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Corona Vaccine: क्या ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका कोविड वैक्सीन भारत के लिए एक अच्छा विकल्प?

बोस्टन में मॉर्डना का कोविड-19 वैक्सीन लगाने के बाद डॉक्टर को एलर्जी शुरू हो गई. (सांकेतिक तस्वीर)

बोस्टन में मॉर्डना का कोविड-19 वैक्सीन लगाने के बाद डॉक्टर को एलर्जी शुरू हो गई. (सांकेतिक तस्वीर)

Corona Vaccine: परीक्षण के परिणामों पर नजर डाले तो परीक्षण मरीजों में कुछ बुजुर्ग भी शामिल थे जिनपर एस्ट्राजेनेका वैक्स ...अधिक पढ़ें

नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Corona virus) को जड़ से मिटाने के लिए कई देश इसके खिलाफ वैक्सीन (Vaccine) बनाने की जद्दोजदह में जुटे हुए हैं. फिलहाल, वायरस के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चार वैक्सीन फाइजर-बायोएनटेक (Pfizer-BioNtech), मॉडर्ना (Moderna), स्पूतनिक-वी (Stupnik V) और ऑक्सफोर्ड एस्ट्राजेनेका (Oxford AstraZeneca) का ऐलान हो चुका है. वैक्सीन बनाने वाली इन चारों कंपनियों ने इनके प्रभाव के अलग-अलग दावे भी पेश किए हैं. वहीं, ऑक्सफोर्ड एस्ट्राजेनेका कोरोना वैक्सीन को लेकर विरोधाभास की स्थिति है. इसके परीक्षणों में कमी, गोपनियता और अलग-अलग परिणाम कई सवाल खड़े कर रहे हैं. भारत के लिए यह वैक्सीन कितनी उचित है आइए जान लेते हैं.

वैज्ञानिकों ने उठाया सवाल
सबसे पहली बात ऑक्सफोर्ड-एस्ट्र्राजेनेका ने भारत में इस वैक्सीन को पहुंचाने के लिए सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया से हाथ मिलाया है. इंस्टिट्यूट पहले ही इस वैक्सीन की प्रभावकारिता पर बहुत कुछ बोल चुका है. इंस्टिट्यूट ने यह भी कहा था कि इस साल के अंत तक भारत में 100 मिलियन लोगों को वैक्सीनेट कर दिया जाएगा. कंपनी के मुताबिक, कोरोना वायरस पर इसका असर 70 फीसदी तक है, लेकिन कई वैज्ञानिक इसकी प्रभावकारिता, परीक्षण और परिणाम पर सवाल उठा रहे हैं.

वैक्सीन का प्रभाव उम्मीद से कम
वैज्ञानिकों ने एस्ट्राजेनेका वैक्सीन की एवरेज औसत पर सवाल उठाते हुए कहा, जैसा कि बताया गया है कि कुछ परीक्षणों में आधी डोज और फिर पूरी डोज देने के बाद 90 फीसदी असर दिखाया है, फिर इसमें दोनों डोज के बाद रिजल्ट 60 फीसदी बताया गया है, कुलमिलाकर इस वैक्सीन की प्रभावकारिता को जो एवरेज आया है वह 70 फीसदी है. यह अलग-अलग डोज के अलग-अलग परीक्षण हैं. अंत में सीरम इंस्टिट्यूट द्वारा बताए गई बातों के आधार पर इसका एवरेज सक्सेस उम्मीद से ऊपर उठता नहीं दिख रहा है.

भारत में लाई जा रही ये वैक्सीन
यूके और ब्राजील में 131 कोविड-19 के पुष्ट मरीजों पर तीन तरह से परीक्षण किया गया. जिनमें 101 को इंजेक्शन, 30 को ट्रायल वैक्सीन और इन 30 में से 27 कोविड मरीजों को फुल डोस और अन्य तीन को आधी डोज दी गई. इन तीन मरीजों में ऑक्सफोर्ड ने 90 फीसदी असर होने का दावा दुनिया में पेश किया है. बता दें कि यह तीनों मरीज 55 साल की उम्र से कम के हैं. अब इसी आधार पर भारत में इस वैक्सीन को पहुंचाए जाने की बात की बात चल रही है.

बुजुर्गों पर खराब रहे परिणाम
परीक्षण के परिणामों पर नजर डाले तो परीक्षण मरीजों में कुछ बुजुर्ग भी शामिल थे जिनपर एस्ट्राजेनेका वैक्सीन का असर खराब आया है. वहीं, परीक्षण की कार्यप्रणाली भी स्पष्ट नहीं की गई है. बावजूद इसके इस वैक्सीन को भारत में लाने की तैयारी की जा रही है. यह दूसरों द्वारा बताई गई सफलता से कम है. यह निश्चित रूप से जो उम्मीद की गई थी उससे भी कम है.

Tags: Corona vaccine, Moderna, Oxford-AstraZeneca, Pfizer

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