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ISRO का नया सैटेलाइट कश्मीर के लिए क्यों साबित हो सकता है वरदान ?

ISRO का नया सैटेलाइट कश्मीर के लिए क्यों साबित हो सकता है वरदान ?

अंतरिक्ष में भारत ने एक और बड़ी उड़ान भरी है. इसरो ने अब तक के अपने सबसे भारी सैटेलाइट को अंतरिक्ष में भेजा. जिसकी मदद से कम्युनिकेशन के क्षेत्र में देश ज़्यादा आत्मनिर्भर होगा

    अंतरिक्ष में भारत ने एक और बड़ी उड़ान भरी है.  इसरो ने अब तक के अपने सबसे भारी सैटेलाइट को अंतरिक्ष में भेजा.  जिसकी मदद से कम्युनिकेशन के क्षेत्र में देश ज़्यादा आत्मनिर्भर होगा.  आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में ISRO के लॉन्च सेंटर के बाहर लोगों की भीड़ जमा थी. सैटेलाइट के लॉन्च को देखने के लिए पहुंचे लोग कैमरे और मोबाइल लेकर तैयार थे. तय वक़्त पर GSAT-29 पेड़ों के पीछे से निकलकर आसमान की ओर बढ़ता हुआ दिखा.

    क्या है इसकी खासियत

    - दावा किया जा रहा है कि ये सैटेलाइट अगले 10 साल तक काम करता रहेगा
    - इस सैटेलाइट से देश के दूर दराज़ के इलाक़ों में, ख़ास तौर पर जम्मू कश्मीर और उत्तर पूर्व के राज्यों में इंटरनेट पहुँचाने में मदद मिलेगी
    - इसके अलावा देश के इन हिस्सों में कम्युनिकेशन के लिए देश की आत्मनिर्भरता भी बढ़ेगी.
    - सबसे अहम बात ये है कि सैटेलाइट में बेहद हाई क्वॉलिटी कैमरा है, जिसके ज़रिये देश के इन दोनों संवेदनशील हिस्सों पर नज़र रखने में मदद मिलेगी.
    - इसरो के लिए ये बड़ी कामयाबी इसलिए भी है, क्योंकि ना केवल ये सैटेलाइट बल्कि इसे अंतरिक्ष में भेजने के लिए इस्तेमाल होने वाला लॉन्च वेहिकल भी पूरी तरह भारत में 'मेक इन इंडिया' प्रोग्राम के तहत बनाया गया है.

     

    Tags: ISRO

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