Exclusive: इसरो चीफ बोले, 'हमारे पास होंगी चांद की ऐसी तस्वीरें, जैसी दुनिया में किसी के पास नहीं'

इसरो (ISRO) चीफ के सिवन (K. Sivan) ने बताया, चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2) का ऑर्बिटर, जिसका वजन 2,379 किलो है और यह 1000 वाट बिजली का उत्पादन कर सकता है, इसे चंद्रमा की 100x100Km की ध्रुवीय कक्षा (Polar Orbit) में स्थापित कर दिया गया है.

News18Hindi
Updated: September 7, 2019, 11:18 PM IST
Exclusive: इसरो चीफ बोले, 'हमारे पास होंगी चांद की ऐसी तस्वीरें, जैसी दुनिया में किसी के पास नहीं'
इसरो ने कहा है कि चंद्रयान-2 मिशन के आखिरी चरण का उनके आने वाले स्पेस मिशन पर कोई खास असर नहीं होगा (फाइल फोटो)
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Updated: September 7, 2019, 11:18 PM IST
बंगलुरू. चंद्रयान-2 मिशन (Chandrayaan-2 Mission) के बारे में इसरो (ISRO) ने एक नई खुशखबरी देश को दी है. इसरो ने मिशन के पूरे होने की तारीख के एक दिन बाद ही कहा है कि चंद्रमा के इर्द-गिर्द चक्कर लगा रहे ऑर्बिटर (Orbiter) की जिंदगी पहले लगाए गए अनुमान एक साल के मुकाबले साढ़े सात साल तक बढ़ सकती है.

सीएएन न्यूज18 से बात करते हुए इसरो के चेयरमैन के सिवन ने कहा कि मिशन के दो पार्ट थे. एक था विज्ञान का और दूसरा था तकनीकी प्रदर्शन का. हमारे विज्ञान वाले पार्ट में हमें 100% सफलता मिली है. हम ऑर्बिटर का प्रयोग 7.5 साल के लिए कर सकते हैं. आखिरी दौर में हमारा संपर्क लैंडर से कट गया. ऐसे में हमारे हिस्से कोई असफलता नहीं है. एजेंसी ने यह भी कहा कि मिशन ने अपने लक्ष्यों में से 90%-95% अभी तक पूरे कर लिए हैं.

की जाती रहेगी लैंडर से संपर्क साधने की कोशिश
ISRO के चेयरमैन के सिवन ने यह भी कहा है कि लैंडर के साथ हम अगले 14 दिनों तक संपर्क साधने का प्रयास करेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि हमारे पास चंद्रमा की इतनी अच्छी रिजोल्यूशन वाली तस्वीरें होंगीं, जितनी आज तक किसी के पास नहीं रहीं.

हम अब भी यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि लैंडर में क्या खराबी आई? लेकिन हम अभी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे हैं.

भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों पर नहीं होगा कोई असर
इसरो चीफ ने कहा है कि इस मिशन का कोई भी फर्क हमारे आगे आने वाले मिशन पर नहीं पड़ने वाला है. इसरो चेयरमैन के सिवन ने यह भी कहा है कि प्रधानमंत्री ने उन्हें बहुत प्रोत्साहित किया है और समर्थन दिया है. उन्होंने हमारी आगे बढ़ने में मदद की है.
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इसरो चीफ ने यह भी कहा है कि चंद्रयान-2 मिशन के आखिरी चरण का उनके आने वाले स्पेस मिशन पर कोई खास असर नहीं होगा और बाकी सारे मिशन तेजी से पूरे किए जाने की इसरो की तैयारी है.

1 के बजाए 7 साल से भी ज्यादा हो सकती है ऑर्बिटर की उम्र
इसरो ने शनिवार को दिए एक बयान में कहा, सटीक लॉन्च और मिशन की सही देख-रेख ने यह सुनिश्चित किया है कि इसकी जिंदगी पहले के अनुमानित एक साल के बजाए करीब-करीब सात साल की होगी.

ऑर्बिटर जिसका वजन 2,379 किलो है और यह 1 हजार वाट बिजली का उत्पादन कर सकता है, इसे 100x100Km के चंद्रमा की ध्रुवीय कक्षा में स्थापित किया गया है.

लैंडर के चंद्रमा से मात्र 2.1 किमी ऊपर टूटा संपर्क
इसरो ने चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर को शनिवार कि भोर में चंद्रमा के धरातल पर उतारने का लक्ष्य रखा था. लेकिन जैसी योजना थी, सब वैसा नहीं रहा. जब लैंडर चांद की सतह से मात्र 2.1 किमी ऊपर था, तभी धरती पर मौजूद इसरो स्टेशन से उसका संपर्क कट गया. हालांकि इसरो के वैज्ञानिकों का कहना है कि चंद्रयान-2 मिशन के दौरान चंद्रमा की कक्षा में स्थापित किया गया ऑर्बिटर पूरी तरह से स्वस्थ और सुरक्षित है.

चंद्रयान-2 ने चांद पर जाने के लिए अपनी यात्रा की शुरुआत 14 अगस्त को धरती की कक्षा छोड़ने के साथ ही की थी. इसे एक कठिन ट्रांस लूनर इंसर्शन (TLI) प्रक्रिया के जरिए अंजाम दिया गया था.

आज सुबह सॉफ्ट लैंडिंग के लिए आगे बढ़ रहे विक्रम लैंडर का संपर्क टूटते ही उत्साह, निराशा में बदल गया था. इस मिशन की शुरुआत इसे चंद्रयान-2 स्पेसक्राफ्ट के साथ लॉन्च करने के साथ हुई थी. जिसे 22 जुलाई को लॉन्च किया गया था.

यह भी पढ़ें: उम्‍मीद अभी बाकी: ISRO चीफ ने कहा- लैंडर से दोबारा संपर्क के प्रयास किए जा रहे

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First published: September 7, 2019, 10:26 PM IST
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