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पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू होने से क्या IAS-IPS अधिकारियों में बढ़ रही है तल्खी?

उत्तर प्रदेश के दो जिलों में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू कर दिया गया है.

उत्तर प्रदेश के दो जिलों में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू कर दिया गया है.

उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर कई बदलाव किए गए हैं. लेकिन इससे IAS और IPS अधिकारियों के बीच नाराजगी के सुर उभर ...अधिक पढ़ें

नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के दो जिलों में पुलिस कमिश्नर सिस्टम (Commissioner System)  लागू होने के साथ ही आईएएस (IAS) और आईपीएस (IPS) अफसरों में तलवारें खिंचती नजर आ रही हैं. हालांकि इस मामले पर दोनों पक्षों में से कोई खुलकर कुछ नहीं बोल रहा है. लेकिन सूत्रों की मानें तो आईपीएस अधिकारी इसे अपनी जीत की तरह देख रहे हैं. हालांकि ये पहला मामला नहीं है जब कानून व्यवस्था को लेकर उत्तर प्रदेश में आईएएस और आईपीएस अधिकारी आमने सामने आए हों.

इससे पहले भी थानाध्यक्षों की तैनाती को लेकर कई बार डीएम और एसएसपी आमने सामने आ चुके हैं. करीब 2 साल पहले नोएडा में थाना अध्यक्षों की नियुक्ति के मामले में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक अजय पाल शर्मा और जिलाधिकारी वी के सिंह के बीच काफी तल्ख पत्राचार हुआ. इस मामले पर दोनों अधिकारियों ने सरकार को चिट्ठी लिखी थी. उसके बाद कई जिलों में थानेदारों की नियुक्ति में डीएम के हस्तक्षेप का पुलिस अधिकारियों ने विरोध किया था.

बाद में तत्कालीन तौर पर मामला शांत हो गया था. लेकिन उसी समय से आईपीएस अधिकारियों ने पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू करने को लेकर दबाव बढ़ा दिया था. हालांकि उत्तर प्रदेश में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू करने की मांग करीब 20 साल पुरानी है लेकिन आईपीएस अधिकारियों के दबाव के कारण पुलिस की मांग पूरी नहीं हो पा रही थी.

IAS अधिकारी खुद को बता रहे हैं उपेक्षित
कमिश्नर सिस्टम लागू होने की खबरों के बीच पिछले 3 दिन से आईएस फैटरनिटी नाम के एक ट्विटर एकाउंट से लगातार आईएएस अफसर अपने आप को उपेक्षित बता रहे हैं. सूत्रों की मानें तो इस टि्वटर अकाउंट में वह बातें लिखी जाती हैं जो आईएसएस एसोसिएशन अपने ऑफिशियल ट्विटर हैंडल पर नहीं लिख पाता. इस ट्विटर अकाउंट पर जाएं तो साफ दिखेगा आईएएस अधिकारी पिछले 5 महीनों से उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिवकी तैनाती न होने, 88 और 89 बैच का एडिशनल चीफ सेक्रेटरी में प्रमोशन ना होने और मुख्यमंत्री द्वारा आईएस वीक के लिए समय न देने से अपने आपको उपेक्षित महसूस कर रहे हैं.

इस अकाउंट में आईएएस एसोसिएशन का चुनाव ना होने के लिए सरकार को जिम्मेदार बाताया जा रहा है. उनका तर्क है कि आमतौर पर अध्यक्ष का चुनाव आईएएस वीक में होता है. पुराने अध्यक्ष प्रवीण कुमार के रिटायर हो जाने के बाद मुख्यमंत्री के पास समय के अभाव चलते आईएस वीक नहीं हो पा रहा है, जिसके कारण आईएएस एसोसिएशन के नए अध्यक्ष का चुनाव नहीं हो पाया. इस ट्विटर अकाउंट पर बहुत सारे मीम्स के साथ पीसीएस एसोसिएशन की एक चिट्ठी भी डाली गई है. इसमें सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए गए हैं. हालांकि इस चिठ्ठी पर किसी के हस्ताक्षर नहीं है.

वीडियो में देखें पूरी जानकारी
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आखिर क्यों आमने सामने है आईएएस-आईपीएस?
आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के बीच की लड़ाई दरअसल ताकत की लड़ाई है. इस लड़ाई को समझने के लिए हम उन अधिकारों पर नजर डालते हैं जिनकी कटौती कर कमिश्नर सिस्टम में आईएएस अधिकारियों से आईपीएस अफसरों को दिया जा रहा है. दरअसल जिन जगहों पर पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू हो गया है उसमें 151 में चालान करने, धारा 144 लगाने, एनएसए लगाने यहां तक की विपरीत परिस्थितियों में पुलिस को गोली चलाने का आदेश अब पुलिस अधिकारी दे सकेंगे. जो अब तक आमतौर पर एसडीएम, एडीएम या जिलाधिकारी देते रहे हैं.

आज का जो शासनादेश जारी हुआ है उसमें मुख्यतः 15 अधिकार प्रशासनिक अधिकारियों से हटाते हुए पुलिस अधिकारियों को दिए गए हैं. मुख्यमंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस को ठीक से सुनें तो साफ है कि आने वाले समय में सभी बड़े शहर कानपुर,आगरा, वाराणसी, प्रयागराज में भी पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू हो सकता है. साफ है कि आईएएस अधिकारियों के हाथ से धीरे-धीरे सभी बड़े शहर निकलने वाले हैं. साथ ही कुछ ऐसे भी अधिकार भी है जिनको फिलहाल तो आईएएस अधिकारी बचाने में कामयाब हो गए हैं लेकिन आने वाले समय में आईपीएस अधिकारी उसकी भी मांग कर सकते हैं. लेकिन आईएस अधिकारियों को डर है कि आने वाले समय में जब पुलिस कमिश्नर सिस्टम का प्रयोग सफल हो जाएगा तो आईपीएस अधिकारी शस्त्र लाइसेंस, आबाकरी लाइसेंस जैसे अधिकारों की मांग भी कर सकते हैं जो फिलहाल जिलाधिकारी के पास बचे हैं.

आगे क्या होगा?
अधिकारों को लेकर प्रदेश के दो सबसे ताकतवर कैडर के अधिकारियों की लड़ाई फिलहाल थमती नजर नहीं आ रही है. भले ही सरकार के डर से इस मामले पर आईएएस अधिकारी और आईपीएस अधिकारी या के दोनों एसोसिएशन है खुल कर बोल रही हो. लेकिन दोनों एसोसिएशन के नेताओं पर साथ ही दोनों कैडर के वरिष्ठ अधिकारियों पर दबाव है कि अपने अपने कैडर के अधिकार सुरक्षित रखें. इसलिए जहां आईपीएस अधिकारी चाहेंगे कि जल्दी से जल्दी प्रदेश के वर्षों में लम्बित कमीश्नर सिस्टम पूरे प्रदेश में लागू हो, वहीं आईएस अधिकारी अपना लाइसेंस इन पावर बचाए और कमिश्नरेट सिस्टम को सिर्फ 2 जिलों तक ही सीमित रखने के लिए लामबंद होना शुरू हो गए हैं.

Tags: Noida news, UP police, Uttar pradesh news, Yogi adityanath

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