देशद्रोही, अलगाववादी और आतंकवादियों को सबक सिखाने के लिए जारी रहेगी कानून की ये धारा

केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से बुधवार को संसद में जानकारी दी गई कि सरकार आईपीसी की धारा 124(A) यानी देशद्रोह के कानून को समाप्त नहीं करेगी.

विक्रांत यादव | News18Hindi
Updated: July 3, 2019, 1:33 PM IST
देशद्रोही, अलगाववादी और आतंकवादियों को सबक सिखाने के लिए जारी रहेगी कानून की ये धारा
1860 में बनी इस धारा को जारी रखेगी मोदी सरकार. (सांकेतिक फोटो)
विक्रांत यादव
विक्रांत यादव | News18Hindi
Updated: July 3, 2019, 1:33 PM IST
देश के कानून में देशद्रोह यानी आईपीसी की धारा 124 (A) बनी रहेगी. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बुधवार को राज्यसभा में इस बात की जानकारी दी. लोकसभा चुनाव के दौरान देशद्रोह की धारा भी बड़ा मुद्दा बनी थी. विपक्ष का आरोप है कि अंग्रेजों के समय के इस कानून का सरकारें दुरूपयोग कर रही है और अब इसे खत्‍म करने का समय आ गया है. कांग्रेस ने तो अपने घोषणा पत्र में कह दिया था कि सत्ता में आने पर वो इस कानून को खत्म कर देगी. हालांकि कांग्रेस को अपनी इस घोषणा का काफी बड़ा राजनीतिक नुकसान भी झेलना पड़ा था.

देश के चुनाव में राष्ट्रवाद बड़ा मुद्दा बनकर उभरा था. बीजेपी को इस मुद्दे पर जनता का बड़ा साथ मिला और पार्टी ने अपने बूते पहले बार 300 का आंकड़ा पार किया. राष्ट्रवाद के इस मुद्दे को बीजेपी ने ओर मजबूती से आगे बढ़ाने का फैसला किया है.

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कही ये बात
केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से बुधवार को संसद में जानकारी दी गई कि सरकार आईपीसी की धारा 124(A) यानी देशद्रोह के कानून को समाप्त नहीं करेगी. सरकार का मानना है कि देशद्रोही, अलगाववादी और आतंकवादी तत्वों से निपटने के लिए इस कानून का रहना आवश्यक है. जाहिर है कि सरकार का ये जवाब अपने उन सभी आलोचकों को भी है, जो लगातार इस धारा को खत्म करने की मांग करते रहे हैं.

1860 के कानून को कांग्रेस खत्‍म करना चाहती है
दरअसल, कांग्रेस ने 2019 के अपने चुनावी घोषणा पत्र में इस कानून को समाप्त करने की बात कहकर विवाद खड़ा कर दिया था. इस कानून को हटाने के समर्थन में दलील दी जाती रही है कि 1860 में बने इस कानून को अंग्रेजों ने आज़ादी के आंदोलन को कुचलने के लिए बनाया था. उस समय आज़ादी के सिपाहियों के खिलाफ इस धारा के तहत कार्रवाई की जाती थी. देश के आजाद होने के बाद भी इस धारा को बदला नहीं गया.

विपक्ष का कहना था की सरकारें अब अपने हितों के लिए इस धारा का दुरूपयोग कर रही हैं. हालांकि कांग्रेस की इस सोच को चुनाव के दौरान जनता ने पूरी तरह से नकार दिया. हाल ही में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद ने एक टीवी चैनल को दिये साक्षात्कार में ये स्वीकार किया था कि इस घोषणा का कांग्रेस को चुनाव में राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा. शायद यही कारण है कि अब इस धारा के विरोध में कांग्रेस के स्वर सुनाई नहीं दे रहे हैं.
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First published: July 3, 2019, 1:23 PM IST
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