ED ने चिदंबरम के खिलाफ नया लुकआउट सर्कुलर जारी किया

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने चिदंबरम को आईएनएक्स मीडिया मामले (INX Media Case) में सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (CBI And ED) की गिरफ्तारी से किसी भी तरह का संरक्षण देने से मना कर दिया था.

News18Hindi
Updated: August 21, 2019, 2:01 PM IST
ED ने चिदंबरम के खिलाफ नया लुकआउट सर्कुलर जारी किया
दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने चिदंबरम को आईएनएक्स मीडिया मामले (INX Media Case) में सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (CBI And ED) की गिरफ्तारी से किसी भी तरह का संरक्षण देने से मना कर दिया था.
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Updated: August 21, 2019, 2:01 PM IST
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी-Enforcement Directorate) ने आईएनएक्स मीडिया (Inx Media)मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व केन्द्रीय मंत्री पी चिदंबरम (P. Chidambaram) के खिलाफ एक नया लुकआउट नोटिस (Look Out Notice)जारी किया.

अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि कांग्रेस नेता के खिलाफ लुकआउट नोटिस सभी सड़क मार्ग, हवाई मार्ग तथा समुद्र बंदरगाहों और वहां की कानून प्रवर्तन एजेंसियों को भेज दिए गए हैं.

ED की अनुमति के बिना न जाएं बाहर

इसमें यह भी कहा गया है कि कांग्रेस नेता को ईडी की अनुमति के बिना भारत की सीमा से बाहर न जाने दिया जाए. अधिकारियों ने बताया कि यह एजेंसी द्वारा उठाए गए ऐहतियादी कदम हैं क्योंकि चिदंबरम के पते-ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं है, और आईएनएक्स मीडिया मामले की जांच को आगे बढ़ाने में उनकी जरूरत है.

गौरतलब है कि दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने मंगलवार को चिदंबरम को आईएनएक्स मीडिया मामले में सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय की गिरफ्तारी से किसी भी तरह का संरक्षण देने से मना कर दिया था.

सुप्रीम कोर्ट में चिदंबरम की याचिका

बता दें चिदंबरम ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में अपनी याचिका में कहा है कि आईएनएक्स मीडिया मामले (INX Media Case)में 'किंगपिन' के रूप में जो हाईकोर्ट का अवलोकन था, वह पूरी तरह से निराधार था और प्राथमिकी 'राजनीति से प्रेरित और प्रतिशोध की कार्रवाई' थी. पूर्व केंद्रीय मंत्री ने बुधवार को आईएनएक्स मीडिया मामले में अग्रिम जमानत के लिए उनकी याचिका खारिज करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की.
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उन्होंने याचिका में कहा 'जज ने कहा कि याचिकाकर्ता किंगपिन है यानी इस मामले में महत्वपूर्ण साजिशकर्ता पूरी तरह से आधारहीन है और बिना किसी सामग्री के समर्थन में है.जज ने महत्वपूर्ण तथ्य को नजरअंदाज किया है कि याचिकाकर्ता ने विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) की सर्वसम्मति से मंजूरी दी थी. ), जिसकी अध्यक्षता सचिव, आर्थिक मामलों और भारत सरकार के पाँच अन्य सचिवों ने की थी.'

भाषा इनपुट के साथ

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First published: August 21, 2019, 1:21 PM IST
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