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अब गहरे समुद्र के भी राज खोलेगा ISRO, 'कैप्‍सूल' से 6000 मीटर तक गोता लगा सकेंगे वैज्ञानिक

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Updated: November 4, 2019, 11:24 AM IST
अब गहरे समुद्र के भी राज खोलेगा ISRO, 'कैप्‍सूल' से 6000 मीटर तक गोता लगा सकेंगे वैज्ञानिक
इसरो अब गहरे समुद्र में शोध करने की योजना बना रहा है.

इसरो ने पनडुब्‍बीनुमा गोलाकार कैप्‍सूल (ISRO Capsule) का डिजाइन बनाया है. इस वाहन की मदद से अध्ययन के लिए समुद्र (Deep Sea) में करीब 6,000 मीटर गहराई तक जाने का उद्देश्य है जबकि पनडुब्बियां (Submarine) केवल 200 मीटर गहराई तक ही जा सकती है.

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  • Last Updated: November 4, 2019, 11:24 AM IST
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चेन्नई: अंतरिक्ष के क्षेत्र में अपनी कामयाबी का लोहा मनवा चुका भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अब गहरे समु्द्र के राज भी उजागर करने की दिशा में काम कर रहा है. इंसान को पनडुब्बीनुमा वाहन के माध्यम से गहरे समुद्र (Deep Sea) में ले जाने की भारत की महत्वाकांक्षा को हकीकत में तब्दील करने के और करीब ले जाते हुए इसरो ने इसके चालक दल संबंधी मॉड्यूल का डिजाइन सफलतापूर्वक विकसित कर लिया है. इस गोलाकार कैप्‍सूल के जरिये इसरो के वैज्ञानिक समुद्र की उस गहराई में जाकर शोध कर सकेंगे, जहां अब तक जाना मुमकिन नहीं है.

सफलतापूर्वक बनाया डिजाइन
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव माधवन नायर राजीवन ने कहा, 'इसरो ने मानवयुक्त पनडुब्बीनुमा गोले का डिजाइन सफलतापूर्वक बना लिया है. अब इसे पंजीकृत किया जाना है और इसके बाद हम इसकी संरचना का काम करेंगे.'

उन्होंने यहां भारतीय समुद्री प्रौद्योगिकी संस्थान की रजत जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के इतर संवाददाताओं से कहा कि गोले (जिसे टाइटैनियम से बनाए जाने का इरादा है) का डिजाइन बनाना जटिल तकनीक है. राजीवन ने कहा, 'इसरो ने डिजाइन बना लिया है और इसे पंजीकरण के लिए एक अंतरराष्ट्रीय एजेंसी को भेजा जाएगा.'

अब तक 200 मीटर तक जा सकती है पनडुब्‍बी
इसरो ने जिस पनडुब्‍बीनुमा कैप्‍सूल का डिजाइन तैयार किया है, वो बेहद खास है. इसमें बैठकर वैज्ञानिक उस गहराई तक जा सकते हैं, जहां अब तक किसी भी इंसान ने जाकर शोध नहीं किया है. इस मानवयुक्त अंतर्जलीय वाहन में चालक दल के तीन सदस्यों को समुद्र में भेजा जा सकता है. इस वाहन की मदद से विभिन्न अध्ययन के लिए समुद्र में करीब 6,000 मीटर गहराई तक जाने का उद्देश्य है जबकि पनडुब्बियां केवल 200 मीटर गहराई तक ही जा सकती है. यह पहल ‘गहरे समुद्र मिशन’ का हिस्सा है.

जलवायु परिवर्तन पर भी करेगा शोध
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इसरो इस कैप्‍सूलनुमा पनडुब्‍बी के जरिये गहरे समुद्र में जाकर वहां के पर्यावरण पर भी शोध करेगा. यह 10 हजार करोड़ रुपये के गहरे समुद्र मिशन का हिस्‍सा है. वह गहरे समुद्र में जलवायु परिवर्तन पर भी शोध करेंगे. इसमें समुद्री जैव विविधता, हाइड्रोकार्बन और मिनरल्‍स पर भी शोध प्रस्‍तावित है.

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First published: November 4, 2019, 11:24 AM IST
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