Chandrayaan 2: ISRO चेयरमैन सिवन बोले- मील का पत्थर हासिल कर लिया

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Updated: August 20, 2019, 1:10 PM IST
Chandrayaan 2: ISRO चेयरमैन सिवन बोले- मील का पत्थर हासिल कर लिया
चंद्रयान 2 (Chandrayaan 2) के इस मुश्किल फेज को पार करने के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन, (ISRO) के चेयरमैन के सिवन ने प्रेस वार्ता कर जानकारी दी. (news18 Illustration मीर सुहेल)

चंद्रयान 2 (Chandrayaan 2) के इस मुश्किल फेज को पार करने के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन, (ISRO) के चेयरमैन के सिवन ने प्रेस वार्ता कर जानकारी दी.

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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (ISRO) का बेहद महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट चंद्रयान 2 (Chandrayaan 2) 30 दिनों के सफर के बाद चांद की कक्षा यानी ऑर्बिट में सफलतापूर्वक पहुंच गया है. चंद्रयान के इस मुश्किल फेज को पार करने के बाद इसरो के चेयरमैन डॉक्टर के सिवन (Dr. K. Sivan, Chairman, ISRO) ने प्रेस वार्ता कर जानकारी दी.

सिवन ने कहा कि 'अंतरिक्ष यान ने आज एक मील का पत्थर पार कर लिया. यह पूरी प्रक्रिया 30 मिनट तक चली. उसे सही तरीके से तय ऑर्बिट में रखा गया. अब यह 88 डिग्री के झुकाव के साथ चंद्रमा के चारों ओर चक्कर लगा रहा है.'

ऑपरेशन की कठिनाई पर डॉक्टर के. सिवन ने बताया कि अपेक्षित संवेग (Expected Velocity) से ज्यादा स्पीड अंतरिक्ष यान को गहरे अंतरिक्ष में उछाल देता, जबकि धीमी गति से चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण चंद्रयान 2 को अपनी ओर खींच लेता, जिससे यह उसकी सतह पर दुर्घटनाग्रस्त हो जाता. ऐसे में चंद्रयान-2 की वेलॉसिटी बिल्कुल ठीक होनी चाहिए थी और चंद्रमा पर ऊंचाई सटीक होनी थी. एंगल में एक छोटी सी गलती मिशन को खत्म कर देता.'

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5 अर्थ बाउंड ऑर्बिट्स हुईं

सिवन ने कहा कि '22 जुलाई को मिशन के लॉन्च के बाद, 5 अर्थ बॉउंड ऑर्बिट्स हुईं. इसमें 14 अगस्त को दोपहर 2 बजे; रात 9 बजे, एक बहुत ही महत्वपूर्ण मैनूवर हुआ. 19 अगस्त को दोपहर 2 बजे के आसपास चंद्रमा भी मिशन के पास पहुंच गया और फिर वह ऑर्बिट में गया.'

सिवन ने प्रेस वार्ता में जानकारी दी कि 'अगला बड़ा इवेंट 2 सितंबर को होगा जब लैंडर ऑर्बिटर से अलग हो जाएगा. 3 सितंबर को हमारे पास लगभग 3 सेकंड के लिए एक छोटा मैनूवर होगा ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि लैंडर की प्रणालियां सामान्य रूप से चल रही हैं.'.
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22 जुलाई को चंद्रयान-2 को हुआ था लॉन्च 

देश के कम लागत वाले अंतरिक्ष कार्यक्रम को पंख लगाते हुए इसरो के सबसे शक्तिशाली तीन चरण वाले रॉकेट जीएसएलवी-एमके3-एम1 ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से 22 जुलाई को चंद्रयान-2 का लॉन्च किया था. लॉन्च के बाद चंद्रयान-2 ने बीते 14 अगस्त को पृथ्वी की कक्षा से निकलकर चंद्र पथ पर आगे बढ़ना शुरू किया था.

ISRO का यह अब तक का सबसे जटिल और सबसे प्रतिष्ठित मिशन था. यदि सब कुछ सही रहता है तो रूस, अमेरिका और चीन के बाद भारत, चांद की सतह पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ करने वाला चौथा देश बन जाएगा. Chandrayaan 2 मिशन भारत के लिए इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में अभी तक कोई देश नहीं पहुंचा है.

टाल दिया गया था लॉन्च

इससे पहले 15 जुलाई को रॉकेट में तकनीकी खामी का पता चलने के बाद Chandrayaan 2 का लॉन्च टाल दिया गया था. समय रहते खामी का पता लगाने के लिए वैज्ञानिक समुदाय ने इसरो की सराहना की थी. Chandrayaan 2 चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में उतरेगा जहां अभी तक कोई देश नहीं पहुंच पाया है. इससे चांद के अनसुलझे रहस्य जानने में मदद मिलेगी . यह ऐसी नयी खोज होगी जिसका भारत और पूरी मानवता को लाभ मिलेगा.

पहले चंद्र मिशन की सफलता के 11 साल बाद इसरो ने भू-स्थैतिक प्रक्षेपण यान जीएसएलवी-मार्क ... के जरिए 978 करोड़ रुपये की लागत से बने Chandrayaan 2 का प्रक्षेपण किया. स्वदेशी तकनीक से निर्मित Chandrayaan 2 में कुल 13 पेलोड हैं. आठ ऑर्बिटर में, तीन पेलोड लैंडर ‘विक्रम’ और दो पेलोड रोवर ‘प्रज्ञान’ में हैं.

यह है Chanrayaan 2 के साथ

लैंडर ‘विक्रम’ का नाम भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम ए साराभाई के नाम पर रखा गया है. दूसरी ओर, 27 किलोग्राम वजनी ‘प्रज्ञान’ का मतलब संस्कृत में ‘बुद्धिमता’ है. ऑर्बिटर, चंद्रमा की सतह का निरीक्षण करेगा और पृथ्वी तथा Chandrayaan 2 के लैंडर ‘विक्रम’ के बीच संकेत प्रसारित करेगा. लैंडर ‘विक्रम’ को चंद्रमा की सतह पर भारत की पहली सफल लैंडिंग के लिए डिज़ाइन किया गया है. ‘प्रज्ञान’ नाम का रोवर आर्टिफिशियल इन्टेलिजेन्स से चलने वाला 6-पहिया वाहन है.

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First published: August 20, 2019, 11:47 AM IST
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