IPS अधिकारी ने जागरूकता फैलाने को शेयर किया स्वेटर पहने बकरे का फोटो, कहा- ठंड उन्हें भी लगती है जो कह नही सकते

(फोटो: Twitter/Dipanshu Kabra@ipskabra)
(फोटो: Twitter/Dipanshu Kabra@ipskabra)

ठंड के चलते कई पशु-पक्षियों की मौत हो जाती है. ऐसे में IPS अधिकारी दीपांशु काबरा (Dipanshu Kabra) की पोस्ट ने लोगों को जागरूक करने का काम किया है. लोगों ने जानवरों की मदद करने का वादा किया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 5, 2020, 11:35 AM IST
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नई दिल्ली. सर्दियों ने दस्तक दे दी है. भारत के कई शहरों में पारा तेजी से कम होने लगा है. ऐसे में लोग आने वाली ठंड (Winter) का सामना करने के लिए गर्म कपड़ों के साथ तैयार हैं. खैर यह तो रही इंसानों की बात जो आग जलाकर या गर्म कपड़े पहनकर ठंड से खुद को बचा लेंगे. उन जानवरों का क्या जो खुद को ठिठुरने से बचाने के लिए कुछ भी नहीं कर सकते. इन मासूम जानवरों की परेशानियों को दूर करने का बीड़ा आईपीएस अफसर दीपांशु काबरा ने उठाया है. उन्होंने अपनी अनोखी ट्विटर पोस्ट (Twitter Post) के जरिए लोगों को जागरूक करने की कोशिश की है.


बकरे को पहनाया स्वेटरकाबरा ने अपने ट्विटर हैंडल से स्वेटर पहने हुए एक बकरे की तस्वीर साझा की है. उन्होंने लिखा है, 'ठंड उन्हें भी लगती है जो कह नहीं सकते...अपने आसपास रहने वाले मूक प्राणियों की खामोशी को समझें और उन्हें ठंड से बचाने का प्रयास करें, हर साल शीतलहर के कारण बड़ी संख्या में पशु,पक्षियों की जान चली जाती है, आपके छोटे से प्रयास से उन्हें ठंड से बचाया जा सकता है...' काबरा की पोस्ट का असर यह हुआ कि कई सोशल मीडिया यूजर्स ने बेसहारा जानवरों की मदद करने की जिम्मेदारी उठा ली है. उनकी पोस्ट को जमकर रीट्वीट और शेयर किया जा रहा है.




आईएफएस अधिकारी ने भी ट्विटर के जरिए दिया था जागरूकता का संदेश
कुछ दिनों पहले आईएफएस अधिकारी श्वेता बोद्दू ने भी नदी साफ रखने की कोशिश कर रहे नाशिक के रहने वाले चंद्र किशोर पाटिल की तस्वीर शेयर की थी. उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा था 'मैंने इस युवक को हाथ में सीटी लेकर रोड के किनारे पूरा दिन खड़े देखा. वह लोगों को गोदावरी नदी में दशहरा का कचरा फेंकने से रोक रहा था. मिस्टर पाटिल, सम्मान.' खास बात है कि किशोर पुल पर पूरा दिन खड़े होकर लोगों को नदी में गंदगी फेंकने से रोक रहे थे. अगर लोग उनका विरोध करते, तो वे उन्हें नदी का गंदा पानी पीने के लिए कहते. किशोर ऐसा पिछले पांच साल से कर रहे हैं.
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