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'गगनयान' से पहले ISRO अंतरिक्ष में भेजेगा महिला रोबोट, जानें क्या है व्योममित्र?

News18Hindi
Updated: January 22, 2020, 3:50 PM IST
'गगनयान' से पहले ISRO अंतरिक्ष में भेजेगा महिला रोबोट, जानें क्या है व्योममित्र?
'व्योममित्र' को एक महिला के रूप भेजा जा रहा है.

इसरो 'मिशन गगनयान' को अगले साल दिसंबर 2021 में लॉन्च करने वाला है. इसके पहले दिसंबर 2020 और जून 2021 में दो मानवरहित मिशन लॉन्च होंगे.

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  • Last Updated: January 22, 2020, 3:50 PM IST
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बेंगलुरु. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अगले साल दिसंबर में 'मिशन गगनयान' (Gaganyaan) शुरू करने जा रहा है. देश का ये पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष यान मिशन होगा. इस मिशन से पहले अंतरिक्ष की स्थिति को समझने के लिए इसरो एक रोबोट (humanoid) को भेजेगा, जो महिला की तरह दिखने वाला होगा. इसरो ने इसे 'व्योममित्र' (Vyommitra) नाम दिया है.

बेंगलुरु में मानव अंतरिक्षयान और खोज: वर्तमान चुनौतियां व भविष्य घटनाक्रम’ पर सेमिनार की शुरुआत करते हुए इसरो प्रमुख के. सिवान ने ये ऐलान किया. उन्होंने कहा कि ‘गगनयान’ मिशन का उद्देश्य न सिर्फ अंतरिक्ष में भारत का पहला मानवयान भेजना है, बल्कि निरंतर अंतरिक्ष मानव उपस्थिति के लिए नया स्पेस स्टेशन स्थापित करना भी है. इसरो प्रमुख ने बताया कि हम तीन चरणों में यह सब कर रहे हैं.

ये है 'व्योममित्र' की खासियत
>>इसरो प्रमुख के. सिवान ने बताया कि 'गगनयान' में किसी भी महिला को नहीं भेजा जा रहा है, इसलिए 'व्योममित्र' को एक महिला के रूप में भेजा जा रहा है.
>> 'व्योममित्र' मल्टी टास्कर है. यह एक साथ कई सारे काम कर सकती है.
>> व्योममित्र' दो भाषाएं भी बोलती है.
>>वहीं, इसरो के वैज्ञानिक सैम दयाल ने बताया कि यह एक इंसान की तरह काम करेगा और ग्राउंड स्टेशन पर रिपोर्ट करेगा.

बता दें कि इसरो 'मिशन गगनयान' को अगले साल दिसंबर 2021 में लॉन्च करने वाला है. इसके पहले दिसंबर 2020 और जून 2021 में दो मानवरहित मिशन लॉन्च होंगे. 'गगनयान' से अंतरिक्ष यात्रा पर जाने के लिए चार भारतीय ट्रेनिंग लेने जल्द ही रूस जाने वाले हैं. इस पूरे मिशन की लागत 10 हजार करोड़ रुपये है.


सिवान ने बताया कि इसरो 'मिशन गगनयान' के लिए अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा और अन्य अंतरिक्ष एजेंसियों से भी बात कर रही है, ताकि उनके अनुभव भी इस मिशन में काम आ सके.

सिवान ने कहा कि इसरो ने ‘गगनयान’ के लिए कई नेशनल लैब, इंस्टिट्यूट, डीआरडीओ लैब, भारतीय वायुसेना, सीएसआईआर को पक्षकार बनाया है. उन्होंने कहा कि‘गगनयान’ इसरो के इंटर प्लैनेटरी मिशन के लक्ष्यों को भी हासिल करने में मदद करेगा.

15 अगस्त पर पीएम मोदी ने किया था 'मिशन गगनयान' का ऐलान
15 अगस्त 2018 को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘गगनयान मिशन’ के माध्यम से 2022 में या उससे पहले अंतरिक्ष में भारतीय अंतरिक्ष यात्री भेजने की घोषणा की थी. लाल किले की प्राचीर से उन्होंने कहा था, “जब भारत 2022 में आज़ादी की 75वीं सालगिरह मना रहा होगा, भारत मां का कोई लाल, चाहे बेटा हो या बेटी तिरंगा लेकर अंतरिक्ष में प्रस्थान करेगा.”

हालांकि, इसरो काफी लंबे समय से इस काम के लिए अपनी तरफ से लगा हुआ है, मगर प्रधानमंत्री की उक्त घोषणा ने समानवीय अंतरिक्ष उड़ान की एक निश्चित समय सीमा तय कर दी है.

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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First published: January 22, 2020, 3:02 PM IST
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