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महिला दिवस विशेष: घर की चहारदीवारी छोड़ शिखर तक पहुंच रहीं बंगाल की महिलाएं

आज मनाया जा रहा है महिला दिवस. (File pic)

आज मनाया जा रहा है महिला दिवस. (File pic)

International Women's Day: पश्चिम बंगाल (West Bengal) बेहद खास है. इस राज्‍य में राजनीति के क्षेत्र को देखें तो उसमें महिलाएं बड़ी संख्‍या में प्रतिनिधित्‍व कर रही हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 8, 2021, 10:53 AM IST
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नई दिल्‍ली. दुनिया भर में आज 8 मार्च के दिन अंतरराष्‍ट्रीय महिला दिवस (International Women's Day) मनाया जा रहा है. इस दिन महिलाओं को उनके अधिकारों को जानने-समझने और समाज में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्‍साहित किया जाता है. ऐसे में पश्चिम बंगाल (West Bengal) बेहद खास है. इस राज्‍य में राजनीति के क्षेत्र को देखें तो उसमें महिलाएं बड़ी संख्‍या में प्रतिनिधित्‍व कर रही हैं. ऐसी ही एक महिला है जाग्‍योसेनी मंडल. उनका कहना है कि जब भी पश्चिम बंगाल में कोई भी आंदोलन हुआ तो महिलाएं उसमें आगे आई हैं. ऐसा स्‍वतंत्रता संग्राम से लेकर नक्‍सल मूवमेंट तक और आज भी हो रहा है.

पश्चिम बंगाल की एक अन्‍य महिला सुस्मिता बनर्जी समाजशास्‍त्री हैं. उनका कहना है कि महिलाओं का इस राज्‍य में आगे रहने के पीछे यहां की मूल संस्‍कृति जिम्‍मेदार है. यह संस्‍कृति महिलाओं को घर की चहारदीवारी में बंद न रहकर उससे बाहर निकलकर समाज में सक्रिय रहने और फैसले लेने की स्‍वतंत्रता देती है.

राजनीति की बात करें तो पश्चिम बंगाल ही देश का एक अकेला राज्‍य है, जहां मुख्‍यमंत्री एक महिला है. इस प्रदेश में कुल 40 लोकसभा सीट हैं. इनमें से 11 सीटों पर महिलाएं काबिज हैं. ऐसा किसी भी दूसरे राज्‍य में नहीं है. बंगाल में यह संख्‍या हर दूसरे राज्‍य से सबसे अधिक है. वहीं चुनाव आयोग के आंकड़ों पर गौर करें तो बंगाल के कुल 7.32 करोड़ मतदाताओं में से 3.59 करोड़ महिला मतदाता हैं. यह करीब 49.01 फीसदी हुआ.



राज्‍य की जिन 11 लोकसभा सीटों पर महिलाएं काबिज हैं, उनमें से 9 सीटें तो ममता बनर्जी की पार्टी (तृणमूल कांग्रेस) टीएमसी की ही हैं. इसके अलावा दो सीटों पर बीजेपी की ओर से महिलाएं चुनाव जीती थीं. इस उपलब्धि पर टीएमसी की सांसद माला राय ने बात करते हुए इसका श्रेय मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी यानी दीदी को दिया. उन्‍होंने कहा कि पहली बार मुख्‍यमंत्री बनने के बाद दीदी ने 2011 में हुए पंचायत चुनाव में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण दिया था. इससे महिलाओं में आत्‍मविश्‍वास बढ़ा था.

वहीं बीजेपी की सांसद रूपा गांगुली का कहना है कि पश्चिम बंगाल नारी शक्ति को जीता है. यहां लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता है. यहां की महिलाओं खुद को चहारदीवारी के अंदर कैद की हुई नहीं मिलेंगी. वे सब मुखर हैं और पूरी तौर पर सक्रिय हैं. वहीं कांग्रेस की महिला नेता कृष्‍णा देबनात का कहना है कि बंगाल को हमेशा से शिक्षा और संस्‍कृति के लिए जाना गया है. यहां महिलाएं सजग हैं.
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