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क्या दिखावा हैं गायों पर BJP की चिंताएं? सरकारें नहीं चलाती गौशालाएं

Photo: Gettyimages

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गाय आज भारतीय राजनीति के केंद्र में है। हिंदुवादी संगठन तो शुरू से इस मुद्दे पर उग्र रहे हैं लेकिन केंद्र में मोदी सरका ...अधिक पढ़ें

    नई दिल्‍ली। गाय आज भारतीय राजनीति के केंद्र में है। हिंदुवादी संगठन तो शुरू से इस मुद्दे पर उग्र रहे हैं लेकिन केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद बीजेपी और उसके नेता भी इसे लेकर मुखर होते जा रहे हैं। हालांकि पार्टी की ये मुखरता गायों के लिए सिर्फ जुबानी जमाखर्च ही नजर आती है।

    एक आरटीआई के जरिए खुलासा हुआ है कि राजस्थान को छोड़ दिया जाए तो बीजेपी शासित तमाम राज्यों में एक भी सरकारी गौशाला नहीं है। ये हाल उस देश का है जहां हर गली-चौराहे पर लावारिस गायें घूमती देखी जा सकती हैं। देश में इस समय कुल 4187 गौशालाएं हैं। इनमें से महज 1413 ही सरकारी हैं, बाकी 2774 गौशालाएं गैरसरकारी संगठन चला रहे हैं। ये आंकड़ा ये बताने के लिए काफी है कि देश में गौवंश की देखभाल के लिए सरकारों की ओर से संजीदगी कितनी है।

    खास बात ये है कि गायों को लेकर राजनीति करने वाली बीजेपी के राज में तो सरकारी गौशालाओं जैसी कोई चीज है ही नहीं। हालांकि राजस्थान इसका अपवाद है। राजस्थान सरकार ने गाय पालने के मामले में सभी राज्‍यों को पीछे छोड़ रखा है। वसुंधरा राजे सरकार रिकार्ड 1304 गौशालाएं चला रही है। यहां पर देश में पहली बार गौरक्षा मंत्रालय और मंत्री बनाया गया है। ओटाराम राजस्थान सरकार में गौरक्षा मामलों के मंत्री हैं। लेकिन इन गौशालाओं में गायों की जो हालत है उसे हिंगोनिया के उदाहरण से समझा जा सकता है जहां बदइंतजामी की वजह से 2004 से अब तक एक लाख गायें दम तोड़ चुकी हैं।

    राजस्थान के अलावा भाजपा शासित राज्यों असम, छत्‍तीसगढ़, गोवा, गुजरात, झारखंड, मध्‍य प्रदेश, महाराष्‍ट्र, पंजाब और जम्‍मू कश्‍मीर में एक भी सरकारी गौशाला नहीं है। गौरक्षा और बीफ जैसे मुद्दे पर बीजेपी के सबसे मुखर मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के खुद के राज्य हरियाणा में मात्र 2 सरकारी गौशालाएं हैं। जबकि यहां गौसेवा आयोग और गोतस्‍करी रोकने के लिए एक वरिष्‍ठ आईपीएस अधिकारी की निगरानी में टीम तैनात की गई है।

    जिस भाजपा शासित राज्‍य महाराष्‍ट्र के नाम देश में सबसे अधिक 316 बूचड़खाने चलाने का रिकॉर्ड है, वहां एक भी सरकारी गौशाला नहीं है। इसके उलट गैरबीजेपी शासित राज्य गायों की देखभाल के मुद्दे पर तुलनात्मक रूप से ज्यादा संवेदनशील नजर आते हैं। नीतीश कुमार की सरकार बिहार में 87 गौशालाएं चला रही है। बिहार इकलौता ऐसा बड़ा राज्य है जहां गौशाला चलाने का काम पूरी तरह से राज्य सरकार के जिम्मे है और वहां गैरसरकारी संगठनों की कोई गौशाला नहीं है।

    यदुवंशी कहलाने वाले अखिलेश यादव की सरकार राज्य में 8 गौशाला चला रही है। दिल्ली सरकार पांच तो हिमाचल प्रदेश सरकार एक, कर्नाटक सरकार दो, चंडीगढ़ प्रशासन तीन और ओडिशा सरकार एक सरकारी गोशाला चला रही है। फरीदाबाद निवासी रविंद्र चावला ने पशुपालन, डेयरी और मत्‍स्यपालन विभाग में के कैटल डिवीजन में आरटीआई डालकर यह जानकारी हासिल की है। जिसमें पता चला है कि देश में सरकार से दोगुनी गौशालाएं तो गैर सरकारी संगठन चला रहे हैं।

    चावला की आरटीआई से ही इस बात का खुलासा हुआ था कि देश में बीजेपी शासित राज्यों में ही सर्वाधिक बूचड़खाने चल रहे हैं। (पढ़ें-पॉलीटिक्स बीफ की, पॉलिसी बूचड़खाने की)। हालांकि इस मुद्दे पर बीजेपी का कहना यही है कि वो गायों के देखभाल को लेकर पूरी तरह से गंभीर है। पार्टी के राष्‍ट्रीय प्रवक्‍ता श्रीकांत शर्मा का कहना है कि सभी भाजपा शासित राज्‍यों में गायों की रक्षा के लिए काम हो रहा है।

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    Tags: BJP, राजस्थान

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