Analysis: मोदी सरकार की अनूठी 2020 में बदल जाएगा रेलवे का ढांचा

Analysis: मोदी सरकार की अनूठी 2020 में बदल जाएगा रेलवे का ढांचा
सरकार जल्द से जल्द उस प्लान पर काम करना चाहती है, जो रेलवे को घाटे से उबार सके. (फाइल फोटो)

जब से CAG ने रेलवे (Railway) को लेकर अपनी रिपोर्ट जारी की है, तभी से रेलवे में बड़े बदलाव की चर्चा चल रही है. सवाल ये है कि क्या कोई ऐसी तरकीब है, जिससे भारतीय रेल मुनाफे में आ जाए?

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 6, 2020, 2:54 PM IST
  • Share this:
  • fb
  • twitter
  • linkedin
रेल मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने दो दिन चली परिवर्तन संगोष्ठी के बहाने रेलवे में चल रही तमाम अटकलों को खत्म करने की कोशिश की है. सूत्रों की मानें तो इस संगोष्ठी के बहाने रेलमंत्री (Rail Minister) ने रेलवे अधिकारियों के कैडर स्ट्रक्चरिंग से लेकर निजीकरण तक, रेलवे में बाहरी अधिकारियों खासकर आईएएस अधिकारियों के आने की चर्चा पर रेल मंत्री ने विराम लगाने की कोशिश की. रेलमंत्री ने अपने आला अफसरों के साथ बैठक में, रेल को किस तरह फायदे में लाया जाए इस पर भी चर्चा की. लेकिन इस बैठक के बाद भी लोगों के मन से शंका अभी भी दूर नहीं हुई. ये शंका रेलवे के निजीकरण (Privatization) और बदलाव को लेकर है. क्योंकि मोदी सरकार बनने के बाद से पिछले 5 साल में लगातार रेलवे में बाहरी अधिकारियों के आने की खबर उड़ती रहती है. 2014-15 में खबर आई थी कि रेल में तीन ज्वाइंट सेक्रेट्री रैंक के अधिकारी तैनात किए जा सकते हैं. हालांकि ये खबरें सिर्फ खबरों तक ही सीमित रहीं. सूत्रों का मानना है कि उस समय रेलवे यूनियनों के विरोध के नाते सरकार अपनी इस योजना को अमली जामा नहीं पहना सकी, लेकिन एक बार यह चर्चा फिर जोरों पर है.

रेलवे बोर्ड के नए CEO को लेकर अटकलों का बाजार गर्म
दरअसल, चर्चा उस समय शुरू हुई है जब रेलवे बोर्ड के चेयरमैन वी के यादव रिटायर होने वाले हैं और नए चेयरमैन की तैनाती होने वाली है. सूत्रों की मानें तो एक चर्चा यह भी है कि रेलवे बोर्ड में किसी रिटायर्ड सीनियर आईएएस अफसर को सीईओ के तौर पर तैनात किया जा सकता है. और रेलवे की आगे की परियोजनाओं का काम उसकी देखरेख में किया जाएगा. लेकिन फिलहाल इस खबर को पुष्ट करने वाला कोई नहीं है. सूत्रों की मानें तो रिटायर आईएएस अधिकारी के आने की चर्चा तो है लेकिन उनकी भूमिका सीमित रहेगी और उनका रोल सिर्फ सलाहाकार का रहेगा. हालांकि, कुछ लोगों का दावा है कि सरकार में बैठे एक वरिष्ठ मंत्री चाहते हैं कि रेलवे में आईएएस अधिकारियों की तैनाती हो लेकिन रेलमंत्री पीयूष गोयल उसके लिए तैयार नहीं हैं.




पिछले महीने 50 से ज्यादा रेलवे बोर्ड अधिकारी हुए बेरोजगार
रेलवे में कैडर रिस्ट्रक्चरिंग को लेकर पिछले लंबे समय से चर्चा हो रही है. मोदी सरकार के गठन के बाद से ही ऐसा लगने लगा था कि रेलवे में आईएएस अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर भेजा जाएगा. लेकिन 5 सालों में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ. लेकिन पिछले दिनों चर्चा एक बार और गर्म हुई है. दरअसल, रेलवे ने अभी रेलवे बोर्ड के 50 पदों में कटौती की है. जिसमें डायरेक्टर और जॉइंट सेक्रेटरी रैंक के अधिकारी हैं. रेलवे बोर्ड में डायरेक्टर और जॉइंट सेक्रेटरी रैंक के 200 से ज्यादा अधिकारी तैनात होते थे, लेकिन अब इनकी संख्या घटाकर 150 के आस-पास कर दी गई है. इसमें से 50 अधिकारियों को अलग-अलग जोनल रेलवे में भेजा जाना था लेकिन इन 50 अधिकारियों की तैनाती उत्तर रेलवे के मुख्यलाय बड़ौदा हाउस नई दिल्ली में कर दी गई है. हालत ये हैं कि इन अधिकारियों के पास न तो कोई काम है ना तो बैठने की जगह. ऐसे में सरकार के इस फैसले का विरोध भी हो रहा है, दरअसल रेलवे के प्रशासनिक ढांचे में कई सारे अधिकारी अखिल भारतीय सेवा के कैडर हैं. जिसमें भारतीय रेलवे इंजिनयरिंग सेवा, भारतीय रेलवे यातायात सेवा, रेलवे सुरक्षा बल, जैसे कई कैडर आते हैं. लेकिन डीआएम और महाप्रधंक की दौड़ में कुछ कैडर बाहर रखे जाते हैं जिसको लेकर कैडर के आपसी अधिकारियों की लड़ाई कई बार सामने आ जाती है. इन सेवाओं में बहुत सारे अधिकारी अलग-अलग विभागों में प्रतिनियुक्त पर भी जाते हैं. ऐसे में इन अधिकारियों का मानना है कि रेलवे में आईएएस अधिकारियों के आने से कोई खास फर्क नहीं पड़ने वाला है. कैडर को ठीक करने के लिए आईएएस अधिकारियों को लाने बजाय भारतीय रेल सेवा का एक कैडर कर दिया जाए.



रेल यूनियनों का भी परिचालन पर खासा असर
रेलवे में कर्मचारी यूनियनों का भी खासा दखल है. रेलवे देश का अकेला सरकारी संस्थान है, जिसमें 50 से ज्यादा रजिस्टर्ड कर्मचारी यूनियन हैं. जिनके आपसी मतभेद का असर काम पर भी पड़ता है. नाम न छापने की शर्त पर कुछ अधिकारियों का कहना है हर यूनियन में मंडल स्तर पर 10 से ज्यादा नेता हैं, जो रेल के काम-काज से दूर ही रहते हैं. अगर इन 50 संगठनों की कुल संख्या देखों तो 500 से ज्यादा कर्मचारी होते हैं, जो काम नहीं करते हैं और उनको तनख्वाह के साथ-साथ और सारी सुविधाएं देनी होती हैं. इसके उलट कर्मचारी यूनियनों का कहना है कि रेल में अधिकारी जरूरत से ज्यादा हैं, जिनके खर्च का बोझ रेल पर पड़ता है.

सीएजी की रिपोर्ट के बाद रेलवे संचालन पर उठ रहे हैं सवाल
दरअसल, रेलवे सीएजी की उस रिपोर्ट के बाद भी काफी आलोचना झेल रहा है जिसमें कहा गया है कि 2017-18 का ऑपरेशनल रेशियो पिछले 10 सालों में सबसे खराब है. सीएजी की रिपोर्ट के मुताबिक 2017-18 में 100 रुपए कमाने के लिए रेलवे को 98.4 रुपए खर्च करने पड़े. यह सवाल इसलिए उठा कि 2008-09 में रेलवे को जहां ₹100 कमाने के लिए 90. 48 रुपए खर्च करने पड़ते थे वही 2009-10 में अचानक बढ़कर ये रुपए 95.28 हो गए. अब बढ़ते बढ़ते 100 रुपए कमाने का खर्च 98.4 रुपए हो गया है. ऐसे में सीएजी ने रेलवे से ऑपरेशनल कॉस्ट घटाने की सिफारिश की है. आपरेशनल कॉस्ट वो होती है जो रेल अपने परिचालन पर खर्च करती है. रेलमंत्री ने भी परिवर्तन सम्मेलन में इन विषयों पर खुलकर चर्चा की.

क्या रेलवे बढ़ रहा है निजीकरण की ओर?
रेलवे के निजीकरण पर लम्बे अर्से से चर्च चल रही है. भारतीय रेलवे दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है और इसका भारतीय अर्थव्यवस्था में बहुत बड़ा योगदान भी है. दरअसल निजीकरण की चर्चा तब तेज हुई जब देश में पहली बार प्राइवेट ट्रेन तेजस की शुरुआत हुई. इसकी सुख-सुविधाओं से जहां आम रेलयात्री खासा प्रभावित हुआ वहीं रेलवे को भी अपनी इस पहली ट्रेन से काफी फायदा हुआ. हालांकि रेलवे के निजीकरण का काफी विरोध है. विरोध करने वालों का कहना है कि इन सारी सुख सुविधाओं के बदले किराए में काफी बढ़ोतरी कर दी गई है. दूसरी सबसे बड़ी समस्या को इसकी इतने बड़े रेल नेटवर्क को किसी एक आदमी के हाथ में नहीं सौंपा जा सकता. दुर्घटना की स्थिति में आखिर कौन जिम्मेदार होगा और सबसे बड़ा सवाल है कि रेल के निजीकरण के बाद किराया इतना बढ़ जाएगा. ऐसे में क्या भारत का आम आदमी रेल यात्रा कर पाएगा? रेलवे के निजीकरण का समर्थन करने वाले लोगों का दावा है कि रेल के निजीकरण से भारतीय अर्थव्यवस्था को फायदा होगा. बाजार में आपसी प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी जैसा कि विमानन क्षेत्र में है और नई नई कंपनी आएंगी. लेकिन जिस तरह भारत सरकार अपनी लगातार कोशिशों के बाद भी एयर इंडिया का निजीकरण नहीं कर पाई है, ऐसे में सवाल उठेगा कि क्या रेलवे का निजीकरण इतना आसान होगा?
First published: December 9, 2019, 8:59 PM IST
अगली ख़बर

फोटो

corona virus btn
corona virus btn
Loading