कश्मीर में आतंकी संगठन ISIS की दस्तक, भारतीय खुफिया एजेंसी ने ऐसे किया पर्दाफाश

कश्मीर में आईएसआईएस मॉड्यूल के संस्थापक उमर ​​कासिम खोरासानी और उसके दो सहयोगी तनवीर अहमद भट और रमीज लोन. (बाएं से)

ISIS in Jammu Kashmir: कासिम खुरासानी और उसके दो सहयोगियों की गिरफ्तारी के बाद भारतीय खुफिया एजेंसी के सामने इस बात का खुलासा हुआ है.

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    नई दिल्ली. जम्मू-कश्मीर में प्रतिबंधित आतंकवादी समूह आईएसआई के होने के प्रत्यक्ष सबूत हाथ लगे हैं. सोमवार को इसके संस्थापक सदस्यों में से एक कासिम खुरासानी और उसके दो सहयोगियों की गिरफ्तारी के बाद भारतीय खुफिया एजेंसी के सामने इस बात का खुलासा हुआ है. भारतीय खुफिया एजेंसी पिछले एक साल से उनकी गतिविधियों पर कड़ी नजर रख रही है. सीएनएन-न्यूज18 की ओर से यह एक्सक्लूसिव खबर दी गई है.


    अप्रैल 2020 में, जम्मू-कश्मीर में आईएसआईएस मॉड्यूल के संस्थापक सदस्यों में से एक, उमर निसार भट उर्फ ​​कासिम खोरासानी, जो वहां आईएस कैडरों की भर्ती में भी शामिल था, की पहचान भारतीय खुफिया एजेंसियों द्वारा एक मैसेजिंग ऐप पर की गई थी. खोरासानी के बारे में पहले यह माना जाता था कि वह अफगानिस्तान के खुरासान में है, लेकिन बाद में वह भारतीय और विदेशी एजेंसियों की मदद से अनंतनाग जिले के एक छोटे से शहर अचबल में स्थित पाया गया, जहां वह टेलीग्राम पर अपने समूह के सदस्यों के साथ पत्रिका स्वात अल-हिंद (वॉयस ऑफ इंडिया) के प्रोडक्शन और सर्कुलेशन के बारे में बातचीत कर रहा था.


    इस वजह से ISIS ने बनाया था विलायत अल-हिंद
    पत्रिका स्वात अल-हिंद को विलायत अल-हिंद (भारत में इस्लामी राज्य प्रांत) के विचार का प्रचार करने के लिए तैयार किया गया है. विलायत अल-हिंद (भारत में इस्लामी राज्य प्रांत) की स्थापना मई 2019 में विशेष रूप से भारत की 'गतिविधियों' पर ध्यान केंद्रित करने के लिए की गई थी. नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) पर भारतीय मुसलमानों को भड़काना, बाबरी मस्जिद विध्वंस और कश्मीर में अत्याचार का बदला लेने के विचार से विलायत अल-हिंद का गठन किया गया था. इसने भारत में हमले करने के लिए खुरासान, सीरिया व इराक और इंडियन मुजाहिदीन के भारतीय लड़ाकों की काफी प्रशंसा भी की है.


    आतंकी संगठन ने किया था गजवा-ए-हिंद का आह्वान
    विलायत अल-हिंद के जरिए आतंकी संगठन ने गजवा-ए-हिंद का भी आह्वान किया, जिसका अर्थ है 'भारत के खिलाफ पवित्र युद्ध'. गजवा-ए-हिंद के मुताबिक, सीरिया से काले झंडे के साथ आतंकियों की सेना भारत की ओर मार्च करेगी और देश को जीतकर इस्लामिक राज्य में बदल देगी. इसने इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड द लेवेंट - खुरासान (ISKP) के संचालकों की अगुवाई में फरवरी 2020 में स्वात अल-हिंद (वॉयस ऑफ इंडिया) पत्रिका शुरू की.


    स्वात अल-हिंद के पहले अंक में पीएम मोदी सहित कई भारतीयों पर साधा था निशाना
    पत्रिका के अब तक 17 अंक जारी किए जा चुके हैं. पहला अंक मीडिया चैनल अल-क़िताल पर लॉन्च किया गया था और यह इस बात पर केंद्रित था कि 'राष्ट्रवाद एक बीमारी थी.' इसने नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) की भी कड़ी निंदा की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को निशाना बनाया. इतना ही नहीं, पत्रिका ने भारतीय मुस्लिम विद्वानों - महमूद मदनी और मौलाना अरशद मदनी पर भी हमला किया.


    ओवैसी और कन्हैया पर लगाया था भारतीय मुस्लिमों को गुमराह करने का आरोप
    इसी अंक में, उन्होंने कहा कि ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल-मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार, जिन्हें 2016 में दिल्ली पुलिस ने देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया था, भारतीय मुसलमानों को गुमराह कर रहे थे. इस में भारतीय युवाओं को कट्टरपंथ के रास्ते पर धकेलने के लिए जिम्मेदार पाकिस्तानी नागरिक हुजैफ अल-बकिस्तानी की मौत पर भी शोक व्यक्त किया गया. हुजैफ अफगानिस्तान में अमेरिकी ड्रोन हमले में मारा गया था. उमर कासिम खोरासानी के साथ गिरफ्तार किए गए अन्य दो लोगों के नाम तनवीर अहमद भट और रमीज लोन हैं. तीनों की उम्र 35 साल से कम है.

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