Chandrayaan: क्या चांद पर फिर खड़ा हो पाएगा 'घायल' विक्रम, ISRO के पास हैं सिर्फ 12 दिन

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Updated: September 9, 2019, 1:04 PM IST
Chandrayaan: क्या चांद पर फिर खड़ा हो पाएगा 'घायल' विक्रम, ISRO के पास हैं सिर्फ 12 दिन
'सॉफ्ट लैंडिंग' कराने के दौरान ही लैंडर 'विक्रम' का ग्राउंड स्टेशन से कनेक्शन टूट गया था.

इसरो (ISRO) का कहना है कि चंद्रयान-2 (Chandrayan-2) के लैंडर 'विक्रम' (Vikram) ने चांद की सतह पर सॉफ्ट नहीं, बल्कि हार्ड लैंडिंग की थी. इस वजह से लैंडर के गिरने से एक एंटीना दब गया है. इस एंटीना के जरिये कम्युनिकेशन सिस्टम को कमांड भेजी जाती है. इसरो फिलहाल इसी कोशिश में है कि किसी तरह एंटीना के जरिये विक्रम को कमांड कर के वापस एक्टिव किया जा सके.

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  • Last Updated: September 9, 2019, 1:04 PM IST
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बेंगलुरु. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) मिशन चंद्र (Lunar Mission) के लिए गए चंद्रयान-2 (Chandrayan-2) के लैंडर 'विक्रम' (Vikram) से संपर्क करने की कोशिशों में जुटा है. शनिवार को 'सॉफ्ट लैंडिंग' कराने के दौरान ही लैंडर 'विक्रम' का ग्राउंड स्टेशन से कनेक्शन टूट गया था. हालांकि, इसरो ने रविवार को जानकारी दी कि 'विक्रम' की लोकेशन पता चल गई है. इसके साथ ही इसरो का काउंटडाउन शुरू हो चुका है. विक्रम से संपर्क साधने के लिए इसरो के पास अब बस 12 दिन बचे हैं, वरना 'मिशन चंद्र' पूरा होने की उम्मीदें खत्म हो सकती हैं.

दरअसल, इसरो (ISRO) का कहना है कि चंद्रयान-2 (Chandrayan-2) के लैंडर विक्रम (Vikram) ने चांद की सतह पर सॉफ्ट नहीं, बल्कि हार्ड लैंडिंग की थी. इस वजह से लैंडर के गिरने से एक एंटीना दब गया है. इस एंटीना के जरिये कम्युनिकेशन सिस्टम को कमांड भेजी जाती है. इसरो फिलहाल इसी कोशिश में है कि किसी तरह एंटीना के जरिये विक्रम को कमांड कर के वापस एक्टिव किया जा सके. इसके लिए उसके बाद 12 दिन रह गए हैं.

दरअसल, चांद पर अभी लूनर डे चल रहा है. एक लूनर डे धरती के 14 दिनों का होता है. इसमें से 2 दिन चले गए हैं. मतलब यह है कि आने वाले 12 दिन चांद पर दिन रहेगा. उसके बाद चांद पर रात हो जाएगी. रात में विक्रम से संपर्क साधने में परेशानी होगी और इसरो का इंतजार लंबा हो जाएगा.


कुछ अंतरिक्ष वैज्ञानिकों का कहना है, 'ऐसा हो सकता है कि लैंडर ने एक निर्धारित गति से चांद पर लैंडिंग न की हो या उसने चारों पैरों पर लैंडिंग न की हो, जिसके चलते उसे झटका लगा हो और नुकसान पहुंचा हो.'

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लैंडर के गिरने से एक एंटीना दब गया है.


कैसे ठीक हो लैंडर विक्रम?
चंद्रयान-2 के लैंडर 'विक्रम' में ऑनबोर्ड कंप्यूटर है. इसी वजह से ये खुद ही कई काम कर सकता है. लैंडर के नीचे की तरफ 5 थ्रस्टर्स लगे हैं, जिसके जरिए इसे चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग करनी थी. लैंडर के चारों तरफ भी थ्रस्टर्स लगे हुए हैं. इन्हे स्पेस में यात्रा के दौरान दिशा निर्धारित करने के लिए ऑन किया जाता है. लैंडर के जिस हिस्से में एंटीना दबा है, उसी हिस्से में ये थ्रस्टर्स भी हैं. अगर ऑर्बिटर के जरिये दबे हुए एंटीना ने पृथ्वी से भेजे जा रहे कमांड को रिसीव कर लिया, तो विक्रम अपने एक बार फिर खड़ा हो जाएगा. ऐसे में इसरो का 'मिशन चंद्र' फिर से शुरू हो जाएगा, जो कि फिलहाल अटका हुआ है.
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इसरो में 'मिशन चंद्र' से जुड़े एक सीनियर साइंटिस्ट के मुताबिक, 'जैसे-जैसे समय बीतता जाएगा, लैंडर विक्रम से संपर्क स्थापित करना और भी मुश्किल होता जाएगा. अगर जल्द से जल्द विक्रम से संपर्क स्थापित कर लिया गया, तो इसमें अभी भी एनर्जी जनरेट की जा सकती है. क्योंकि, इसमें सोलर पैनल लगे हैं. अगर सूरज की रोशनी विक्रम पर पड़ रही होगी, तो इसके सोलर पैनल के जरिए बैटरी रिचार्ज हो जाएगी. लेकिन, ये सब जितनी जल्दी हो सके करना होगा. नहीं हो दिक्कतें और बढ़ सकती हैं.


चांद से 2.1 किलोमीटर दूरी पर खो गया था विक्रम
इसके पहले इसरो के चेयरमैन के. सिवान ने बताया था कि शुक्रवार देर रात चांद से महज 2 किलोमीटर की दूरी पर आकर लैंडर विक्रम खो गया था. चांद की सतह की ओर बढ़ा लैंडर विक्रम का चांद की सतह से 2.1 किलोमीटर पहले संपर्क टूट गया था. इससे ठीक पहले सबकुछ ठीकठाक चल रहा था, लेकिन इस अनहोनी से इसरो के कंट्रोल रूम में अचानक सन्नाटा पसर गया.

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लैंडर 'विक्रम' का ग्राउंड स्टेशन से संपर्क तीसरे चरण के दौरान टूटा.


तीसरे चरण में टूटा संपर्क
बता दें कि लैंडर 'विक्रम' का ग्राउंड स्टेशन से संपर्क तीसरे चरण के दौरान टूटा. तीसरे चरण में चंद्रयान-2 को पांच किमी से नीचे उतरना था. इसमें 89 सेकंड लगने थे, लेकिन इसी दौरान इसरो का संपर्क टूट गया. इसके बाद विक्रम को लेकर कोई जानकारी नहीं मिली.

इसके बाद चौथे चरण में 400 मी. ऊपर से 100 मी. तक आकर विक्रम को रुकना था. यहां दो क्रेटर हैं। पहला मैजिनियस सी और दूसरा सिंपेलियस। इन दोनों क्रेटरों की एक-दूसरे से 1.6 किमी की दूरी है. लैंडर विक्रम को इसमें से एक साइट चुननी थी. उसकी दिशा में उतरते हुए 100 मी. की ऊंचाई से 10 मी. तक पहुंचने में 65 सेकेंड लगने थे. रविवार को इसकी लोकेशन पता चली है.

लैंडर के अंदर ही है रोवर 'प्रज्ञान'
साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि रोवर प्रज्ञान अभी भी लैंडर के अंदर है. यह बात चंद्रयान-2 के ऑनबोर्ड कैमरे के जरिए खींची गई लैंडर की तस्वीर को देखकर पता चलती है. साथ ही इसरो ने यह भी बताया कि चंद्रयान 2 का ऑर्बिटर जो कि पूरी तरह से सुरक्षित है और सही तरह से काम कर रहा है. वह चंद्रमा के चक्कर लगातार लगा रहा है.

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इसरो ने 22 जुलाई को चंद्रयान-2 की सफलतापूर्वक लॉन्चिंग की थी.


इससे पहले बेंगलुरु स्थित इसरो के हेडक्वार्टर की ओर से यह बयान भी जारी किया गया था कि ऑर्बिटर का कैमरा सबसे ज्यादा रिजोल्यूशन वाला (0.3m) कैमरा है. जो अभी तक किसी भी चंद्र मिशन में इस्तेमाल हुए कैमरे से ज्यादा अच्छी रिजोल्यूशन वाली तस्वीर खींच सकता है. यह तस्वीरें अंतरराष्ट्रीय विज्ञान समुदाय के लिए बहुत ज्यादा काम की हो सकती हैं.

बता दें कि इसरो ने 22 जुलाई को चंद्रयान-2 की सफलतापूर्वक लॉन्चिंग की थी. चंद्रयान-2 के तीन हिस्से हैं. ऑर्बिटर, लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान. ऑर्बिटर फिलहाल अपना काम कर रहा है. ये एक साल तक चांद की तस्वीरें भेजता रहेगा.

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First published: September 9, 2019, 12:33 PM IST
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