कोविशील्ड की एक डोज काफी है कोरोना के लिए? सरकार रिसर्च के जरिए पता लगाएगी

देश में कोविशील्ड के साथ कोवैक्सीन का भी टीकाकरण में इस्तेमाल हो रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

देश में कोविशील्ड के साथ कोवैक्सीन का भी टीकाकरण में इस्तेमाल हो रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

Covishield: कोविशील्ड को ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और फार्मा कंपनी ऐस्ट्राजेनेका ने विकसित किया है, भारत में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया इसे बना रहा है.

  • Share this:

नई दिल्ली. भारत सरकार जल्द ही एक अध्ययन की शुरुआत करने जा रही है, जिसके जरिए यह पता लगाया जाएगा कि कोरोना वायरस संक्रमण के खिलाफ कोविशील्ड की एक डोज कितनी प्रभावी है. सोमवार को एक सरकारी अधिकारी ने इस बारे में सीएनएन न्यूज18 को जानकारी दी. कोविशील्ड को ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और फार्मा कंपनी ऐस्ट्राजेनेका ने विकसित किया है, भारत में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया इसे बना रहा है.

अधिकारी ने कहा कि कोविशील्ड वैक्सीन के सिंगल डोज के प्रभावी होने का पता लगाने के लिए अध्ययन की शुरुआत एक महीने के भीतर होने की उम्मीद है, या फिर इसे एक नई वैक्सीन स्ट्रेटजी के रूप में शुरू किया जा सकता है. अधिकारी ने कहा, "हम स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत आने वाली नेशनल एथिक्स कमेटी की अनुमति का इंतजार कर रहे हैं. इस अध्ययन में दो वैक्सीन के एक-एक डोज को मिक्स करने के साथ कोविशील्ड वैक्सीन की एक डोज के प्रभावी होने का अध्ययन किया जाएगा."

दो अलग-अलग वैक्सीन की खुराक को 'मिक्स एंड मैच' करने की योजना

सीएनएन न्यूज18 ने इससे पहले रिपोर्ट किया था कि सरकार एक रिसर्च कार्यक्रम के बारे में सोच रही है, जिसमें दो अलग-अलग वैक्सीन की खुराक को 'मिक्स एंड मैच' करके उसके प्रभाव का पता लगाया जाएगा. एक नए अध्ययन में सामने आया है कि दो अलग-अलग वैक्सीन की खुराक को मिक्स करने पर वालंटियर में तगड़ा इम्यून रेस्पांस देखा गया है. इस अध्ययन में ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका और फाइजर-बायोएनटेक वैक्सीन की खुराक का इस्तेमाल किया गया था.
भारत में टीकाकरण के लिए अभी कोविशील्ड और कोवैक्सीन का इस्तेमाल किया जा रहा है. इसके साथ ही रूस की स्पूतनिक-वी वैक्सीन को भी केंद्र सरकार ने मंजूरी दी है. ये तीनों वैक्सीन दो खुराक वाली वैक्सीन हैं. हालांकि अभी तक देश में टीकाकरण के लिए मिक्स एंड मैच प्रक्रिया की अनुमति नहीं दी गई है.

दो डोज के बीच कितना हो गैप, इसकी समीक्षा होगी

अधिकारी ने कहा कि सरकार का एक्सपर्ट पैनल मई में कोविशील्ड की दो डोज के बीच 12 से 16 हफ्ते का गैप रखने के अपने फैसले के प्रभाव की समीक्षा के लिए बैठक करेंगे. इससे पहले अप्रैल में कोविशील्ड की डोज के लिए गैप को 4-6 हफ्ते से बढ़ाकर 6-8 कर दिया गया था.



सरकार कोविशील्ड वैक्सीन के सिंगल डोज के प्रभाव का अध्ययन करेगी और यह भी पता लगाने की कोशिश करेगी कि क्या टीका लगवाने वाले लोगों को बूस्टर डोज की जरूरत है? जिसे पहले डोज के 6 या 12 महीने के बाद दिया जा सकता है. हालांकि इन सबका फैसला अध्ययन में सामने आए डाटा के आधार पर ही किया जाएगा.

कोविशील्ड का भी आ सकता है सिंगल डोज वर्जन

अधिकारी ने कहा, "जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन और स्पूतनिक-वी का सिंगल डोज वर्जन भी उपलब्ध है. ऐसा कोविशील्ड के मामले में भी हो सकता है, क्योंकि शुरू में ऐस्ट्राजेनेका वैक्सीन को सिंगल डोज फॉर्मूलेशन के आधार पर विकसित किया जा रहा था."

ऐस्ट्राजेनेका के मुताबिक ब्रिटेन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका में वैक्सीन के फेज-3 क्लिनिकल ट्रायल के शुरुआती अध्ययनों में यह पाया गया था कि वैक्सीन सुरक्षित है और कोरोना वायरस के खिलाफ प्रतिरोधी भी. ट्रायल नतीजों में देखा गया था कि पहला डोज लेने के 22 दिन बाद भी लोगों में कोई गंभीर बीमारी नहीं थी और ना ही उन्हें अस्पताल में भर्ती होने जरूरत पड़ी.

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज