INX मीडिया केस : चिदंबरम को राहत नहीं, CBI को मिली 26 अगस्त तक की कस्टडी; जज ने कहा- विस्तृत जांच की जरूरत

News18Hindi
Updated: August 22, 2019, 7:37 PM IST
INX मीडिया केस : चिदंबरम को राहत नहीं, CBI को मिली 26 अगस्त तक की कस्टडी; जज ने कहा- विस्तृत जांच की जरूरत
INX Media Case: चिदंबरम (P Chidambaram) को सीबीआई (CBI) की विशेष अदालत में पेश किया गया. सीबीआई को कोर्ट से 5 दिन की कस्टडी मिली है.

INX Media Case: चिदंबरम (P Chidambaram) को सीबीआई (CBI) की विशेष अदालत में पेश किया गया. सीबीआई को कोर्ट से 5 दिन की कस्टडी मिली है.

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दिल्ली की एक अदालत ने गुरुवार को INX मीडिया भ्रष्टाचार मामले में कांग्रेस नेता पी चिदंबरम की चार दिन की सीबीआई हिरासत की अनुमति दे दी. स्पेशल जज अजय कुमार कुहर ने एजेंसी से कहा कि वह नियमों के अनुसार चिदंबरम का मेडिकल परीक्षण कराए. अदालत ने चिदंबरम के परिवार के सदस्यों और वकीलों को सीबीआई हिरासत के दौरान हर दिन आधे घंटे के लिए उनसे मिलने की अनुमति दी. जज ने कहा, 'तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, मैं देख रहा हूं कि पुलिस हिरासत उचित है.' और 26 अगस्त तक सीबीआई की हिरासत में भेज दिया.

जज अजय कुमार ने कहा कि चिदंबरम के खिलाफ आरोप गंभीर हैं और मामले में गहन और विस्तृत जांच की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि मनी ट्रेल का पता लगाने की आवश्यकता है साथ ही हिरासत में पूछताछ उपयोगी और उपयोगी हो सकती है. जज ने कहा कि पैसे की सुगमता में गहराई से जांच की आवश्यकता होती है.

इससे पहले  पूर्व वित्त मंत्री चिदंबरम को जोरबाग स्थित उनके आवास से बुधवार रात गिरफ्तार किया गया था. मामले में सीबीआई का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि इस घोटाले में चिदंबरम दूसरे लोगों के साथ आपराधिक साजिश रचने में शामिल थे.

चिदंबरम के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किये जाने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया. मेहता ने अदालत से कहा, 'वह (चिदंबरम) जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं.' उन्होंने यह भी कहा कि वह अपने जवाब में टाल-मटोल कर रहे हैं और गंभीर अपराध किया गया है.

सॉलीसिटर जनरल ने कहा- यह गंभीर मामला

मेहता ने कहा कि यह धन शोधन (मनी लाउंड्रिंग) का एक गंभीर और बड़ा मामला है.

उन्होंने कहा कि किसी चीज के एवज में फायदा पहुंचाए जाने को उजागर करने के लिए चिदंबरम को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की जरूरत है. उनका दस्तावेजों से आमाना-सामना कराये जाने की जरूरत है. मेहता ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले का भी जिक्र किया, जिसमें चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की गई है. उन्होंने इसमें की गई टिप्पणियों का भी उल्लेख किया.
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उन्होंने कहा कि इस मामले में अब तक आरोपपत्र दाखिल नहीं किया गया है और यह आरोपपत्र दाखिल करने से पहले का चरण है. उन्होंने कहा, 'इसलिए, हमें सामग्री की जरूरत है जो चिदंबरम के पास है.'

उन्होंने दलील दी, 'हिरासत में पूछताछ किये जाने पर प्रभावी जांच हो पाना संभव होगा.'

मेहता ने दलील दी कि आरोपी की गंभीर, सक्रिय और ज्ञात भूमिका रही है और धन का लेनदेन किया गया तथा जांच की जरूरत है. उन्होंने कहा कि प्रभावी जांच के लिए कुछ खास सवालों के जवाब पाने को लेकर चिदंबरम को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की जरूरत है.

यह है मामला

चिदंबरम को अदालत में प्रवेश करने के शीघ्र बाद अपनी पार्टी के नेताओं और वरिष्ठ अधिवक्ताओं - कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और विवेक तन्खा के साथ मशविरा करते देखा गया. चिदंबरम की पत्नी नलिनी, उनके बेटे कार्ति सहित उनके परिवार के अन्य सदस्य भी डी कृष्णन सहित अन्य वरिष्ठ अधिवक्ताओं के साथ अदालत कक्ष में थे.



अदालत कक्ष के बाहर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किये गए थे. चिदंबरम के वित्त मंत्री रहने के दौरान आईएनएक्स मीडिया समूह को विदेशी निवेश संवर्द्धन बोर्ड (एफआईपीबी) की मंजूरी दिलाने में बरती गई कथित अनियमितताओं को लेकर सीबीआई ने 15 मई 2017 को उनके खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज की थी. यह मंजूरी 2007 में 305 करोड़ रूपये के विदेशी धन प्राप्त करने के लिए दी गई थी. इसके बाद, ईडी ने भी 2018 में उनके खिलाफ इस सिलसिले में धनशोधन का एक मामला दर्ज किया था.

भाषा इनपुट के साथ

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First published: August 22, 2019, 6:36 PM IST
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