ISRO, चंद्रयान 2 लॉन्च: चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग उम्मीदों से बेहतर, PM मोदी ने दी इसरो को बधाई

Chandrayaan 2 Launch Live Updates (चंद्रयान २ लॉन्च लाइव): भारत का दूसरा मून मिशन सोमवार दोपहर श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से लॉन्च हुआ. चंद्रयान 2 कुल 13 भारतीय वैज्ञानिक उपकरणों को ले गया है.

News18Hindi
Updated: July 22, 2019, 5:57 PM IST
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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने सोमवार को एक और इतिहास रचते हुए अपने महत्वकांक्षी मिशन चंद्रयान-2 की सफल लॉन्चिंग की. आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से दोपहर 2:43 मिनट पर चंद्रयान-2 को लॉन्च किया गया. चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग भारत के 'बाहुबली रॉकेट' GSLV मार्क III-M1 से की गई.

इसरो ने ट्वीट के जरिए चंद्रयान-2 की एक तस्वीर शेयर करते हुए बताया कि जीएसएलवी एमके3 एम-1 ने चंद्रयान-2 स्पेसक्राफ्ट को पृथ्वी की कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया है.


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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टीवी पर चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग देखी और इसके सफलतापूर्वक लॉन्च हो जाने के बाद इसरो के वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए कहा कि चंद्रयान-2 जैसे प्रयास हमारे युवाओं को विज्ञान, उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान और नवाचार की ओर प्रोत्साहित करेंगे. उन्होंने चंद्रयान-2 से जुड़े हर शख्स को धन्यवाद दिया और कहा कि इस पर हर भारतीय को गर्व है.



— Narendra Modi (@narendramodi) July 22, 2019



चंद्रयान-2 की सफल लॉन्चिंग के बाद इसरो प्रमुख के सीवन ने कहा कि वे इस सफलता से खुश हैं. उन्होंने इसे चांद को लेकर ऐतिहासिक शुरुआत बताया. इसरो प्रमुख ने कहा कि वैज्ञानिकों की कड़ी मेहनत से सफलता मिली. उन्होंने कहा कुछ ही दिनों में चंद्रमा पर तिरंगा लहराएगा.

चंद्रयान-2 की सफल लॉन्चिंग के बाद लोकसभा और राज्यसभा में इसरो को बधाई दी गई. दोनों सदनों के नेताओं मेज थपथपाकर चंद्रयान-2 की सफल लॉन्चिंग का स्वागत किया. उपराष्ट्रपति एम वेंकैया इसे ऐतिहासिक यात्रा की शुरुआत बताया है.

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने भी चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग के लिए इसरो वैज्ञानिकों को बधाई दी. उन्होंने कहा कि इस लॉन्च ने भारत के अंतरिक्ष के इतिहास ने एक नया पन्ना जोड़ा है.



चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग 15 जुलाई को होनी थी, लेकिन तब तकनीकी कारणों से इसकी लॉन्चिंग को टाल दिया गया था. चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग से पहले ISRO के चीफ डॉ. के सिवन ने बताया कि चंद्रयान-2 के पहले प्रयास में जो भी तकनीकी कमियां देखी गई थीं, उसे ठीक कर लिया गया है. सिवन ने कहा, 'सभी जरूरी कदम उठाए गए हैं. लीकेज की वजह से पहली बार लॉन्चिंग टलने के बाद हमने इस बार सतर्कता बरती है. तैयारियों को पूरा करने में एक दिन से ज्यादा का वक्त लगा है. मैं आपको भरोसा दिलाना चाहता हूं कि इस बार ऐसी कोई तकनीकी गड़बड़ी नहीं होगी. चंद्रयान-2 आने वाले दिनों में 15 महत्वपूर्ण मिशन पर काम करेगा.'

ISRO ने किए ये 4 अहम बदलाव

>>ISRO ने चंद्रयान-2 की यात्रा के दिन 6 दिन कम कर दिए हैं. इसे 54 दिन से घटाकर 48 दिन कर दिया गया है. देरी के बाद भी चंद्रयान-2 6 सितंबर को चांद के साउथ पोल पर लैड करेगा.

>>ISRO ने चंद्रयान-2 के लिए पृथ्वी के चारों तरफ अंडाकार चक्कर में बदलाव किया है, एपोजी में 60.4 किमी का अंतर आ गया है.

>>इसके साथ ही ISRO ने पृथ्वी के ऑर्बिट में जाने का समय करीब एक मिनट बढ़ा दिया गया है.

>>वहीं, चंद्रयान-2 की वेलोसिटी में 1.12 मीटर प्रति सेकंड का इजाफा किया गया है.

साउथ पोल पर होगी लैंडिंग
चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग चांद के साउथ पोल पर एक रोवर को उतारने के उद्देश्य से की जा रही है. अभी तक इस जगह पर कोई भी देश नहीं पहुंचा है. चांद के साउथ पोल पर स्पेसक्राफ्ट उतारने के बाद भारत ऐसा करने वाला पहला देश बन जाएगा.

रॉकेट में एक 'तकनीकी दिक्कत' के कारण 15 जुलाई की सुबह इसे लॉन्च होने से रोक दिया गया था. दिक्कत तब आई थी, जब लिक्विड प्रोपेलेंट को रॉकेट के स्वदेशी क्रायोजेनिक अपर-स्टेज इंजन में लोड किया जा रहा था.


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लॉन्चिंग से पहले क्या हुआ था इसरो में?
दरअसल, लॉन्चिंग से करीब 56.24 मिनट पहले इसरो ने मीडिया सेंटर और विजिटर गैलरी में लाइव स्क्रीनिंग रोक दी. जिस समय लॉन्चिंग रोकी गई, उस समय काउंटडाउन का आखिरी चरण में था. इसरो से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, कुछ मिनट पहले ही रॉकेट के क्रायोजेनिक इंजन में लिक्विड हाइड्रोजन भरा गया था. इसकी वजह से क्रायोजेनिक इंजन और चंद्रयान-2 को जोड़ने वाले लॉन्च व्हीकल में प्रेशर लीकेज हो गया. इसरो के सूत्रों ने बताया कि ये लीकेज तय सीमा पर स्थिर नहीं हो रहा था. लॉन्च के लिए जितना प्रेशर होना चाहिए, उतना नहीं था. ये प्रेशर लगातार घटता जा रहा था. इसलिए इस इसरो के मून मिशन चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग को ऐन वक्त पर टाल दिया.

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वैज्ञानिकों की 11 साल की मेहनत को लगा झटका
चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग ऐन वक्त पर रुकने से इसरो वैज्ञानिकों की 11 साल की मेहनत को छोटा सा झटका लगा है. हालांकि, इसरो वैज्ञानिकों के द्वारा आखिरी पलों में इस बड़ी तकनीकी खामी को खोज बड़ा कदम है. अगर इस कमी के साथ रॉकेट छूटता, तो बड़ा हादसा हो सकता था. यह वैज्ञानिकों की महारत है कि उन्होंने गलती खोज ली.

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चंद्रयान-1 का सेकेंड एडिशन है चंद्रयान-2
चंद्रयान-2 वास्तव में चंद्रयान-1 मिशन का ही नया एडिशन है. इसमें ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) शामिल हैं. चंद्रयान-1 में सिर्फ ऑर्बिटर था, जो चंद्रमा की कक्षा में घूमता था. चंद्रयान-2 के जरिए भारत पहली बार चांद की सतह पर लैंडर उतारेगा. यह लैंडिंग चांद के साउथ पोल पर होगी. इसके साथ ही भारत चांद के दक्षिणी ध्रुव पर स्पेसक्राफ्ट उतारने वाला पहला देश बन जाएगा.

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चंद्रयान-2 की खासियत
- चंद्रयान-2 का वज़न 3.8 टन है, जो आठ वयस्क हाथियों के वजन के लगभग बराबर है.
- इसमें 13 भारतीय पेलोड में 8 ऑर्बिटर, 3 लैंडर और 2 रोवर होंगे. इसके अलावा NASA का एक पैसिव एक्सपेरिमेंट होगा.
- चंद्रयान 2 चंद्रमा के ऐसे हिस्से पर पहुंचेगा, जहां आज तक किसी अभियान में नहीं जाया गया.
- यह भविष्य के मिशनों के लिए सॉफ्ट लैंडिंग का उदाहरण बनेगा.
- भारत चंद्रमा के धुर दक्षिणी हिस्से पर पहुंचने जा रहा है, जहां पहुंचने की कोशिश आज तक कभी किसी देश ने नहीं की.
- चंद्रयान 2 कुल 13 भारतीय वैज्ञानिक उपकरणों को ले जा रहा है.

यह भी पढ़ें: चंद्रयान 2 मिशन के पीछे हैं 'रॉकेट वूमन' और 'डेटा क्वीन'

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First published: July 22, 2019, 3:26 PM IST
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