कश्मीर में ISI की साजिश और पाकिस्तान में इमरान के लिए बढ़ती मुश्किलें

ISI अब नेपाल (Nepal) में रह रहे कश्मीरियों को हवाला के जरिए पैसा पहुंचाकर उन्हें कश्मीर भेजने की साजिश रच रहा है ताकि इन लोगों के जरिए प्रोपेगेंडा फैलाकर लोगों की भावनाओं को भड़का सकेे.

नीतीश कुमार | News18Hindi
Updated: August 29, 2019, 2:14 PM IST
कश्मीर में ISI की साजिश और पाकिस्तान में इमरान के लिए बढ़ती मुश्किलें
(PTI Photo/S. Irfan)
नीतीश कुमार | News18Hindi
Updated: August 29, 2019, 2:14 PM IST
कश्मीर (Kashmir) में अनुच्छेद 370 (Article 370) के हटने के बाद हिज्बुल,लश्कर और जैश (Hizbul, Lashkar and Jaish) जैसे आतंकी संगठनों के हौसले पस्त होने लगे हैं. सूत्रों के मुताबिक अगर आने वाले दिनों में स्थानीय आतंकी सगठन हिज्बुल मुजाहिदीन अपने को कश्मीर का एक स्टेक होल्डर बताकर हुर्रियत के जरिए आने की बजाय सीधे बातचीत की पेशकश करे तो आश्चर्य की कोई बात नहीं.

इतना ही नहीं घाटी में सुरक्षा बलों की भारी संख्या को देखते हुए आतंकी संगठन किसी तरह की गुस्ताखी की जुर्रत नहीं कर पा रहे. उन्हें पता है कि इस वक्त किसी भी तरह का कदम उनके लिए आत्मघाती साबित हो सकता है.

खुफिया सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक हिज्बुल मुजाहिदीन ने अपने कॉडर्स को सुरक्षित रहने और कम से कम हथियारों के साथ मूवमेंट की ताकीद दी है. अनुच्छेद 370 के हटने के बाद से आतंकी संगठन किस हद तक परेशान हैं इसका अंदाजा एक खुफिया इनपुट से मिलता है जिसके मुताबिक कुछ आतंकी संगठनों के निजी वाट्स एप्प ग्रुप कश्मीरी लोगों को खुद अपनी लड़ाई लड़ने का मशविरा दे रहे हैं, इस बात का हवाला देकर कि वो (यानि कि पाकिस्तान से ऑपरेट कर रहे आतंकी संगठन) कब तक उनका साथ देंगे.

पूरी तरह नाकाम रही ISI

इसके अलावा घाटी में इंटरनेट सेवा लगातार बंद रहने या इसके चालू होने की हालत में भी स्पीड काफी कम रहने की वजह से पाकिस्तान (Pakistan) की बदनाम खुफिया एजेंसी ISI प्रोपेगेंडा वॉर को चलाने में पूरी तरह से नाकाम रही है.

इसकी वजह से पाकिस्तान पूरी तरह से बौखला गया है. जहां एक ओर POK में लीपावैली जैसे आतंकी लांच पैड पर आतंकियों और स्पेशल सर्विस ग्रुप के कमांडो की संख्या अचानक बढ़ गई है वहीं पश्तून नस्ल के अफगान आतंकियों के LoC से घाटी में घुसपैठ की तैयारी की इनपुट भी खुफिया एजेंसियों के हाथ लगी है.


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इसके अलावा ISI अब नेपाल (Nepal) में रह रहे कश्मीरियों को हवाला के जरिए पैसा पहुंचाकर उन्हें कश्मीर भेजने की साजिश रच रहा है ताकि इन लोगों के जरिए प्रोपेगेंडा फैलाकर लोगों की भावनाओं को भड़का सकेे.

साथ ही इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने की उसकी तमाम कोशिशें नाकाम हो चुकी हैं. यहां तक कि उसे UAE जैसे इस्लामिक मुल्क का भी समर्थन नहीं मिल पाया है. दुनिया के दो ताकतवर मुल्कों में से अमेरिका ने जहां इसे दो देशों के बीच का मामला बताया वहीं रूस ने भारत के कदम का समर्थन किया है.

इमरान खान के खिलाफ एकजुट होता पाक का विपक्ष

उधर पाकिस्तान में प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ विरोध के स्वर बुलंद होने लगे हैं. जिस ऑल पॉवरफुल आर्मी ने इमरान को गद्दी पर काबिज कराने में मदद् की थी उसके और इमरान के बीच की खाई गहरी होती जा रही है. पीपीपी और पीएमएल (एन) जैसी विपक्षी पार्टियां और हमलावर हो गई हैं.

खबरों के मुताबिक हरकत उल मुजाहिदीन का सरगना मौलाना फजलुर रहमान जो कुछ दिनों पहले ही इमरान की पार्टी में शामिल हुआ है पाकिस्तान आर्मी और ISI की शिद्दत से मदद कर रहा है ताकि इमरान को गद्दी से हटाया जा सके.

इस बीच पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल बाजवा को तीन साल का एक्सटेंशन भी मिल गया है . ऐसे में अगर आने वाले वक्त में पाकिस्तान से तख्ता पलट की खबर आए तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए. फिलहाल कश्मीर घाटी में हालात पूरी तरह से सामान्य होने में अभी काफी वक्त लगेगा लेकिन इस बात से कतई इन्कार नहीं किया जा सकता कि घाटी में हालात तेजी के साथ बदल रहे हैं.

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First published: August 29, 2019, 2:10 PM IST
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