क्या भीख मांगने को अपराध की श्रेणी से हटाया जाना चाहिए? सुप्रीम कोर्ट ने 5 राज्यों से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में 2011 की जनगणना का उल्लेख करते हुए कहा गया था कि भारत में भिखारियों की कुल संख्या 4,13,670 है.

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में 2011 की जनगणना का उल्लेख करते हुए कहा गया था कि भारत में भिखारियों की कुल संख्या 4,13,670 है.

Supreme Court: याचिका में यह भी कहा गया है कि भीख मांगने को अपराध बनाने संबंधी धाराएं संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हैं. याचिका में दिल्ली हाईकोर्ट के अगस्त 2018 के उस फैसले का जिक्र किया गया है जिसमें कहा गया था कि राष्ट्रीय राजधानी में भीख मांगना अब अपराध नहीं होगा.

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  • Last Updated: April 10, 2021, 12:09 PM IST
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नई दिल्ली. उच्चतम न्यायालय (Supreme Court)  ने उस याचिका पर केन्द्र और कुछ राज्यों से जवाब मांगा है जिसमें भीख मांगने (Begging) को अपराध की श्रेणी में रखने वाले प्रावधानों को निरस्त किये जाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है. याचिका में कहा गया है कि इन प्रावधानों के चलते लोगों के पास भीख मांगकर अपराध करने या भूखा मरने का ‘अनुचित विकल्प’ ही बचेगा. सुप्रीम कोर्ट ने भीख मांगने को अपराध की श्रेणी से हटाने की याचिका पर 5 राज्यों से जवाब मांगा है. इन्हें 3 हफ्ते में जवाब देना होगा. जिन राज्यों से जवाब मांगा गया है वो हैं- बिहार, महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब और हरियाणा.

आपको बता दे कि मेरठ के रहने वाले विशाल पाठक ने सुप्रीम कोर्ट एक याचिका दायर की थी जिसमें उन्होंने कहा था कि भीख मांगने को अपराध बनाने संबंधी धाराएं संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करती है. याचिका में कहा गया है कि इन प्रावधानों के चलते लोगों के पास भीख मांगने के काम को अपराधी बनाना लोगों को एक अपराध करने या भूखा मरने का अनुचित विकल्प ही बचेगा.

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क्या कहा गया है याचिका में?
याचिका में यह भी कहा गया  है कि भीख मांगने को अपराध बनाने संबंधी धाराएं संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हैं.  याचिका में दिल्ली हाईकोर्ट  के अगस्त 2018 के उस फैसले का जिक्र किया गया है जिसमें कहा गया था कि राष्ट्रीय राजधानी में भीख मांगना अब अपराध नहीं होगा.



क्या है दलील?



याचिका में कहा गया है कि बंबई भिक्षावृत्ति रोकथाम अधिनियम 1959 के प्रावधान जिनमें भीख मांगने को एक अपराध के रूप में माना गया है, जोकि संवैधानिक रूप से सही नहीं है. आपको बता दे कि सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में 2011 की जनगणना का उल्लेख करते हुए कहा गया था कि भारत में भिखारियों की कुल संख्या 4,13,670 है. पिछली जनगणना के बाद से यह संख्या बढ़ी है.
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