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जम्‍मू-कश्‍मीर: इंटरनेट भी अभिव्यक्ति की आजादी के समान, पढ़ें SC के आदेश की 5 बड़ी बातें

News18Hindi
Updated: January 10, 2020, 12:19 PM IST
जम्‍मू-कश्‍मीर: इंटरनेट भी अभिव्यक्ति की आजादी के समान, पढ़ें SC के आदेश की 5 बड़ी बातें
सुप्रीम कोर्ट ने जम्‍मू-कश्‍मीर में पाबंदियों पर सुनाया फैसला.

उच्च्तम न्यायालय (Supreme Court) ने जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) प्रशासन से अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों जैसी आवश्यक सेवाएं प्रदान करने वाली संस्थाओं में इंटरनेट सेवाओं को बहाल करने के लिए कहा है.

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  • Last Updated: January 10, 2020, 12:19 PM IST
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नई दिल्‍ली. सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन से इंटरनेट के निलंबन के सभी आदेशों की समीक्षा करने के लिए कहा है. उच्च्तम न्यायालय ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन से अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों जैसी आवश्यक सेवाएं प्रदान करने वाली सभी संस्थाओं में इंटरनेट सेवाओं को बहाल करने के लिए कहा है. न्यायमूर्ति एनवी रमण, न्यायमूर्ति आर. सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति बीआर गवई की तीन सदस्यीय बेंच ने इन प्रतिबंधों को चुनौती देने वाली गुलाम नबी आजाद और अन्य की याचिकाओं पर पिछले साल 27 नवंबर को सुनवाई पूरी की थी. पढ़े सुप्रीम कोर्ट के आदेश से जुड़ी बड़ी बातें...

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
1. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इंटरनेट मौलिक अधिकार तो नहीं है, लेकिन अभिव्‍यक्ति की आजादी की ही तरह है. इंटरनेट के जरिये होने वाले सभी कारोबार या पेशे संविधान के अनुच्‍छेद-19(1)(a) और अनुच्‍छेद-19(1)(g)के तहत संरक्षित हैं. कोर्ट ने कहा कि असाधारण हालात में ही इंटरनेट बंद किए जाने चाहिए. साथ ही दोहाराया कि अनिश्चितकाल के लिए इंटरनेट बंद नहीं किया जा सकता है. सरकार बार-बार इंटरनेट बंद नहीं कर सकती है. बहुत जरूरी होने पर तय समय के लिए इस पर रोक लगाई जा सकती है.

बहाल हो इटंरनेट सेवा



2. कोर्ट ने सभी जरूरी सेवाओं के लिए 7 दिन के अंदर इंटरनेट सेवाओं को बहाल करने के लिए कहा है. उच्च्तम न्यायालय ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन से अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों जैसी आवश्यक सेवाएं प्रदान करने वाली सभी संस्थाओं में इंटरनेट सेवाओं को तत्‍काल बहाल करने के लिए कहा है.

धारा-144 मनमर्जी से नहीं लगा सकते
3. अगर पुख्ता जानकारी नहीं है तो धारा-144 नहीं लगाई जा सकती है. कोर्ट ने कहा है कि आप मनमर्जी से धारा-144 लागू नहीं कर सकते. लोगों को अधिकार होगा कि वे इसे कोर्ट में चुनौती दें. कोर्ट ने यह भी कहा कि धारा-144 का इस्तेमाल किसी के विचारों को दबाने के लिए नहीं किया जा सकता. सरकार इंटरनेट पर रोक और धारा-144 लगाने के आदेश सार्वजनिक करे.

पाबंदियों पर रिव्यू
4. सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से सभी पाबंदियों पर एक हफ्ते में फिर से रिव्यू करने को कहा है. साथ ही इसकी जानकारी को पब्लिक डोमेन में लाने को कहा है ताकि लोग कोर्ट जा सकें.

प्रेस की आज़ादी अहम
5.सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा है कि आज के लोकतंत्र में प्रेस की आज़ादी बेहद अहम है. कोर्ट ने कहा कि हम नागरिकों की आजादी के अधिकार और सुरक्षा के बीच बैलेंस बनाने की कोशिश कर रहे हैंं.

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First published: January 10, 2020, 11:16 AM IST
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