क्या कांग्रेस की चुनावी हार का कारण जनता की नब्ज न पकड़ पाना है? पीएम मोदी का दावा- विकास ही अकेला मुद्दा होगा

बिहार चुनाव 2020 में बीजेपी को 21 सीटों का फायदा हुआ और ये 74 सीटों पर पहुंच गई.
बिहार चुनाव 2020 में बीजेपी को 21 सीटों का फायदा हुआ और ये 74 सीटों पर पहुंच गई.

2015 में आरजेडी (RJD) ने 101 सीटों पर लड़ाई लड़ी और 80 में जीते और इसबार 2020 में तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) ने 144 सीट्स पर चुनाव लड़ा और 75 जीते यानी इस बार आरजेडी ने 43 सीट ज्यादा लड़ी और 5 सीटें कम आईं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 13, 2020, 8:57 PM IST
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नई दिल्ली. बिहार विधानसभा चुनावों (Bihar Assembly Elections) में मिली जीत से बीजेपी और उसका शीर्ष नेतृत्व खासा उत्साहित है. जीत ऐसे समय मिली है, जब कोरोना के बाद देश की अर्थव्यस्था चरमरा गई थी. ऐसे में तमाम एहतियात बरतते हुए चुनाव आयोग ने बिहार में चुनाव कराया और नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए (NDA) को बहुमत मिल ही गया.

15 सालों की सत्ता विरोधी लहर से आखिरकार एनडीए बची कैसे? आखिर क्यों नीतीश कुमार (Nitish Kumar) की पार्टी की सीटें आधी रह गईं? क्यों बीजेपी दूसरे सबसे बड़े दल के रुप मे उभरी? आखिर कोरोना काल मे हुए पहले चुनाव में बीजेपी (BJP) की इस सफलता के पीछे क्या था? आखिर मध्यप्रदेश, यूपी, गुजरात में भी बीजेपी का डंका क्यों बजा? तमाम राजनीतिक पंडितों को धता बताते हुए आखिर एनडीए सबसे बड़े गठबंधन केरुप मे उभरा?

सवाल कई हैं. चीड़ फाड़ करने में लग गए हैं तमाम राजनीतिक पंडित. जीत के ठीक अगले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब कार्यकर्ताओं को संबोधित किया तो साफ हो गया की कौन सा एजेंडा है, जो लगातार बीजेपी को जीत दिला रहा है. पीएम मोदी ने कहा की हमारे यहां यह भी कई बार कहा जाता है कि बैंक खाते, गैस कनेक्शन, घर, स्वरोजगार के लिए सुविधाएं, अच्छी सड़कें, अच्छे रेलवे स्टेशन, बेहतर हवाई अड्डे, नदियों पर बनते आधुनिक पुल, इंटरनेट कनेक्टिविटी जैसे मुद्दे कोई अहमियत नहीं रखते.




पीएम मोदी ने कहा कि जनता ऐसे लोगों को बार-बार यह कह रही है कि असली मुद्दे यही हैं. देश का विकास, राज्य का विकास, आज सबसे बड़ी कसौटी है और आने वाले समय में भी यही चुनाव का आधार रहने वाला है. जो लोग यह नहीं समझ रहे, इस बार भी उनकी जगह-जगह जमानत जब्त हुई है.

बिहार में 19 सीटों पर सिमटने वाली कांग्रेस (Congress) ने न सिर्फ मध्य प्रदेश में मुंह की खाई बल्कि गुजरात, उत्तर प्रदेश उपचुनावों में भी खाता नही खोल पायी. इससे लिए यह कहना अतिश्योक्ति भी होगी कि पिछले कुछ चुनावों में कांग्रेस का यग ऐतिहासिक खराब प्रदर्शन उनके चुनावी एजेंडा और नेतृत्व पर खासे सवाल खड़े कर जाता है. कांग्रेस की उत्तर प्रदेश की 6 सीटों मे से चार पर जमानत जब्त हुई है. साथ ही बिहार में भी 4 सीटों पर जमानत जब्त हुई है.

आंकडे़ बताते हैं कि कांग्रेस ने हाथरस और यूपी के दूसरे मुद्दों पर जम कर बवाल मचाया. यहां तक कि प्रियंका गांधी के यूपी कनेक्ट के बारे में कई कहानियां भी गढ़ी गईं. फिर भी जिन 6 सीटों पर कांग्रेस यूपी में लड़ी उनमें से 4 पर जमानत जब्त हुई. इन विधनसभा सीटों में बुलंदशहर, मल्हनी, नौगावां, सादात और देवरिया जो कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष की भी विधान सभा सीट है. वैसे ही बिहार में जहां जेडीयू और बीजेपी बहुत ही कम अंतर से चुनाव हारी, कांग्रेस ने वहां भी 4 सीटों पर अपनी जमानत जब्त कराई. ये 4 सीटें हैं चैनपुर, पारू, नालंदा और हरनौत.

सवाल यह भी उठता है कि क्या तेजस्वी यादव ने पिछले बार के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया. 2015 में आरजेडी ने 101 सीटों पर लड़ाई लड़ी और 80 में जीते और इसबार 2020 में तेजस्वी ने 144 सीट्स पर चुनाव लड़ा और 75 जीते यानी इस बार आरजेडी ने 43 सीट ज्यादा लड़ी और 5 सीटें कम आईं. इस लिए अगर बिहार में आरजेडी और बीजेपी की परफॉर्मेंस की तुलना करें तो कहा जा सकता है कि आरजेडी ने बेहतर प्रदर्शन किया, लेकिन बीजेपी कहती है कि आरजेडी 144 पर लड़ी और बीजेपी 110 सीटों पर लड़ी थी. इस लिए 74/110 बेहतर है कि 75/144. तेजस्वी की लगभग 23 सीटें तो चिराग पासवान की वजह से जीत में बदली.

पीएम मोदी ने कांग्रेस के इस गिरते ग्राफ का जिक्र किया और बताया कि फिजूल के मुद्दे लेकर चुनाव में कूदने का मतलब ही है यथार्थ से अलग लड़ाई लड़ना. कोरोना के बाद पहली बार चुनाव हो रहे थे. अर्थव्यस्था चरमरा गई थी. लाखों प्रवासी मजदूरों को पैदल घर जाते देखा, लेकिन प्रचार ने जोर पकड़ा तो बहस शुरू हुई बेरोजगारी पर, महंगाई पर, पीने के पानी पर. मुंगेर में गड़बड़ शुरू तो हुई, लेकिन परवान नही चढ़ पाई.

बीजेपी के कुछ नेताओं ने पाकिस्तान का राग फिर छेड़ा और अर्बन नक्सल की बात भी की, लेकिन तब तक पीएम मोदी ने नब्ज पकड़ ली थी. उन्होंने केंद्र सरकार की योजनाओं के फायदे की बात गिनानी शुरू के दी और साथ ही कोरोना काल में उठाए गए कदमों के बारे मे बोलना शुरू कर दिया. महिला वोटरों से सीधी अपील भी पीएम मोदी ने की. बीजेपी के घोषणापत्र में भी 19 लाख नौकरियां देने का ऐलान हो गया. कुल मिला कर वोटरों ने दांव उन्ही पर लगाया जो उनकी आकांक्षा पूरी करने का दम रखते हैं.

बिहार चुनावी हिंसा के लिए भी जाना जाता था और वहां के बाहुबलियों के लिए भी. 2020 चुनावों में ना तो एक हिंसा की खबर आयी और न ही आरजेडी के अनंत सिंह के अलावा कोई बहुबली जीता. यानी मुद्दे विकास से जुड़े थे जिसे देश के सबसे गरीब राज्यों में से एक बिहार के वोटरों ने अपनी ताकत बनाया. नीतीश कुमार के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर तो थी, लेकिन छवि सुशाशन बाबू और विकास पुरुष की थी. और उनके खिलाफ लहर को पेट दिया पीएम मोदी के विकास की लहर ने. नतीजा देश के सामने हैं.

अब नजर बंगाल पर है. इस लिए पीएम मोदी ने साफ कर दिया है कि विपक्ष इधर उधर के तार न जोडे़ और कांग्रेस भी सबक ले कि जनता है चुनाव में उन्हें नकार क्यों रही है. बिहार ने जता दिया है कि अब मुद्दा जनता की आकांक्षाओं को पूरा करना है.
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