चंद्रमा के मिशन में अमेरिका 26 तो रूस 14 बार हुआ नाकाम, भारत का रिकॉर्ड सबसे अच्‍छा

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Updated: September 10, 2019, 2:40 PM IST
चंद्रमा के मिशन में अमेरिका 26 तो रूस 14 बार हुआ नाकाम, भारत का रिकॉर्ड सबसे अच्‍छा
अंतरिक्ष विज्ञान में मिशन की कामयाबी के मामले में दूसरे देशों के मुकाबले इसरो की सफलता का प्रतिशत सबसे ज्‍यादा है.

चंद्रयान-2 (chandrayaan-2) के लैंडर विक्रम का चंद्रमा की सतह से महज दो किलोमीटर पहले इसरो से संपर्क टूट गया था. ऐसी नाकामी केवल भारत के हिस्‍से नहीं आई है. अमेरिका और रूस जैसे देश भी अपने चांद अभियानों में सॉफ्ट लैंडिंग जैसी मुश्किलों का सामना कर चुके हैं.

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नई दिल्‍ली: चंद्रमा (India Moon Mission)पर जाने के लिए भारत का सबसे अहम मिशन चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2) भले आखिरी समय में पूरी तरह कामयाब न हुआ हो, लेकिन चांद पर जाने की कोशिशों को झटका लगने की ये पहली कहानी नहीं है. ऐसी ही नाकामी की कहानी के बाद कामयाबी की इमारत लिखी गई है. भारत तो पहले ही प्रयास में इतने करीब पहुंचा. चंद्रयान-2 (chandrayaan-2) के लैंडर विक्रम का चंद्रमा की सतह से महज दो किलोमीटर पहले इसरो से संपर्क टूट गया था. ऐसी नाकामी केवल भारत के हिस्‍से नहीं आई है. अमेरिका और रूस जैसे देश भी अपने चांद अभियानों में सॉफ्ट लैंडिंग जैसी मुश्किलों का सामना कर चुके हैं.

अमेरिका को अपने चंद्रमा के मिशन में 26 बार नाकामी मिली, वहीं पर रूस को 14 बार निराशा हाथ लगी. भारत को मिली इस नाकामी के बाद भी इस मिशन को 95 फीसदी कामयाब कहा गया है. इसका ऑर्बिटर अभी भी चांद की कक्षा में घूम रहा है. और जानकारियां जुटा रहा है. इसी ने लैंडर विक्रम की लोकेशन की जानकारी दी है. जाहिर है इस मिशन से मिली सीख इसरो के बहुत काम आएगी.



अमेरिका और रूस के पहले अभियान रहे असफल

भारत का अभियान जहां बाकी देशों के मुकाबले काफी सस्‍ता है और अपने लक्ष्‍य के काफी करीब रहा. इसकी तुलना में दूसरे देशों के अभियानों की बात करें तो इसमें सबसे पहले प्रयास अमेरिका और रूस की ओर से किए गए. अमेरिका ने सबसे पहले 1958 में अपना मून मिशन पायनियर शुरू किया. हालांकि ये असफल रहा. तब के सोवियत रूस ने इसके तुरंत बाद सितंबर 1958 में मिशन शुरू किया. ये मिशन भी लॉन्‍चिंग फेज में असफल हो गया.

रूस ने सीखा अपनी गलतियों से
रूस ने अपनी पहली ही गलती से सीख ली. 1959 में उसने एक और अभियान शुरू किया. जनवरी 1959 में रूस ने लूना-1 मिशन चांद पर भेजा. हालांकि तकनीकी खामी के कारण ये पूरी तरह सफल नहीं हुआ. हालांकि ये चांद के सबसे करीब पहुंचा. सितंबर 1959 में लूना-2 मिशन रूस ने लॉन्‍च किया. 1959 में ही रूस ने अपना तीसरा मिशन शुरू किया. नाम दिया लूना-3. यही वह मिशन बना जिसने पहली बार चंद्रमा की सतह की तस्‍वीरें लीं.
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रूस और अमेरिका में 'जंग'
50 के बाद 60 के दशक में चांद को छूने की दौड़ और तेज हो गई. जाहिर है इसमें रूस और अमेरिका ही शामिल थे. 60 के दशक में दोनों देशों ने चांद से जुड़े 55 मिशन लॉन्‍च किए. इसमें से 28 अभियान कामयाब हुए. दोनों देशों के लिहाज से बात करें तो अमेरिका ने 36 मिशन को अंजाम दिया. इनमें से 17 सफल रहे तो रूस को 19 में से 11 में कामयाबी मिली.

1966 में पहली सॉफ्ट लैंडिंग
चांद पर पहली बार सॉफ्ट लैंडिंग करने में रूस ने कामयाबी हासिल की. उसने ये सफलता लूना-9 मिशन में पाई. सितंबर 1968 में रूस ने जोंड-5 स्‍पेसक्राफ्ट चांद की कक्षा में भेजा. ये कामयाबीपूर्वक धरती पर लौटा. 1969 में रूस ने पहली बार मून रोवर को भेजने की कोशिश की, लेकिन उसे कामयाबी नहीं मिली. ये कक्षा में नहीं पहुंच सका.

सबसे बड़ी कामयाबी अमेरिका को
चंद्रमा के मिशन में सबसे बड़ी कामयाबी अमेरिका को मिली. 1968 में अपोलो-8 को चांद पर भेजने में अमेरिका सफल रहा. इसके बाद 1969 में अमेरिका ने अपोलो-11 को चांद पर भेजा और नील आर्मस्‍ट्रांग चांद की धरती पर कदम रखने वाले पहले शख्‍स बने.

चांद की मिट्टी धरती पर
चांद की मिट्टी को धरती पर लाने में पहली बार कामयाबी रूस को मिली. सितंबर 1970 में सोवियत रूस ने लूना-16 अभियान लॉन्‍च किया. इस अभियान में उसने रॉबोट को चांद की सतह पर भेजा. चांद की मिट्टी को धरती पर लाने में कामयाबी हासिल की. अप्रैल 1970 में अमेरिका का मानव अभियान वाला अपोलो-13 मिशन तकनीकी खामी के कारण सफल नहीं हो सका. 80 के दशक में चंद्रमा से संबंधित कोई बड़ा अभियान लॉन्‍च नहीं हुआ. लेकिन 90 का दशक आते आते इस रेस में जापान भी शामिल हो गया.

मून मिशन में हुई भारत की एंट्री
2000 तक आते आते भारत भी मून मिशन में शामिल हो गया. इस दशक में 6 मिशन चांद पर भेजे गए. भारत भी इनमें शामिल हो गया. इस अमेरिका के अलावा, यूरोप, चीन, जापान और भारत ने चांद पर अपने मिशन भेजे. सितंबर 2003 में यूरोपियन स्पेस एजेंसी ने स्मार्ट-2 को चांद पर भेजने में सफलता पाई. चीन ने अक्टूबर 2007 में चांग ई-1 अभियान अंतरिक्ष में भेजा था, जिसमें उसे सफलता मिली.

भारत के चंद्रयान-1 ने बताया चांद पर पानी मौजूदगी
भारत ने अक्टूबर 2008 में सुदूर अंतरिक्ष में अपने पहले मिशन को रवाना किया था. इस मिशन के जरिए ही दुनिया को चांद पर पानी की जानकारी मिल सकी थी.

इसरो की कामयाबी बाकी सबसे ज्‍यादा
अंतरिक्ष विज्ञान और खासकर अपने मिशन की कामयाबी के मामले में दूसरे देशों के मुकाबले इसरो की सफलता का प्रतिशत सबसे ज्‍यादा है. 1975 में अपने पहले मिशन से लेकर इसरो ने अब तक कुल 115 मिशन को अंजाम दिया है. इतने समय में केवल 11 मिशन ही असफल रहे हैं. इसमें 8 मिशन लॉन्चिंग के दौरान असफल हुए जबकि 3 अंतरिक्ष में असफल रहे.

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First published: September 10, 2019, 2:39 PM IST
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