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घाटी में फिर से खूनखराबे की तैयारी में ISI, पुराने आतंकी संगठनों को कर रही मजबूत

घाटी में फिर से खूनखराबे की तैयारी में ISI, पुराने आतंकी संगठनों को कर रही मजबूत

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

घाटी में फिर से खूनखराबा बढ़ने के संकेत इस बात से भी मिलते हैं क्योंकि घाटी में अल बद्र ग्रुप में भी हाल के दिनों में हलचल देखने को मिली है.

  • News18.com
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    (सुहास मुंशी)

    पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई कश्मीर घाटी में फिर से खूनखराबा बढ़ाने की तैयारी में है. आईएसआई, पीओके में मौजूद अपने ट्रेनिंग कैंप को और भी बेहतर बनाने में लगी हुई है और 90 के दशक में सक्रिय रहे आतंकवादी संगठनों को और भी बेहतर बनाने की कोशिश कर रही है.

    सूत्रों ने न्यूज 18 को बताया कि आईएसआई के बेहतर समर्थन और ट्रेनिंग कैंप तक पहुंच की वजह से आतंकवादी संगठनों की पहुंच अब कश्मीर घाटी तक हो गई है. पता लगा है कि सीमा क्षेत्र में इस तरह के कई ट्रेनिंग कैंपों को देखा गया है और कुछ नए लोगों को इन ट्रेनिंग कैंपों में भर्ती भी किया गया है.

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    फिर से खूनखराबा बढ़ने के संकेत इस बात से भी मिलते हैं क्योंकि घाटी में अल बद्र ग्रुप भी हाल के दिनों में हरकत में दिखा है. ये खतरनाक ग्रुप अफगानिस्तान में शीत युद्ध के दौरान सक्रिय था और 90 के दशक में कश्मीर लाया गया था. एक दशक से अधिक तक किसी ने उसके बारे में सुना भी नहीं था और अब ग्रुप के प्रमुख बख्त ज़मीन ने फिर से सार्वजनिक रूप भाषण देना शुरू कर दिया है.

    हाल ही में 16 जून को ज़मीन ने पीओके के नीलम घाटी में एक भाषण दिया जिसमें उसने कहा कि कश्मीर की आज़ादी की लड़ाई का समय अब आ गया है. उसने कश्मीर के स्थानीय युवकों को भी भर्ती करने की बात कही. अल बद्र ने यह भी दावा किया कि उसने 100 युवकों को भर्ती किया है और 200 युवकों को भर्ती करने वाला है. सूत्रों का कहना है कि करीब एक दर्जन इस तरह के ग्रुप घाटी में काम कर रहे हैं.

    अल बद्र से जुड़े आतंकवादी लश्कर और हिज़्बुल के मौजूदा आतंकवादियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं. अल बद्र आतंकवादी संगठन अभी तक अपने आपको संगठित करने में लगा हुआ है लेकिन जैश-ए-मोहम्मद जिसके बारे में माना जा रहा था कि खत्म हो गया था वो अब फिर से सक्रिय हो गया है.

    सूत्रों का कहना है कि इस साल तमाम स्थानीय लोगोंको जैश-ए-मोहम्मद में भर्ती किया गया है. आंकड़े बताते हैं कि इन आतंकवादी संगठनों में स्थानीय लोगों की लगातार भर्तियां हो रही हैं. मल्टी एजेंसी सेंटर द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार 2015 में 66 स्थानीय लोगों को, 2016 में 88, 2017 में 126 और इस साल 130 लोगों को भर्ती किया गया.

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    कश्मीर में तैनात एक अधिकारी ने बताया कि हिज़्बुल और लश्कर से जुड़े हुए अबू दुजाना, अबू इस्माइल, यासीन जैसे के कई आतंकवादियों के मारे जाने के बाद जैश-ए-मोहम्मद ने कमान संभाल ली थी. हालांकि नाम कुछ भी हो लेकिन इनका एक ही मकसद है कि ज़्यादा से ज़्यादा आतंकवादी घटनाओं के माध्यम से कश्मीर को अशांत रखा जाए.

    Tags: Jammu and kashmir

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