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ISRO ने RISAT-2BR1 और 9 विदेशी उपग्रहों को पृथ्वी की कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित किया

NSIL के तहत इसरो के कुल 50 में से 48 मिशन सफल रहे हैं (फोटो: ISRO/Twitter)

NSIL के तहत इसरो के कुल 50 में से 48 मिशन सफल रहे हैं (फोटो: ISRO/Twitter)

44.4 मीटर लंबे ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (PSLV) ने तेज गर्जना करते हुए और धुएं का गुबार छोड़ते हुए यहां स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (Satish Dhawan Space Centre) के प्रथम लांच पैड (Launch Pad) से अपराह्न तीन बजकर 25 मिनट पर शानदार ढंग से उड़ान भरी.

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    श्रीहरिकोटा. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने रडार इमेजिंग पृथ्वी निगरानी उपग्रह ‘रिसैट-2बीआर1’ को नौ अन्य विदेशी वाणिज्यिक उपग्रहों (Foreign Commercial Satellites) के साथ बुधवार को पृथ्वी की कक्षा (Earth Orbit) में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया.

    इन उपग्रहों को ले जाने वाले 44.4 मीटर लंबे ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (PSLV) ने तेज गर्जना करते हुए और धुएं का गुबार छोड़ते हुए यहां स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (Satish Dhawan Space Centre) के प्रथम लांच पैड से अपराह्न तीन बजकर 25 मिनट पर शानदार ढंग से उड़ान भरी.

    इसरो प्रमुख ने बताया, 'यह PSLV की 50वीं उड़ान थी'
    ‘रिसैट-2बीआर1’ को प्रक्षेपण के लगभग 16 मिनट बाद और अन्य उपग्रहों को लगभग पांच मिनट बाद उनकी अलग-अलग निर्दिष्ट कक्षाओं (Specified Classes) में स्थापित कर दिया गया.

    इसरो प्रमुख के. सिवन (K Sivan) और अन्य वैज्ञानिकों ने सभी 10 उपग्रहों के निर्दिष्ट कक्षाओं में स्थापित होने पर एक-दूसरे को बधाई दी. बाद में, मिशन नियंत्रण केंद्र से सिवन ने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है जो संयोग से पीएसएलवी की 50वीं उड़ान का दिन है.

    576 किमी की कक्षा में बेहद सटीक तरीके से सफलतापूर्वक स्थापित किया गया RISAT-2BR1
    इसरो प्रमुख के. सिवन (K. Sivan) ने कहा, ‘‘इसरो ने ऐतिहासिक मिशन को अंजाम दिया है... मुझे यह घोषणा करते हुए अत्यंत खुशी हो रही है कि 50वें पीएसएलवी ने ‘रिसैट-2बीआर1’ को 576 किलोमीटर की कक्षा में सफलतापूर्वक बेहद सटीक तरीके से स्थापित कर दिया है.’’

    सिवन ने कहा कि ‘रिसैट-2बीआर1’ एक ‘‘जटिल’’ उपग्रह (Satellite) है, लेकिन इसका निर्माण कम समय में ही कर लिया गया. उन्होंने कार्य में शामिल टीम की सराहना की.

    डॉ श्रीनिवासन, डॉ माधवन नायर जैसी असाधारण हस्तियों के योगदान को किया याद
    पीएसएलवी के संबंध में उन्होंने अभिकल्पना से लेकर मूर्त रूप देने तक डॉ. श्रीनिवासन, डॉ. माधवन नायर (Dr Madhavan Nair) जैसी ‘‘असाधारण अंतरिक्ष हस्तियों’’ के योगदान को याद किया. उन्होंने रेखांकित किया कि नायर ने प्रक्षेपण यान को क्रियाशील किया था.

    सिवन ने कहा कि पीएसएलवी (PSLV) की भार ले जाने की क्षमता 860 किलोग्राम से बढ़कर 1.9 टन तक हो गई है. यह अब तक 52.7 टन भार ले जा चुका है जिसमें 17 प्रतिशत ग्राहक उपग्रह थे.

    इससे पहले मई में स्थापित किया गया था RISAT-2B
    इसरो प्रमुख के. सिवन ने वैज्ञानिकों की प्रशंसा करते हुए मिशन को बड़ी सफलता बताया. इसरो प्रमुख ने भविष्य के मिशनों (Future Missions) को लेकर विश्वास जताया कि इसरो की टीम हमेशा की तरह ‘‘बड़ी सफलता’’ हासिल करेगी.

    आज 628 किलोग्राम वजनी रडार इमेजिंग पृथ्वी निगरानी उपग्रह (Radar Imaging Earth Surveillance Satellite) ‘रिसैट-2बीआर1’ के प्रक्षेपण से पहले इस साल मई में रिसैट-2बी को कक्षा में स्थापित किया गया था.

    6 अमेरिकी उपग्रहों के अलावा इजराइल, इटली और जापान के 1-1 उपग्रह भी किए गए स्थापित
    पीएसएलवी-सी 48 पर सवार ‘रिसैट-2बीआर1’ के साथ नौ विदेशी उपग्रहों को भी आज कक्षा में स्थापित किया गया. इनमें से अमेरिका (America) के छह उपग्रह और इजराइल (Israel), इटली तथा जापान का एक-एक उपग्रह शामिल है.

    उपग्रहों का प्रक्षेपण न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (New Space India Limited) के साथ वाणिज्यिक प्रबंधन के तहत किया जा रहा है. कुल 50 मिशनों में से 48 मिशन इसरो के लिए सफल रहे हैं.

    PSLV ने अब तक 310 विदेशी उपग्रहों को पृथ्वी की कक्षा में किया स्थापित
    पीएसएलवी (PSLV) ने अब तक लगभग 310 विदेशी उपग्रहों को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया है. इस तरह का पहला उपग्रह सितंबर 1993 में प्रक्षेपित किया गया था. ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) की मदद से प्रक्षेपित कुछ महत्वपूर्ण मिशनों में ‘चंद्रयान-1’, मंगलयान (MOM) और एक साथ रिकॉर्ड 104 उपग्रहों का प्रक्षेपण शामिल है.

    पीएसएलवी-सी48 ‘क्यूएल कनफिगरेशन’ (QL configuration) वाली दूसरी उड़ान है. समान ‘कनफिगरेशन’ वाली पहली उड़ान अप्रैल 2019 (पीएसएलवी-सी45/एमिसैट और 28 अन्य उपग्रह) में रवाना की गई थी.

    सैन्य, कृषि, वन और आपदा प्रबंधन के कार्यों में इस्तेमाल किया जाएगा RISAT-2BR1
    सैन्य उद्देश्यों के लिए उपयोग के साथ ही ‘रिसैट 2बीआर1’ (RISAT-2BR1) को कृषि, वन और आपदा प्रबंधन के कार्यों के लिए भी इस्तेमाल किया जाएगा. अमेरिका के छह उपग्रहों का इस्तेमाल जहां बहुद्देश्यीय दूर संवेदी उद्देश्यों के लिए होगा, वहीं इटली के उपग्रह का इस्तेमाल अनुसंधान उद्देश्य पर आधारित है.

    इसरो (ISRO) ने कहा कि पीएसएलवी-सी48/रिसैट-2बीआर1 इसरो का इस वर्ष छठा प्रक्षेपण है जिसका जीवनकाल पांच साल का होगा.

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