लैंडर विक्रम से इसरो का संपर्क टूटा, पीएम बोले- जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं

News18Hindi
Updated: September 7, 2019, 6:37 AM IST
लैंडर विक्रम से इसरो का संपर्क टूटा, पीएम बोले- जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं
लैंडर विक्रम से इसरो का संपर्क टूटा, पीएम बोले- जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं.

चार महीने पहले इजराइल ने भी अपने मून मिशन लेंडर बेयरशीट को चांद पर उतारने की कोशिश की थी लेकिन वह इसमें सफल नहीं हो सका था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 7, 2019, 6:37 AM IST
  • Share this:
इसरो (ISRO) का चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2) से संपर्क टूट गया है. चंद्रयान-2 को चांद पर 'सॉफ्ट लैंडिंग' करनी थी लेकिन चांद की सतह पर पहुंचने से 2.1 किलोमीटर पहले इसरो से उसका संपर्क टूट जाने के कारण इससे जुड़ी कोई भी जानकारी अभी नहीं मिल पा रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी बेंगलुरु के इसरो के सेंटर में इस ऐतिहासिक पल को देखने के लिए मौजूद रहे. इस दौरान उनके साथ 70 छात्र-छात्राएं भी मौजूद थे.

चंद्रयान-2 से संपर्क टूटने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, देखिए जीवन में उतर चढ़ाव आते रहते हैं. उन्होंने कहा कि ये कोई छोटा अचीवमेंट नहीं है, देश आप पर गर्व करता है. उन्होंने कहा कि फिर से कम्युनिकेशन शुरू हुआ तो अब भी उम्मीद बची है. मेरी तरफ से वैज्ञानिकों को बधाई, आप लोगों ने विज्ञान और मानव जाति की बहुत बड़ी सेवा की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, मैं पूरी तरह आपके साथ हूं हिम्मत के साथ चलें.



रात करीब 1.38 बजे चंद्रयान-2 ने चांद की सतह पर साफ्ट लैंडिंग करनी थी. साफ्ट लैंडिग के बाद विक्रम लैंडर को चांद की सतह की मैपिंग शुरू करनी थी. अगर चंद्रयान-2 चांद पर सफल लैंडिंग कर पाता तो वह सबसे पहले चांद की सतह की सबसे नजदीकी की तस्वीर इसरो सेंटर को भेजता. इस तस्वीर को भेजने के बाद विक्रम लैंडर चांद की सतह पर उतरने वाला था.
Loading...




नेशनल ज्योग्राफिक भारत की ओर से भेजे गए चंद्रयान-2 की लैंडिंग का एक्सक्लूसिव प्रसारण कर रहा था. इसी के साथ इसरो की आधिकारिक वेबसाइट पर भी चंद्रयान-2 लैंडिंग की लाइव स्ट्रीमिंग की जा रही थी. इसरो की वेबसाइट के अलावा प्रेस इंफॉरमेशन ब्यूरो (PIB) भी अपने YouTube पेज पर इसकी लाइव स्ट्रीमिंग दिखा रहा था.

चंद्रयान-2 की अगर 'सॉफ्ट लैंडिंग' हो जाती तो भारत दुनिया में ऐसा करने वाला पहला देश होता. रूस, अमेरिका और चीन के बाद भारत ऐसा करने वाला दुनिया का चौथा तथा चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में पहुंचने वाला दुनिया का पहला देश बन जाता. चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर का जीवनकाल एक साल का बताया जा रहा था. इस दौरान यह चंद्रमा की लगातार परिक्रमा कर हर जानकारी पृथ्वी पर मौजूद इसरो के वैज्ञानिकों को भेजता.

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देश से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: September 7, 2019, 2:31 AM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...