क्या वैक्सीन को लेकर राज्यों के बीच पक्षपात हो रहा है? जानिए क्या कहते हैं आंकड़े

कई राज्यों ने वैक्सीन की कमी के चलते टीकाकरण को फिलहाल सीमित या कम कर दिया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

कई राज्यों ने वैक्सीन की कमी के चलते टीकाकरण को फिलहाल सीमित या कम कर दिया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

Vaccination in India: 45 साल से ऊपर के लोग और फ्रंटलाइन कर्मियों (Front line Workers) को वैक्सीन देते समय केंद्र का पैमाना था कि वैक्सीन का वितरण राज्य के सक्रिय कोविड केस के लोड को देखते हुए किया जाएगा.

  • Share this:





नई दिल्ली. केंद्र सरकार (Central Government) ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) को आश्वासन दिया था कि वैक्सीन को लेकर राज्यों के बीच भेदभाव नहीं किया जाएगा, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि एक मई से 18-44 आयु वर्ग को लगने वाली 85 फीसदी वैक्सीन महज़ सात राज्यों तक सीमित रही. ऐसा तब हुआ जब केंद्र सरकार ने यह भरोसा दिया था कि वह वैक्सीन को लेकर निष्पक्षता बनाए रखने के लिए राज्यों के निजी निर्माताओं के साथ मिलकर काम करेगी.


द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक एक मई से लेकर 12 मई के बीच लगाए गए 34.66 लाख डोज़ में से 85 फीसदी सात राज्यों के हिस्से में आए जिसमें – महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, बिहार और उत्तरप्रदेश शामिल हैं. वहीं बाकी सात राज्यों में जहां हालात और चिंताजनक हैं और एक लाख से ज्यादा सक्रिय केस हैं, वहां 18-44 आयु वर्ग में सिर्फ 5.86 फीसदी डोज़ ही पहुंचा है. हालात ऐसे हैं कि कई राज्यों ने वैक्सीन की कमी के चलते टीकाकरण को फिलहाल सीमित या कम कर दिया है.




मसलन देश के सबसे ज्यादा सक्रिय केस (5.87 लाख) कर्नाटक में है, जहां सिर्फ 74 हज़ार के करीब डोज़ ही लगाए गए हैं, वहीं तीसरे सबसे ज्यादा एक्टिव केस लोड (4.24 लाख) वाले राज्य केरल में 771 डोज़ दिए गए हैं. आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ का भी यही हाल है.







45 साल से ऊपर के लोग और फ्रंटलाइन कर्मियों को वैक्सीन देते समय केंद्र का पैमाना था कि वैक्सीन का वितरण राज्य के सक्रिय कोविड केस के लोड को देखते हुए किया जाएगा. इसके जरिए गंभीर हालात वाले राज्यों में संक्रमण की चेन को तोड़ना और मृत्यु दर को कम करना उद्देश्य था. लेकिन 18-44 उम्र वालों के लिए केंद्र ने इस पैमाने का पालन नहीं किया. इसके अलावा प्रदर्शन (औसत उपभोग और टीकाकरण की रफ्तार) और वैक्सीन की कम से कम बर्बादी को भी केंद्र सरकार ने पैमाना बनाया था लेकिन 18-44 आयु के लिए ये पैमाने भी लागू नहीं हुए. मसलन वैक्सीन की कम से कम बर्बादी के लिए केरल ने सबसे अच्छा काम किया और 45 साल से ऊपर की मुहिम में इस राज्य ने 81.12 डोज़ लगाए, लेकिन 18-44 में यह सिर्फ 771 डोज़ ही लगा पाया है.


इस आयु वर्ग के लिए राज्यों से कहा गया कि वह बाज़ार से वैक्सीन हासिल करे लेकिन अब दिल्ली सरकार आरोप लगा रही है कि कंपनियां राज्य सरकार के साथ सहयोग नहीं कर रही हैं. जबकि केंद्र सरकार ने हलफनामे में लिखा था कि वैक्सीन निर्माताओं से सलाह करके 18-44 आयु वर्ग के लिए हर राज्य को यथानुपात वैक्सीन का आवंटन किया जाएगा, लेकिन रिकॉर्ड इसमें भी गड़बड़ी बता रहे हैं.

(Edited by-Pankaj Ramendu)

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज