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Chandrayaan 2: ISRO के वैज्ञानिकों ने दूसरी बार सफलतापूर्वक बदला चंद्रयान-2 का ऑर्बिट

इसरो ने बताया कि सभी अंतरिक्ष यान पैरामीटर सामान्य हैं.   (PTI)
इसरो ने बताया कि सभी अंतरिक्ष यान पैरामीटर सामान्य हैं. (PTI)

इसरो ने बताया कि सभी अंतरिक्ष यान पैरामीटर सामान्य हैं. तीसरा ऑर्बिट रेजिंग मनूवर 29 जुलाई, 2019 को 14,30 - 15,30 बजे (IST) के बीच निर्धारित किया गया है.

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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने जानकारी दी है कि चंद्रयान 2 का सेकेंड अर्थ बाऊंड ऑर्बिट रेजिंग मनूवर सफलतापूर्वक पूरा हो गया है. गुरुवार-शुक्रवार की दरम्यानी रात ISRO ने यह जानकारी ट्वीट कर के दी. इसरो ने बताया कि पहले से तय 01.08 बजे यह मनूवर सफल हुआ.

इसके लिए चंद्रयान के इंजन को 883 सेकेंड यानी 14.43 सेकेंड के लिए चंद्रयान पर मौजूद प्रपल्शन सिस्टम को फायर किया गया. चंद्रयान  की नई कक्षा अब 251 x 54829 किमी होगी.

इसरो ने बताया कि सभी अंतरिक्ष यान पैरामीटर सामान्य हैं. तीसरा ऑर्बिट रेजिंग मनूवर 29 जुलाई, 2019 को 14,30 - 15,30 बजे (IST) के बीच निर्धारित किया गया है.



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24 जुलाई को हुआ था यही काम

इससे पहले 24 जुलाई यानी बुधवार को चंद्रयान -2 अंतरिक्ष यान के लिए फर्स्ट अर्थ बाऊंड ऑर्बिट रेजिंग मनूवर  सफलतापूर्वक  24 जुलाई, 2019  14,52 बजे  पर योजनाबद्ध रूप पूरा हआ था. 48 सेकंड की फायरिंग अवधि के लिए ऑनबोर्ड प्रपल्शन सिस्टम का इस्तेमाल किया गया था.

बता दें 29 जुलाई के बाद 2 अगस्त और फिर 6 अगस्त को यह मनूवर किया जाएगा ताकि चंद्रयान 2 पृथ्वी की कक्षा से चांद की कक्षा की ओर बढ़ सके. वहीं ट्रांस लूनर इन्सर्शन के लिए 14 अगस्त 2019 का समय तय किया गया है.

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चांद की कक्षा के चक्कर लगाएगा चंद्रयान

गौरतलब है कि चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर चांद की कक्षा में चक्कर लगाएगा, जबकि ‘विक्रम’ लैंडर चांद की सतह पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ करेगा. इसके बाद लैंडर के अंदर से रोवर ‘प्रज्ञान’ बाहर निकलेगा और अपना काम शुरू करेगा.

भारत ने सोमवार को देश के दूसरे चंद्र मिशन ‘चंद्रयान-2’ का श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सफल प्रक्षेपण किया था. प्रक्षेपण के 16 मिनट बाद ‘बाहुबली’ कहे जाने वाले रॉकेट जीएसएलवी मार्क एम 1 ने यान को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित कर दिया था.

यान को चांद के नजदीक ले जाने के लिए अगले सप्ताहों में कई सिलसिलेवार ‘ऑर्बिट रेजिंग मनूवर’ को अंजाम दिया जाएगा और सात सितंबर को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में रोवर की ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ कराई जाएगी जहां अब तक कोई देश नहीं पहुंचा है.

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