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कश्मीर में 40 साल में आठवीं बार लागू होगा राज्यपाल शासन! जानें कब-कब हुआ ऐसा

News18Hindi
Updated: June 19, 2018, 6:50 PM IST
कश्मीर में 40 साल में आठवीं बार लागू होगा राज्यपाल शासन! जानें कब-कब हुआ ऐसा
बीजेपी ने पीडीपी के साथ गठबंधन वाली जम्‍मू कश्‍मीर सरकार से समर्थन वापस ले लिया है.

सरकार बनाने के लिए नए गठबंधन की जरूरत पड़ेगी और इसमें भी पीडीपी व नेशनल कांफ्रेंस को साथ आना होना तभी सरकार बन सकती है.

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पीडीपी-बीजेपी गठबंधन के टूटने के बाद जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू होने की संभावना तेज हो गई है. अगर ऐसा होता है तो 40 साल में आठवीं बार ऐसा होगा. वहीं एनएन वोहरा के राज्यपाल रहते यह चौथा मौका होगा जब राज्य में केंद्र का शासन होगा. पूर्व नौकरशाह वोहरा 25 जून 2008 को जम्मू कश्मीर के राज्यपाल बने थे.

पीडीपी के साथ जम्मू कश्मीर में करीब तीन साल गठबंधन सरकार में रहने के बाद भाजपा ने सरकार से समर्थन वापसी की मंगलवार को घोषणा की. भगवा पार्टी ने कहा कि राज्य में बढ़ते कट्टरपंथ और आतंकवाद के चलते सरकार में बने रहना मुश्किल हो गया था.

विडंबना यह भी है कि निवर्तमान मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के दिवंगत पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद की उन राजनीतिक घटनाक्रमों में प्रमुख भूमिका थी, जिस कारण राज्य में सात बार राज्यपाल शासन लागू हुआ. पिछली बार मुफ्ती सईद के निधन के बाद आठ जनवरी 2016 को जम्मू कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू हुआ था. उस दौरान पीडीपी और भाजपा ने कुछ समय के लिए सरकार गठन को टालने का निर्णय किया था.

तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से संस्तुति मिलने पर जम्मू कश्मीर के संविधान की धारा 92 को लागू करते हुए वोहरा ने राज्य में राज्यपाल शासन लगाया था. जम्मू कश्मीर में मार्च 1977 को पहली बार राज्यपाल शासन लागू हुआ था. उस समय एलके झा राज्यपाल थे. सईद की अगुवाई वाली राज्य कांग्रेस ने नेशनल कांफ्रेंस के नेता शेख महमूद अब्दुल्ला की सरकार से समर्थन वापस ले लिया था, जिसके बाद राज्यपाल शासन लागू करना पड़ा था.

मार्च 1986 में एक बार फिर सईद के गुलाम मोहम्मद शाह की अल्पमत की सरकार से समर्थन वापस लेने के कारण राज्य में दूसरी बार राज्यपाल शासन लागू करना पड़ा था. इसके बाद राज्यपाल के रूप में जगमोहन की नियुक्ति को लेकर फारूक अब्दुल्ला ने मुख्यमंत्री के पद से त्यागपत्र दे दिया था. इस कारण सूबे में तीसरी बार केंद्र का शासन लागू हो गया था. सईद उस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री थे और उन्होंने जगमोहन की नियुक्ति को लेकर अब्दुल्ला के विरोध को नजरंदाज कर दिया था. इसके बाद राज्य में छह साल 264 दिन तक राज्यपाल शासन रहा जो सबसे लंबी अवधि है.

इसके बाद अक्टूबर 2002 में चौथी बार और 2008 में पांचवीं बार केंद्र का शासन लागू हुआ. राज्य में छठीं बार साल 2014 में राज्यपाल शासन लागू हुआ था.

जानिए राज्‍य में कब-कब राज्‍यपाल शासन रहा-
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26 मार्च 1977 से नौ जुलाई 1977: कांग्रेस के समर्थन लेने के बाद शेख अब्‍दुल्‍ला के नेतृत्‍व वाली राज्‍य सरकार अल्‍पमत में आ गई. इसके चलते 105 दिन तक राज्‍यपाल का शासन रहा.

6 मार्च 1986 से सात नवंबर 1986: विधानसभा में बहुमत की कमी के चलते 246 दिन तक राज्‍यपाल का शासन रहा.

19 जनवरी 1990 से नौ अक्‍टूबर 1996: खराब कानून व्‍यवस्‍था और हिंसा के चलते छह साल और 264 दिन तक राज्‍यपाल का नियंत्रण रहा.

18 अक्‍टूबर 2002 से दो नवंबर 2002: एक बार फिर से अस्‍पष्‍ट नतीजों के चलते 15 दिन तक राज्‍यपाल शासन रहा.

11 जुलाई 2008 से पांच जनवरी 2009: गठबंधन टूटने के बाद बहुमत न होने के चलते 178 दिन तक कोई सरकार नहीं रही. ऐसा तत्‍कालीन सीएम गुलाम नबी आजाद के अमरनाथ यात्रा के लिए जमीन का आवंटन करने के फैसले के बाद पीडीपी के गठबंधन तोड़ने के चलते हुआ.

नौ जनवरी 2015 से एक मार्च 2015: राज्‍य के चुनावों में किसी को बहुमत न मिलने के कारण कोई सरकार नहीं बनी. इसके बाद बीजेपी और पीडीपी के बीच गठबंधन का समझौता हुआ.

आठ जनवरी 2016 से चार अप्रैल 2016: तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री मुफ्ती मोहम्‍मद सईद के निधन के चलते 87 दिन तक राज्‍यपाल का शासन रहा.

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First published: June 19, 2018, 5:00 PM IST
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