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कहानी का अंत नहीं है चंद्रयान-2, चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग की कोशिश करेंगे: ISRO चीफ

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Updated: November 2, 2019, 4:56 PM IST
कहानी का अंत नहीं है चंद्रयान-2, चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग की कोशिश करेंगे: ISRO चीफ
के सिवन ने चंद्रयान-2 मिशन को लेकर कही बातें.

इसरो (ISRO) के 50 साल पूरे होने पर दिल्‍ली स्थित आईआईटी में आयोजित एक कार्यक्रम में के सिवन ने ये बातें कहीं. इस साल चंद्रयान-2 अभियान (Chandrayaan 2 mission) के तहत चांद पर विक्रम लैंडर की लैंडिंग नहीं हो पाई थी.

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  • Last Updated: November 2, 2019, 4:56 PM IST
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नई दिल्‍ली. चांद पर मानवरहित शोध यान उतारने के भारत के महत्‍वाकांक्षी मिशन चंद्रयान-2 को भले ही झटका लगा हो, लेकिन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का हौसला बरकरार है. चांद पर चंद्रयान-2 (Chandrayaan 2) के लैंडर विक्रम (Vikram Lander) की लैंडिंग ना हो पाने पर इसरो चीफ के सिवन (K Sivan) ने कहा है कि चंद्रयान-2 मिशन कहानी का अंत नहीं है. अभियान को लेकर भविष्‍य में ख्‍याल रखा जाएगा. उन्‍होंने कहा कि भविष्‍य में चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग कराने के पूरे प्रयास किए जाएंगे. इसरो के 50 साल पूरे होने पर दिल्‍ली स्थित आईआईटी में आयोजित एक कार्यक्रम में के सिवन ने ये बातें कहीं.

चांद की सतह से 300 मीटर ऊपर टूटा था संपर्क
इसरो प्रमुख के सिवन का कहना है कि आने वाले कुछ महीनों में इसरो की ओर से कई एडवांस्‍ड सैटेलाइट के प्रक्षेपण करने की योजना है. इस पर काम हो रहा है. उन्‍होंने कहा कि आप सभी चंद्रयान-2 मिशन के बारे में जानते हैं. इसके तकनीकी पक्ष की बात करें तो हम भले ही विक्रम लैंडर की चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग नहीं करा पाए, लेकिन चंद्रयान-2 की तकनीकी प्रणाली चांद की सतह से कीब 300 मीटर ऊपर तक बेहतर काम कर रही थी.

मैं आप लोगों को भरोसा दिलाता हूं...

के सिवन ने कहा कि अभियान से जुड़े बेहद कीमती डाटा हमारे पास उपलब्‍ध हैं. मैं आप लोगों को भरोसा दिलाता हूं कि इसरो अपने अनुभव और तकनीकी क्षमताओं के आधार पर चांद पर शोध यान की सॉफ्ट लैंडिंग कराने का पूरा प्रयास करेगा. उन्‍होंने कहा कि इसरो का आदित्‍य L1 सोलर मिशन और मानव अंतरिक्ष उड़ान के प्रोजेक्‍ट पर लगातार काम हो रहा है. ये दोनों ही ट्रैक पर हैं.

भारत ने इस साल जुलाई में लॉन्‍च किया था चंद्रयान-2 मिशन.


भविष्‍य में हैं कई योजनाएं
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इसरो प्रमुख के सिवन ने कहा कि अगले कुछ महीनों में हम कई एडवांस्‍ड सैटेलाइट का प्रक्षेपण करने वाले हैं. इसरो का स्‍मॉल सैटेलाइट लॉन्‍च व्‍हीकल (SSLV) इस साल दिसंबर या अगले साल जनवरी में उड़ान भरेगा. भारत के NAVIC सैटेलाइट के जरिये मोबाइल पर सिग्‍नल भेजने की तकनीक पर भी काम हो रहा है.

7 सितंबर को विक्रम से टूटा था संपर्क
बता दें कि 7 सितंबर को 'सॉफ्ट लैंडिंग' की प्रक्रिया के दौरान अंतिम समय में लैंडर विक्रम का इसरो (ISRO) स्टेशन से संपर्क टूट गया था. यदि यह सॉफ्ट लैंडिंग करने में सफल रहता तो इसके भीतर से रोवर बाहर निकलता और चांद की सतह पर वैज्ञानिक प्रयोगों को अंजाम देता. लैंडर को चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग के लिए डिजाइन किया गया था. हालांकि चांद की कक्षा पर मौजूद आर्बिटर बेहतर काम कर रहा है.

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First published: November 2, 2019, 3:52 PM IST
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