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  • IS POOR QUALITY OXYGEN BEHIND BLACK FUNGUS IN COVID PATIENTS KARNATAKA ORDERS STUDY TO TRACE ITS SOURCE

Black Fungus: क्या घटिया क्वॉलिटी की ऑक्सीजन से फैल रहा ब्लैक फंगस? पता लगाएगी कर्नाटक सरकार

कर्नाटक में पिछले एक सप्ताह में ब्लैक फंगस के लगभग 700 मामले दर्ज किए गए.

Coronavirus Black Fungus: कर्नाटक में कोविड टास्क फोर्स के प्रमुख और उपमुख्यमंत्री डॉ. सीएन अश्वथ नारायण ने माइक्रोबायोलॉजिस्ट की एक टीम को संक्रमण से प्रभावित सभी रोगियों की मेडिकल हिस्ट्री और इलाज के दौरान उन्हें दिए गए ऑक्सीजन के स्रोत का डेटा एनालिसिस करने को कहा है, ताकि ब्लैक फंगस के असली कारणों का पता लगाया जा सके.

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    (दीपा बालाकृष्णन)

    बेंगलुरु: कोरोना वायरस की दूसरी लहर के बीच ब्लैक फंगस (Mucormycosis) का खतरा भी बढ़ता जा रहा है. पहले ब्लैक फंगस (Coronavirus Black Fungus) का सबसे बड़ा कारण स्टेरॉयड को माना जा रहा था, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि कई मरीज ऐसे भी मिल रहे हैं जिन्होंने स्टेरॉयड का इस्तेमाल किया ही नहीं है. ऐसे में आशंका व्यक्त की जा रही है कि ब्लैक फंगस के संक्रमण का कारण मेडिकल ऑक्सीजन सिलेंडर (Medical Oxygen) का इस्तेमाल भी हो सकता है.

    इस बीच कर्नाटक सरकार ने राज्य में म्यूकरमाइकोसिस यानी ब्लैक फंगस के मामलों में भारी उछाल का पता लगाने के लिए कोविड-19 से पीड़ित रोगियों को दिए गए ऑक्सीजन के स्रोत का पता लगाने को लेकर एक स्टडी का आदेश दिया है. माइक्रोबायोलॉजिस्ट की एक टीम को संक्रमण से प्रभावित सभी रोगियों की मेडिकल हिस्ट्री और इलाज के दौरान उन्हें दिए गए ऑक्सीजन के स्रोत का डेटा एनालिसिस करने को कहा है, ताकि ब्लैक फंगस के असली कारणों का पता लगाया जा सके.

    Black Fungus: स्टेरॉयड के ज्‍यादा इस्‍तेमाल से ही नहीं, गंदगी से भी बढ़ रहा ब्‍लैक फंगस का मामला



    कर्नाटक में कोविड टास्क फोर्स के प्रमुख और उपमुख्यमंत्री डॉ. सीएन अश्वथ नारायण ने कहा कि अस्पतालों में ऑक्सीजन की खराब गुणवत्ता, सिलेंडरों में पाइपिंग, उद्योगों या ऑक्सीजन प्लांट को पानी की सप्लाई की खराब गुणवत्ता ब्लैक फंगस के होने का कारण हो सकती है.

    कोविड रोगियों के पैटर्न की स्टडी कराने का फैसला रविवार को उपचार प्रोटोकॉल समिति के ब्लैक फंगस के मामलों की समीक्षा के बाद लिया गया है. अकेले कर्नाटक में पिछले एक सप्ताह में ब्लैक फंगस के लगभग 700 मामले दर्ज किए गए. दुनिया के किसी भी कोविड-प्रभावित देश में इस तरह के मामले दर्ज नहीं किए गए हैं. ऐसे में भारत के अस्पतालों में भर्ती होने के दौरान इलाज और इसके उपकरणों (मशीनों) की गुणवत्ता पर संदेह पैदा हो गया है.

    मणिपाल अस्पताल (बेंगलुरु) में सर्जन डॉक्टर संपत चंद्र प्रसाद राव ने इस तरह के स्टडी की सिफारिश की. उन्होंने कहा कि ब्लैक फंगस के मामलों में वृद्धि के संभावित कारण या तो निम्न गुणवत्ता वाले ऑक्सीजन सिलेंडर या अस्पतालों के आईसीयू में खराब पाइपिंग सिस्टम या उद्योग स्तर पर प्रदूषण के कारण हो सकते हैं. डॉक्टर राव को यह भी शक था कि वेंटिलेटर में साधारण नल के पानी के इस्तेमाल से इलाज में कई खामियां हो सकती हैं.

    बयान में कहा गया है, 'ऑक्सीजन की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए औद्योगिक ऑक्सीजन बड़ी मात्रा में खरीदा जा रही है. सवाल ये है कि उद्योगों से सप्लाई की जाने वाली ऑक्सीजन, मेडिकल ऑक्सीजन की गुणवत्ता से मेल खाती है या नहीं.'

    अस्पताल में भर्ती होने के दौरान रिपोर्ट किए गए ब्लैक फंगस के मामलों को लेकर सूक्ष्मजीवविज्ञानी अध्ययन (माइक्रोबायोलॉजिकल स्टडी) सोमवार से शुरू होगा.
    Published by:Anjali Karmakar
    First published: