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नागरिकता कानून का विरोध: पश्चिम बंगाल के कुछ इलाकों में इंटरनेट सेवाएं सस्पेंड, कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने रोका रास्ता

भाषा
Updated: December 15, 2019, 4:41 PM IST
नागरिकता कानून का विरोध: पश्चिम बंगाल के कुछ इलाकों में इंटरनेट सेवाएं सस्पेंड, कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने रोका रास्ता
देशभर के मुस्लिमों का मानना है कि नया कानून देश भर में राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) लागू करने का पूर्व संकेत हो सकता है. (AP Photo)

संशोधित कानून (citizenship amendment law 2019) से समूचे पूर्वोत्तर भारत और पश्चिम बंगाल में आक्रोश है जहां लोगों को डर है कि यह अवैध आव्रजन की समस्या को और बढ़ा देगा.

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कोलकाता. संशोधित नागरिकता कानून (citizenship amendment law 2019) के खिलाफ पश्चिम बंगाल (west bengal) में जारी विरोध प्रदर्शनों के तीसरे दिन प्रदेश के नदिया, उत्तर 24 परगना और हावड़ा जिलों से हिंसा की छिटपुट खबरें सामने आई‍ हैं. पुलिस ने रविवार को इसकी जानकारी दी. उत्तर 24 परगना और नदिया जिलों के अमदंगा और कल्याणी इलाके में, प्रदर्शनकारियों ने कई प्रमुख मार्गों को अवरुद्ध किया और सड़कों पर लकड़ी के कुन्दे जलाए. जिले के देगंगा इलाके में दुकानों में तोड़-फोड़ करने के साथ ही टायर जलाए गए. नदिया में, प्रदर्शनकारियों ने कल्याणी एक्सप्रेस हाईवे को अवरुद्ध किया और कुछ ने संशोधित कानून की प्रतियां जलाईं .

इंटरनेट सस्पेंड
वहीं राज्य के एक अधिकारी ने कहा जारी विरोध प्रदर्शन के बीच पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में एहतियातन इंटरनेट सेवायें सस्पेंड कर दी गई हैं. इस संबंध में एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सरकार ने खासकर सोशल मीडिया पर अफवाहों और फर्जी खबरों पर रोक लगाने के लिए मालदा, मुर्शिदाबाद, हावड़ा, उत्तरी 24 परगना में और दक्षिणी 24 परगना के कई हिस्सों में इंटनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद करने का निर्णय लिया है. अधिकारी ने कहा, ‘बार-बार अनुरोध करने के बावजूद कुछ सांप्रदायकि शक्तियां हिंसक प्रदर्शन कर रही हैं. स्थिति के मद्देनजर प्रशासन ने राज्य के पांच जिलों में इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद करने का निर्णय लिया है.’

राज्य के कई इलाकों से विरोध प्रदर्शनों की खबरें आ रही है. बताया गया कि हावड़ा जिले के दोमजुर इलाके, वर्द्धमान और बीरभूम के कुछ हिस्सों से मिली जहां प्रदर्शनकारियों ने रैलियां निकालीं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. स्थिति को नियंत्रण में लेने के लिए पुलिस की बड़ी टुकड़ियों को मौके पर भेजा गया.



हालांकि, खबरों के मुताबिक, पिछले दो दिनों के उलट, हावड़ा-सियालदह और खड़गपुर खंडों पर ट्रेनों की आवाजाही सामान्य रही. तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं राज्य के शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने शांति की अपील की है और प्रदर्शनकारियों को आश्वस्त किया कि संशोधित कानून राज्य में लागू नहीं होगा.

चटर्जी ने कहा, 'हम हर किसी से शांति बनाए रखने की अपील करेंगे. हम आपको आश्वासन दे सकते हैं कि कानून राज्य में लागू नहीं किया जाएगा.' भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महासचिव सायंतन बसु ने सत्तारूढ़ पार्टी पर राज्य में खराब होती कानून-व्यवस्था को नियंत्रण में करने के लिए बहुत कम प्रयास करने का आरोप लगाया. संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ राज्य के कई हिस्सों में पिछले दो दिनों से हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं जहां प्रदर्शनकारियों ने रेलवे स्टेशनों को आग लगाने के साथ ही सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया है.

तृणमूल कांग्रेस ने नागरिकता कानून के विरोध में रैलियां निकालीं
दूसरी ओर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने नागरिकता संशोधन विधेयक के खिलाफ रविवार को पूरे राज्य में रैलियां निकालीं. विभिन्न जिलों में मंत्रियों समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने रैलियों का नेतृत्व किया और लोगों से शांति बनाये रखने तथा हिंसा में शामिल होने से बचने की अपील की. पोस्टर और तख्तियां लिये तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों ने मोदी सरकार के खिलाफ नारे लगाये और मांग की कि नये नागरिकता कानून को तुरन्त रद्द किया जाये.

तृणमूल कांग्रेस के नेता और शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने कहा, ‘हम चाहते हैं कि इस विभाजनकारी नागरिकता अधिनियम को तुरंत खत्म कर दिया जाए. हमारी राज्य सरकार पहले ही कह चुकी है कि इसे बंगाल में लागू नहीं किया जायेगा, इसलिए हम लोगों से अपील करते हैं कि वे कानून को अपने हाथ में न लें, और शांति से विरोध करें.’ तृणमूल प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस कानून के विरोध में सोमवार से सड़कों पर उतरेंगी.

बता दें संशोधित कानून के मुताबिक, पाकिस्तान, बांगलादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक प्रताड़ना झेलने वाले और 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आने वाले गैर मुस्लिम शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता दी जाएगी.

 

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First published: December 15, 2019, 2:47 PM IST
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अपडेटेड: April 09 (05:00 PM)
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स्रोत: जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी, U.S. (www.jhu.edu)
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