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तारिक फतेह बोले, ISIS की मानसिकता भारत में पहले से मौजूद

भारत इस समय खास स्थिति में है जब पीएम मोदी हस्तक्षेप कर सकते हैं, वे रूस और तुर्की के राजदूत को बुलाकर कांफ्रेंस करें लेकिन पीएम मोदी सिंगापुर जाते हैं लिटिल इंडिया और ट्रेन के बारे में बात करते हैं।

भारत इस समय खास स्थिति में है जब पीएम मोदी हस्तक्षेप कर सकते हैं, वे रूस और तुर्की के राजदूत को बुलाकर कांफ्रेंस करें लेकिन पीएम मोदी सिंगापुर जाते हैं लिटिल इंडिया और ट्रेन के बारे में बात करते हैं।

भारत इस समय खास स्थिति में है जब पीएम मोदी हस्तक्षेप कर सकते हैं, वे रूस और तुर्की के राजदूत को बुलाकर कांफ्रेंस करें लेकिन पीएम मोदी सिंगापुर जाते हैं लिटिल इंडिया और ट्रेन के बारे में बात करते हैं।

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नई दिल्ली। फर्स्टपोस्ट.कॉम द्वारा आयोजित फर्स्टपोस्ट सलून में जाने-माने पाकिस्तानी लेखक तारिक फतेह ने इस बात पर हैरानी जताई कि भारत में नेहरू और गांधी को बंटवारे का जिम्मेदार बताकर उनकी आलोचना की जाती है जबकि जिन्ना जैसे पीडोफाइल(बच्चों से सेक्स का आदी) से प्यार किया जाता है। तारिक फतेह ने ये भी कहा कि आईएसआईएस की मानसिकता भारत में पहले से मौजूद है और कश्मीर से हिंदुओं का सफाया इसी का नतीजा है।

जब तारिक फतेह से पूछा गया कि आप बहुत सारी विवादास्पद बातें कहते हैं फिर भी आप जिंदा कैसे हैं? तो उनका जवाब था कि जब आप सत्य बोलते हैं तो सुरक्षित रहते हैं और जब आप मरते भी हैं तो इज्जत के साथ मरते हैं। वो जानते हैं कि मैं सच कह रहा हूं और वो झूठ बोल रहे हैं इसीलिए मैं जिंदा हूं।

इस सवाल पर कि भारतीय मीडिया वहाबी इस्लाम को लेकर इतना चुप्पी क्यों साधे हुए हैं? तारिक फतेह ने जवाब दिया कि वो(मीडिया) इसके बारे में जानते ही नहीं हैं। अरुण शौरी की किताब को यहां हाथों हाथ बिकना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं है। अमेरिका में ये किताब बहुत है लेकिन भारत में किसी के पास ये नहीं है। भारत में राजनीतिक रूप से सक्रिय हर मध्यमवर्गीय परिवार को मदरसों के ढोंग के बारे में जानने के लिए ये किताब पढ़नी चाहिए। जब उनसे ये पूछा गया कि क्या भारत में आईएसआईएस की मानसिकता हावी होती जा रही है तो उन्होंने कहा कि आईएसआईएस की मानसिकता पहले से यहां है। कश्मीर से हिंदुओं का सफाया इसी मानसिकता का नतीजा है।



अजान में काफिर शब्द पर तारिक फतेह ने कहा कि अजान में ये नहीं होता। ये मूलतः एक प्रार्थना है। सुबह बोली जाने उस लाइन को छोड़कर जो कहती है कि प्रार्थना सोने से बेहतर है लेकिन मेरा सोचना अलग है। उन्होंने कहा कि शुक्रवार को जुम्मे की नमाज से पहले एक लाइन कही जाती है कि अल्लाह हमें काफिरों पर जीत दिला। मैं दूसरे समुदायों की नजर में मुस्लिमों की इज्जत बढ़ाने की अपनी कोशिशों के तहत इस लाइन को हटाने के लिए मुहिम चला रहा हूं। इस बात का कोई सबूत नहीं है कि ये कुरान का हिस्सा है। ये दुनिया भर में हर मस्जिद में दोहराया जाता है और 80 फीसदी दुनिया को इसके बारे में कुछ पता नहीं है।
तारिक फतेह ने कहा कि मुस्लिमों को हजिया सोफिया को ईसाइयों को लौटा देना होगा। जब तक वे ऐसा नहीं करते तब तक उन्हें इस्लाम को शांति का धर्म नहीं कहना चाहिए। अगर आप ऐसी चीजें नहीं कर सकते तो इस्लामोफोबिया में रहें और लोग आपसे नफरत करेंगे और आप ऐसा वातावरण बनाएंगे कि आपके बच्चे सड़कों पर पिटेंगे।

विश्व में भारत की भूमिका पर तारिक फतेह ने कहा कि द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद पहली बार रूस का जेट तुर्की द्वारा गिरा दिया गया। इस दौरान भारत आमिर खान और किरण राव को लेकर उलझा है। भारत इस समय खास स्थिति में है जब पीएम मोदी हस्तक्षेप कर सकते हैं, वे रूस और तुर्की के राजदूत को बुलाकर कांफ्रेंस करें लेकिन पीएम मोदी सिंगापुर जाते हैं लिटिल इंडिया और ट्रेन के बारे में बात करते हैं। क्या आप क्रेजी हैं?

आमिर खान के बारे में तारिक फतेह ने कहा कि आमिर खान सर्वोत्कृष्ट भारतीय हैं। कितने मुस्लिम हैं जो एक हिंदू से शादी कर सहज होंगे। आमिर भारत का प्रतीक हैं। तारिक ने कहा कि भारत को अमेरिका और चीन के बीच शांति की कोशिश करनी चाहिए। भले ही वो देश इसे खारिज कर दें लेकिन कम से कम कोशिश तो करो।

बलूचिस्तान में भारत की भूमिका पर तारिक फतेह ने कहा कि बलूचिस्तान हिंदुओं के प्राचीन देवताओं का घर है। वहां गृहयुद्ध जारी है। बलूचिस्तान स्वतंत्र होगा क्योंकि फिजिक्स, इथिक्स, कल्चर और मोरलटी कहती है कि लोगों को हमेशा से लिए दबाकर नहीं रखा जा सकता।
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