अंतरिक्ष का सुपरपावर बनेगा भारत, बनाएगा अपना स्पेस स्टेशन

इसरो प्रमुख के सिवन ने कहा कि मानव अंतरिक्ष मिशन के लॉन्च के बाद गगनयान कार्यक्रम को बनाए रखना होगा. इसी के चलते भारत अपना स्पेस स्टेशन लॉन्च करने की योजना बना रहा है.

News18Hindi
Updated: June 14, 2019, 1:37 PM IST
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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केन्द्र (इसरो) के प्रमुख के. सिवन ने गुरुवार को कहा कि भारत अपना अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने की योजना बना रहा है और इस महत्वाकांक्षी योजना के पूरा होने पर देश ज्यादा मानव मिशन अंतरिक्ष में भेज सकेगा. सिवन ने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) का हिस्सा नहीं होगा. उन्होंने कहा कि यह मिशन गगनयान कार्यक्रम का विस्तार होगा. साथ ही उन्होंने कहा कि मानव अंतरिक्ष मिशन के कई चरण होंगे.

सिवन ने संवाददाताओं से कहा, "हम अलग अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने की योजना बना रहे हैं. हम (आईएसएस) उसका हिस्सा नहीं हैं. हमारा अंतरिक्ष स्टेशन बहुत छोटा होगा. हम एक छोटा मॉड्यूल लॉंच करेंगे जिसका इस्तेमाल माइक्रोग्रैविटी प्रयोग के लिए किया जाएगा."

अंतरिक्ष स्टेशन का वजन करीब 20 टन होने की संभावना है. सिवन ने कहा कि पहले गगनयान मिशन के बाद इस परियोजना को मंजूरी के लिए सरकार के पास भेजा जाएगा. उन्होंने कहा, "हमें (गगनयान) कार्यक्रम को बरकरार रखना है."

सिवन ने कहा कि इसरो इस परियोजना के क्रियान्वयन के लिए 5-7 साल की समयावधि पर विचार कर रहा है. उन्होंने, हालांकि भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन पर आने वाली लागत के संबंध में कुछ नहीं कहा.

फिलहाल पृथ्वी की कक्षा में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन ही एक मात्र ऐसा स्टेशन है जो पूरी तरह काम कर रहा है. यहां अंतरिक्ष यात्री तमाम प्रयोग करते हैं. चीन का भी अपना खुद का अंतरिक्ष स्टेशन बनाने की योजना है.

बता दें कि गगनयान योजना के तहत भारत 2022 में अंतरिक्षयात्रियों को स्पेस में भेजने वाला है. पिछले साल 15 अगस्त के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने इसकी घोषणा की थी. यह पहली बार होगा जब कोई भारतीय अंतरिक्षयात्री भारतीय मिशन के तहत अंतरिक्ष में कदम रखेगा.

सरकार ने रखा 1.43 अरब डॉलर का बजट
यह भारत का पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन है. भारत सरकार ने इसके लिए अलग से 1.43 अरब डॉलर का बजट रखा है. इस मिशन के तीन अंतरिक्ष यात्रियों को सात दिनों के लिए अंतरिक्ष में भेजा जाएगा. समझा जाता है कि इस मिशन की लॉन्चिंग दिसंबर 2020 से शुरू हो जाएगी. अंतरिक्ष में भेजे जाने वाले क्रू मेंबर्स का फाइनल सिलेक्शन इसरो करेगा और फिर वायु सेना इन्हें प्रशिक्षित करेगी.

जुलाई में लॉन्च होगा चंद्रयान-2

इसरो ने बुधवार को अपनी महत्वकांक्षी परियोजना चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण की जानकारी दी थी. इसरो के मुताबिक, चंद्रयान-2 15 जुलाई को दोपहर 2.51 बजे चांद के लिए टेक ऑफ करेगा. इसरो के चेयरमैन के. सिवान ने बताया कि चंद्रयान-2 लूनरक्राफ्ट नासा के एक पैसिव एक्सपेरिमेंटल इंस्ट्रूमेंट को चांद पर ले जाएगा. पहली बार ये साउथ पोल से चांद की तस्वीर लेगा. अमेरिकी एजेंसी इस मॉड्यूल के जरिए धरती और चांद की दूरी को नापने का काम करेगी. बता दें कि इसरो 2008 में चंद्रयान मिशन की सफल लॉंचिंग कर चुका है.

अंतरिक्ष में ताकत बढ़ा रहा भारत

हाल के साल में भारत ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में लंबी उड़ान भरी है और दुनिया को अपनी ताकत का अहसास कराया है. बीते मार्च में भारत ने अंतरिक्ष में लाइव सैटेलाइट को मार गिराया. अपने 'मिशन शक्ति' की इस कामयाबी के बाद भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया, जिनके पास मिसाइल को अंतरिक्ष में मार गिराने की तकनीक है. अब तक यह क्षमता अमेरिका, रूस और चीन के पास थी. अंतरिक्ष में भारत की इस सफलता के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डीआरडीओ के वैज्ञानिकों और अधिकारियों को बधाई दी. साथ ही उन्होंने 'मिशन शक्ति' को लेकर देश के नाम संदेश भी दिया था.

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