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फिर मिशन मून की तैयारी में ISRO, जापान के साथ चांद के ध्रुवीय क्षेत्र से लाएगा सैंपल

News18Hindi
Updated: September 9, 2019, 7:10 AM IST
फिर मिशन मून की तैयारी में ISRO, जापान के साथ चांद के ध्रुवीय क्षेत्र से लाएगा सैंपल
ISRO, जापान के साथ चांद के ध्रुवीय क्षेत्र से सैंपल लाएगा

इसरो (ISRO) ने एक बयान में कहा, ‘इसरो और जाक्सा के वैज्ञानिक चांद के ध्रुवीय क्षेत्र में शोध करने के लिए संयुक्त सैटेलाइट मिशन पर करने की संभावना पर विचार कर रहे हैं.’

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  • Last Updated: September 9, 2019, 7:10 AM IST
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नई दिल्ली. भारत के महत्वाकांक्षी मिशन चंद्रयान 2  (Chandrayaan 2) के लैंडर विक्रम का संपर्क भले ही चांद (Mission Moon) की सतह से केवल 2.1 किलोमीटर की दूरी पर टूट गया हो, लेकिन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (ISRO) के हौसले अब भी बुलंद हैं. इसरो अब चांद (Moon) पर बड़े मिशन की तैयारी कर रहा है. इसरो का यह मून मिशन पहले से बेहतर और बड़ा होगा. इस मिशन के दौरान चांद के ध्रुवीय क्षेत्र से सैंपल लाने का काम किया जा सकता है.

चांद के ध्रुवीय क्षेत्र में शोध के इस मिशन को ISRO जापान की स्पेस एजेंसी एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (JAXA) के साथ मिलकर अंजाम देगी. इसरो (ISRO) ने एक बयान में कहा, ‘इसरो और जाक्सा के वैज्ञानिक चांद के ध्रुवीय क्षेत्र में शोध करने के लिए संयुक्त सैटेलाइट मिशन पर करने की संभावना पर विचार कर रहे हैं.’

2017 में भी हुई थी संयुक्त मिशन पर चर्चा
इसरो और जाक्सा का संयुक्त मिशन 2024 में शुरू किया जाएगा. इससे पहले भारत 2022 में अपने प्रस्तावित गगनयान मिशन को पूरा करेगा, जिसके तहत मानव को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा. पहली बार भारत और जापान के बीच संयुक्त मून मिशन को लेकर 2017 में बात हुई थी. यह बातचीत मल्टी स्पेस एजेंसियों की बेंगलुरु में हुई बैठक के दौरान हुई. इसके बाद पीएम नरेंद्र मोदी जब 2018 में जापान दौरे पर गए तो इस मुद्दे पर चर्चा की गई.

जापान ने हायाबुसा मिशन-2 किया पूरा
बता दें कि इसी साल जुलाई में जाक्सा ने क्षुद्रग्रह पर अपने हायाबुसा मिशन-2 को सफलतापूर्वक उतारा था. इस मिशन को अंजाम देकर जापान ने दुनिया भर में अपनी तकनीकी क्षमता का लोहा मनवाया था. JAXA का यह मिशन क्षुद्रग्रह पर शोध करने से संबंधित था.

चंद्रयान-2 मिशन को लेकर रूस से हुई थी बात
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चंद्रयान-2 मिशन पर पहले रूस की स्पेस एजेंसी रॉसकॉमोस के साथ साझेदारी में काम करने की योजना थी. यह तब की बात है जब सितंबर 2008 में पहली बार तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इसकी मंजूरी दी थी. रूस की अतंरिक्ष एजेंसी मिशन के लिए लैंडर मुहैया कराने वाली थी. लेकिन किसी वजह से रूस के साथ बात नहीं बन सकी और भारत ने अकेले ही इस मिशन को अंजाम दिया.

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First published: September 8, 2019, 2:15 PM IST
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