ISRO ही नहीं स्पेस मिशन से पहले दुनिया के बड़े-बड़े वैज्ञानिक करते हैं अजीबोगरीब टोटके, रूसी करते हैं पेशाब

हर लॉन्च से पहले इसरो के वैज्ञानिक तिरुपति बालाजी मंदिर में जाकर रॉ़केट की पूजा करते हैं. लेकिन दुनिया के कई स्पेस वैज्ञानिक बेहद अजीबोगरीब अंधविश्वास और टोटके करते हैं. अमेरिका में अंतरिक्ष विज्ञानी लॉन्च से पहले मूंगफली खाते हैं और रूसी वैज्ञानिक बस के पहिए पर पेशाब करते हैं.

News18Hindi
Updated: July 11, 2019, 6:13 PM IST
ISRO ही नहीं स्पेस मिशन से पहले दुनिया के बड़े-बड़े वैज्ञानिक करते हैं अजीबोगरीब टोटके, रूसी करते हैं पेशाब
रूसी कॉस्मोनॉट्स अंतरिक्ष यात्रा पर जाने से पहले कई टोटके करते हैं (बस पर पेशाब करते कॉस्मोनॉट्स)
News18Hindi
Updated: July 11, 2019, 6:13 PM IST
हाल ही में कुछ लोगों की तरफ से हर मिशन के लॉन्च से पहले तिरुपति बालाजी मंदिर जाकर पूजा करने की परंपरा की आलोचना सुनी गई थी. हालांकि इस बार भी चंद्रयान-2 मिशन की लॉन्चिंग से पहले ऐसा किए जाने की संभावना है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या वैज्ञानिकों के लिए ऐसी आस्थाएं या अंधविश्वास ठीक हैं. इसके बारे में भारत रत्न से सम्मानित वैज्ञानिक सीएनआर राव कहते हैं कि उन्हें इसरो की पूजा की परंपरा ठीक नहीं लगती. लेकिन ये इसरो वैज्ञानिकों का अपना निर्णय है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) इसी जुलाई की 15 तारीख को अपने चंद्रयान-2 मिशन को लॉन्च करेगा.

इसरो के वैज्ञानिक रॉकेट लॉन्च से पहले तिरुपति बालाजी मंदिर में जो पूजा करते हैं वह भी बड़ी रोचक होती है. इसमें ये वैज्ञानिक रॉकेट का छोटा सा मॉडल मंदिर में चढ़ाते हैं ताकि उन्हें मिशन में सफलता मिले. लेकिन ऐसे टोटके करने वाला इसरो अकेला नहीं है. दुनिया की बड़ी-बड़ी स्पेस एजेंसियां जिनमें अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा और रूसी स्पेस एजेंसी भी शामिल हैं, इनके साथ दुनियाभर के बहुत से वैज्ञानिक ऐसे कई अंधविश्वासों पर भरोसा करते हैं. आइए जानते हैं कौन से हैं वे टोटके-

रूसी अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को कॉस्मोनॉट्स कहा जाता है. उनके बीच कई सारे अजीबो-गरीब अंधविश्वास प्रचलित हैं. जो वे मिशन की लॉन्चिंग के पहले करते हैं. ये हैं-

स्पेस में जाने से पहले बस के पहिए पर पेशाब करना

एक वेबसाइट वायर्ड डॉट कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक रूसी कॉस्मोनॉट्स स्पेसक्राफ्ट्स पर चढ़ने से पहले खुद को लॉन्चपैड तक ले जाने वाली बस के पहिए पर पेशाब करते हैं. उसके पिछले पहियों में दाहिने टायर पर पेशाब करने का उनके बीच प्रचलन है. जितनी रोचक यह कहानी है, उतनी ही रोचक है इसकी शुरुआत. दरअसल 12 अप्रैल, 1961 को रूसी कॉस्मोनॉट यूरी गागरिन दुनिया के पहले अंतरिक्ष यात्री बने थे. लेकिन इस यात्रा पर जाने से पहले वह बेहद बेचैन थे. इसी बीच उन्हें बहुत तेज पेशाब लग गई. ऐसे में उन्होंने बस रुकवाई, उसके पीछे गए और बस के पिछले दाहिने ओर के पहिए पर ही पेशाब कर ली. जब उनका मिशन सफल रहा तो अन्य कॉस्मोनॉट्स ने उनके इस कदम को टोटके के तौर पर फॉलो करना शुरू कर दिया.

अंतरिक्ष यात्रा से पहले बजाते हैं रोमांटिक गाना
अंतरिक्ष में जाने से पहले रूस में अंतरिक्ष यात्रियों के लिए गाना भी बजाया जाता है. संयोगवश इसकी शुरुआत भी यूरी गागरिन के काल में ही हो गई थी. रॉकेट में बैठने के बाद उन्होंने मिशन कंट्रोल सेंटर से कोई संगीत बजाने को कहा था. कंट्रोल सेंटर ने उनके लिए रोमांटिक गाना बजाया. तब से लेकर आज तक यह परंपरा सभी अंतरिक्ष यात्रियों के लिए कायम है. इसमें भी एक रोचक बात ये कि ये रोमांटिक गाने वही गाने होते हैं, जिन्हें यूरी के लिए बजाया गया था.
Loading...

उसी गेस्ट बुक में करते हैं सिग्नेचर जिसमें यूरी गागरिन ने किया था
रूसी कॉस्मोनॉट्स यूरी गागरिन की पहली अंतरिक्ष यात्रा से पहले उनके ऑफिस में रखी गेस्ट बुक में हस्ताक्षर करके अंतरिक्ष में जाते हैं. इसे वहां अंतरिक्ष यात्रियों के लिए लकी चार्म माना जाता है. दरअसल यूरी गागरिन जब पहली बार अंतरिक्ष में गए थे तो वह इसी गेस्ट बुक में हस्ताक्षर करके गए थे.

उस रॉकेट को नहीं देखते कॉस्मोनॉट जिनमें उन्हें जाना होता है
रूसी कॉस्मोनॉट्स उस रॉकेट को तब तक नहीं देखते हैं, जब तक वे उसमें बैठ नहीं जाते हैं. हालांकि उनकी ट्रेनिंग सिमुलेटेड रॉकेट में कराई जाती है.

हर सफल लॉन्च के बाद लगाते हैं पौधा
रूस का अंतरिक्ष के लिए लॉन्चिंग सेंटर बैकानूर कॉस्मोड्रोम वहां के बैकानूर शहर में है. यह दुनिया का पहला और सबसे बड़ा लॉन्चपैड है. यहां पर एक और टोटका अंतरिक्ष वैज्ञानिक करते हैं. वे अपने हर एक सफल लॉन्च के बाद यहां पर एक नया पेड़ लगा देते हैं. बैकानूर में जहां ये पौधे लगाए जाते हैं, उन्हें एवेन्यू ऑफ हीरोज कहा जाता है.

24 अक्टूबर को नहीं लॉन्च किया जाता कोई भी रॉकेट
24 अक्टूबर, 1960 और 24 अक्टूबर, 1963 वो तारीखें हैं जब बैकानूर में लॉन्च से पहले दो बड़े हादसे हुए थे. इन हादसों में सैकड़ों लोगों की जान गई थी. इसके बाद से ही रूस किसी भी रॉकेट की लॉन्चिंग 24 अक्टूबर को नहीं करता है.

हादसे से बचाने के लिए कूलिंग पाइप पर लिखते हैं महिलाओं के नाम
अंतरिक्ष यात्रा पर जाने से पहले रूसी कॉस्मोनॉट कूलिंग पाइप पर किसी महिला का नाम लिखते हैं. ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि कोई हादसा न हो. कहा जाता है कि एक बार जब इस परंपरा को नहीं माना गया था तो एक बड़ा हादसा हुआ था, जिसमें 47 लोगों की जान चली गई थी.

नासा में वैज्ञानिक खाते हैं मूंगफली
अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा जब भी कोई मिशन लॉन्च करती है तो जेट प्रोप्लशन लैब में बैठे वैज्ञानिक मूंगफली खाते हैं. 1960 के दशक में नासा का रेंजर नाम का मिशन 6 बार फेल हुआ था. इसके बाद जब सातवां मिशन सफल हुआ तो पाया गया कि लैब में बैठा एक वैज्ञानिक मूंगफली खाने में लगा हुआ था.

अन्य वैज्ञानिकों ने माना कि मिशन के सफल होने की वजह उस वैज्ञानिक का बैठकर मूंगफली खाना भी रहा. जिसके बाद से वहां यह प्रथा चली आ रही है. ऐसे में लॉन्च से पहले नासा के वैज्ञानिकों को नाश्ते में सिर्फ अंडा भुर्जी और मांस दिया जाता है. यह प्रथा अब नासा के लिए बहुत पुरानी हो चुकी है और पहले अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री एलन शेफर्ड और जॉन ग्लेन के दौर से ही चली आ रही है.

क्या होती है इसरो वैज्ञानिकों की पूरी पूजा प्रक्रिया
मंगलयान प्रोजेक्ट के समय भी इसरो के वैज्ञानिकों ने मिशन की लॉन्चिंग से पहले कई टोटके आजमाए थे. इनमें से एक था कि जब-जब मंगलयान की कक्षा में बदलाव किया जाता था. मिशन के निदेशक एस अरुणनन मिशन कंट्रोल सेंटर से बाहर आ जाते थे. एक बार उन्होंने एक अंग्रेजी अख़बार से बातचीत में कहा भी था कि वह इस प्रक्रिया को देखऩा नहीं चाहते थे. उन्होंने यह भी कहा था कि आप इसे अंधविश्वास कहें या कुछ और लेकिन इससे मिशन सफल हुआ.

एक मजेदार बात यह भी है कि जिस वक्त मंगलयान की लॉन्चिंग होनी थी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इसरो गए हुए थे और प्रधानमंत्री का प्रोटोकॉल होने के चलते कोई भी व्यक्ति मिशन कंट्रोल रूम के अंदर से बाहर नहीं जा सकता था. लेकिन जब एस अरुणनन ने अपने इस विश्वास के बारे में बताया तो उन्हें कंट्रोल सेंटर से अंदर और बाहर जाने की अनुमति दी गई.

इसरो वैज्ञानिक हर लॉन्च से पहले तिरुपति बालाजी मंदिर में रॉकेट की पूजा करते हैं, इस बार भी करेंगे. और वहां छोटा सा रॉकेट का मॉडल चढ़ाएंगे. इसरो के एक पूर्व निदेशक हर लॉन्च से पहले नई शर्ट पहनकर आया करते थे. अब भी ऐसा करने वाले कई वैज्ञानिक हैं. इसरो की सभी मशीनों और यंत्रों पर विभूति और कुमकुम से त्रिपुंड भी बना होता है. जैसा कि हम अक्सर देवता शिव के माथे पर देखते हैं.

यह भी पढ़ें: जानिए कितना ताकतवर है भारत को चांद पर ले जाने वाला बाहुबली
First published: July 11, 2019, 5:16 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...