आयी शंकरी को जल्द ही समझ आ गया कि बेटे का इलाज पति की दिहाड़ी से पूरा होने वाला नहीं है, लिहाजा वो घर से निकलीं और लोगों के घरों में झाड़ू, बर्तन और खाना बनाने का काम करने लगीं. यही नहीं, शंकरी का काम उनकी मालकिन को बहुत पसंद आया और फिर मालकिन ने उसे गाड़ी चलाना सिखा दिया. इसके बाद शंकरी ने गाड़ी चलाने की ट्रेनिंग ली और 2016 में कमर्शियल वाहन चलाना शुरू कर दिया.

एक-एक रुपया जोड़ किया ये काम
एक एक रुपया जोड़ने के अलावा कुछ लोन लेकर शंकरी ने एक साल पहले अपनी पिंक टैक्सी सड़क पर उतारी और अपने ख्‍वाबों को पूरा करने में लग गईं. हालांकि अब उनका मन छोटी गाड़ी से नहीं भरता. शंकरी ने कहा कि जब वे किसी बस को ओवरटेक करते देखती हैं तो उनका मन होता है कि वे बस ही चलाएं.



बचपन में देखा बेटे-बेटियों में फर्क
शंकरी ने बचपन में मां से बेटों और बेटियों के बीच फर्क देखा. भाइयों की थाली में मछली का बड़ा टुकड़ा होता था और शंकरी को मिलता था बचाकुचा. यह सब देख शंकरी ने तभी ठान लिया था कि वो ऐसा ही कोई काम करेंगी जो पुरुष करते हैं. उन्‍होंने कहा कि मेरी मां बचपन में बेटों और हमारे बीच भेद करती थी, तब मुझसे कहती पैसे तो बेटे कमाएंगे. मैं सोचती थी कि बड़ी होकर ऐसा कुछ करना है कि सभी लड़के भी मेरा हौसला देखकर दंग रह जाएं.

 

12 साल में हुई थी शादी
कभी पैरों में घुंघरू बांध दिन रात भरतनाट्यम करने वाली शंकरी की शादी मात्र 12 साल की उम्र में कर दी गयी थी. जबकि 15 साल की छोटी सी उम्र में उनके सिर मां होने की जिम्मेदारी आ गयी. इसके बाद उनका जीवन पूरी तरह बदल गया और घुंघरू उनसे बहुत दूर चले गए. हालात से परेशान शंकरी ने ‘स्टीयरिंग व्हील’ को ही अपना साथी बना लिया है और कहती हैं कि गाड़ी बिना चलाए उनका दिन पूरा नहीं होता है. यकीनन अब जीवन की हर चुनौती उनके सामने छोटी नजर आती है.

(रिपोर्ट-आशिका सिंह)

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