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चंद्रयान: ISRO ने बताया- आखिर चांद पर क्यों हैं काले धब्बे? क्या है गड्ढों का राज़?

News18Hindi
Updated: October 23, 2019, 12:07 PM IST
चंद्रयान: ISRO ने बताया- आखिर चांद पर क्यों हैं काले धब्बे? क्या है गड्ढों का राज़?
DF-SAR से भेजी पहली तस्वीर में आप देख पाएंगे कि कौन सा गड्ढा नया है और कब बना है?

चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2) के ऑर्बिटर में लगे डुअल फ्रिक्वेंसी सिंथेटिक एपर्चर रडार (DF-SAR) से ये तस्वीरें ली गई हैं. DF-SAR से ये पता लगाया जा सकता है कि चांद की सतह पर कहां-कहां गड्ढे हैं, कहां पहाड़ हैं और कहां की जमीन प्लेन है. इस डिवाइस की मदद से ये भी बताया जा सकता है कि चांद की सतह पर कौन से गड्ढे कब बने होंगे.

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  • Last Updated: October 23, 2019, 12:07 PM IST
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बेंगलुरु. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) इन दिनों चांद को लेकर नई-नई जानकारियां दे रहा है. इसरो ने अब चांद पर काले धब्बे होने का कारण बताया है. दरअसल, चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2) के ऑर्बिटर ने चांद की सतह की दो नई तस्वीरें भेजी हैं, जो कलरफुल हैं. इसरो ने पहली बार चांद की सतह की कलरफुल तस्वीरें जारी की है. इन फोटोज़ के जरिए बताया गया है कि आखिर चांद पर काले दाग और इतने गड्ढे क्यों हैं?

दरअसल, चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर में लगे डुअल फ्रिक्वेंसी सिंथेटिक एपर्चर रडार (DF-SAR) से ये तस्वीरें ली गई हैं. DF-SAR से ये पता लगाया जा सकता है कि चांद की सतह पर कहां-कहां गड्ढे हैं, कहां पहाड़ हैं और कहां की जमीन प्लेन है. यही नहीं, इस डिवाइस की मदद से ये भी बताया जा सकता है कि चांद की सतह पर कौन से गड्ढे कब बने होंगे.

ISRO के मुताबिक, चांद पर अलग से कोई काले धब्बे है ही नहीं. असल में ये गड्ढे और उनकी परछाइयां ही चांद के चेहरे पर काले धब्बे से दिखाई पड़ते हैं.


2 मीटर ऊंची किसी भी चीज की तस्वीर ले सकता है DF-SAR

ऑर्बिटर में लगे डुअल फ्रिक्वेंसी सिंथेटिक एपर्चर रडार (DF-SAR) की एक और खासियत है. ये चांद की सतह से कम से कम 2 मीटर ऊंची किसी भी चीज की तस्वीर आसानी से और साफ खींच सकता है. इसके लिए DF-SAR में दो प्रकार की रेज़ (Rays) निकलती हैं. उन किरणों के सतह से टकराने और उनके वापस लौटने के आंकड़ों से यह पता किया जाता है कि चांद की सतह पर क्या है?

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चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर में लगे डुअल फ्रिक्वेंसी सिंथेटिक एपर्चर रडार (DF-SAR) से ये तस्वीरें ली गई हैं.




चांद पर कैसे बनते हैं गड्ढे?
ISRO ने अपने ऑफिशियल वेबसाइट पर चांद पर काले धब्बों और गड्ढों को लेकर विस्तार से जानकारी दी है. इसरो की वेबसाइट के मुताबिक, चांद की सतह पर अक्सर उल्कापिंड, छोटे ग्रह और धूमकेतु टकराते रहते हैं. इनके टकराने की वजह से ही हजारों साल में चांद की सतह पर ऐसे गड्ढे बन रहे हैं. DF-SAR से भेजी पहली तस्वीर में आप देख पाएंगे कि कौन सा गड्ढा नया है और कब बना है?

ISRO ने अपने ट्विटर हैंडल और वेबसाइट पर चांद की जो तस्वीरें शेयर की हैं, उनमें चमकीले और पीले रंग के सर्कल में नए गड्ढों को दर्शाया गया है. बाकी गड्ढे पुराने हैं.


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चांद की सतह पर अक्सर उल्कापिंड, छोटे ग्रह और धूमकेतु टकराते रहते हैं.


7 सितंबर को विक्रम से टूटा था संपर्क
उल्लेखनीय है कि ISRO ने 22 जुलाई को चंद्रयान-2 की सफल लॉन्चिंग की थी. इसके विक्रम लैंडर को 7 सितंबर को चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग करना था. हालांकि, 'सॉफ्ट लैंडिंग' की प्रक्रिया के दौरान अंतिम क्षणों में लैंडर विक्रम का इसरो (ISRO) स्टेशन से संपर्क टूट गया था. विक्रम से दोबारा संपर्क स्थापित करने की तमाम कोशिशें की गईं. अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने भी अपने ऑर्बिटर को विक्रम की तलाश में लगाया, लेकिन विक्रम से संपर्क नहीं किया जा सका.

अब  विक्रम हमेशा के लिए चांद पर खो चुका है. बता दें कि चंद्रयान-2 के तीन पार्ट थे. ऑर्बिटर, विक्रम लैंडर और रोवर प्रज्ञान. लैंडर के अंदर रोवर भी था. लिहाजा विक्रम के साथ वो भी खो गया. हालांकि, ऑर्बिटर चांद का चक्कर लगा रहा है और एक साल तक चांद की तस्वीरें भेजता रहेगा.

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First published: October 23, 2019, 11:16 AM IST
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