Opinion: PM के बयान पर सवाल उठाना बेतुका, सीमा पर संकट की घड़ी मे ये दुखद और राष्ट्रहित में नहीं

Opinion: PM के बयान पर सवाल उठाना बेतुका, सीमा पर संकट की घड़ी मे ये दुखद और राष्ट्रहित में नहीं
पीएम मोदी ने सर्वदलिय बैठक बुलाकर सभी दलों की सुनी (फाइल फोटो)

पीएम मोदी सर्वदलीय बैठक में कहा कि एलएसी पर भारत की सीमा मे कोई चीनी नहीं आया इसका मतलब ये था कि हमारे 16 बिहार रेजिमेंट के जवानों ने बड़ी बहादुरी से उन्हें आने से रोक दिया.

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पीएम मोदी (PM Narendra Modi) ने सर्वदलिय बैठक बुलाकर सभी दलों की सुनी. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की निंदा भी सुनी और ममता बनर्जी और शरद पवार का समर्थन भी सुना. लेकिन सर्वदलीय बैठक में एकमत से सबने कहा की इस संकट की घड़ी में वे सरकार और सेना के साथ खड़े हैं. सरकार ने भी भरोसा जताया कि पीएम मोदी के बयानों पर विपक्ष के ऐसे हमलों के बावजूद देश की जनता एकजुट रहेगी जब हमारे बहादुर जवान सीमा की रक्षा में लगे हैं. सरकारी सूत्रों का मानना है कि सर्वदलीय बैठक में पीएम मोदी के बयानों को गलत तरीके से पेश करने की कोशिश की जा रही है, जबकि पीएम मोदी का संदेश साफ था कि भारत ने दृढता से चीनी सेना के एलएसी के उल्लंघन का संख्ती से जवाब दिया है. जाहिर है पीएम मोदी का पूरा ध्यान जून 15 की घटनाओं पर था जब हमारे 20 वीर जवानों को शहादत देनी पड़ी.

सरकार ने बताया कि जब पीएम मोदी सर्वदलीय बैठक में कहते हैं कि एलएसी पर भारत की सीमा मे कोई चीनी नहीं आया इसका मतलब ये था कि हमारे 16 बिहार रेजिमेंट के जवानों ने बड़ी बहादुरी से उन्हें आने से रोक दिया. 16 बिहार रेजिमेंट के जवानों की बहादुरी और शहादत का ही नतीजा था कि चीनी सेना एलएसी के दूसरी तरफ अपना ढांचा खड़ा नहीं कर पायी और साथ ही उनकी घुसपैठ भी रोक दी गयी. पीएम मोदी का ये कहना कि जिन्होंने भारतीय सीमा में घुसने की कोशिश की सेना ने करारा जवाब दिया. ये साबित करता है कि हमारे जवान किस बहादुरी से अपनी सीमा की रक्षा करते रहे. सरकारी सूत्र कहते हैं कि सर्वदलीय बैठक में पीएम ने साफ कर दिया था कि आजादी के बाद 60 सालों में किस तरह हमारी 43000 स्कवायर किमी जमीन पर चीन ने कैसे कब्जा जमाया ये पूरा देश जानता है. पीएम मोदी ने भी साफ कर दिया कि अब सरकार चीन की एकतरफा घुसपैठ और एलएसी में रत्ती भर भी परिवर्तन नहीं होने देगी.

शायद यही कारण है कि जब राहुल गांधी ने पीएम मोदी की सर्वदलीय बैठक में कही गयी बातों पर सवाल उठाने शुरु किए तो पीएमओ हरकत में आ गया. पीएमओ ने साफ किया ये बहुत ही दुखद है और राष्ट्रहित के खिलाफ है क्योंकि राहुल गांधी ने पीएम मोदी के पूरे बयान में से एक मुद्दा उठा कर देश को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं और इससे 16 बिहार रेजिमेंट के जवानों की बहादुरी और शहादत कम नहीं होगी. हम फिर से आपको बताते हैं वो 8 मुख्य बिंदू जो पीएम मोदी ने सर्वदलीय बैठक में उठाए थे.



1-    कोई घुसपैठ नहीं हुई थी जिसमें किसी भारतीय पोस्ट पर कब्जा हुआ हो.
2-   20 शहीदों की बहुदारी की दुश्मनों को बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ी और एक ऐसा सबक सिखाया जो उन्हें हमेशा याद रहेगा. उनका बलिदान देश कभी नहीं भूलेगा.

3-  हमारी सेना हर स्थिति के लिए तैयार है, लेकिन साथ ही हम किसी जंग की शुरूआत भी नहीं करेंगे.

4-   हमने सेना को पूरी छूट दे दी है कि ग्राउंड जीरो पर स्थिति के मुताबिक फैसला लेकर आगे बढ़ें.

5-   हम शांति चाहते हैं और राजनयिक स्तर पर इसे शांति पूर्ण तरीके से सुलझाने की कोशिशें जारी हैं.

6-  हमारी अखंडता हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण है और हमने पिछले पांच साल में सीमा पर इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारने के लिए हर कदम उठा रहे हैं.

7- बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर का मतलब ये कि चीन की सीमा से लगे दुर्गम इलाकों में हमारी सेना की पेट्रोलिंग और चीनी सेना पर नजर रखने का काम आसान हो गया है.

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दरअसल, चीन की सीमा पर उठे विवाद के बाद से ही कांग्रेस लगातार सरकार पर सवाल खड़े कर रही है. पहले सवाल उठाते रहे कि पीएम खामोश क्यों, जब पीएम मोदी ने चीन विवाद पर बोल दिया और सवर्वदलिय बैठक बुलाकर सबकी सुन ली जहां सोनिया गांधी ने जमकर चीन मुद्दे पर सवाल खड़े किए. लेकिन पीएम मोदी ने एक-एक मुद्दे पर विपक्ष के सवालों के जवाब दिए. ये तो परिपाटी ही रही है जब राष्ट्रीय संकट हो तो सर्वदलीय बैठक बुलाकर ये संदेश देना कि पूरे देश की आवाज एक है. कमोबेश इस सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस छोड़कर सभी दलों की राय यही रही कि वो इस संकट की घड़ी में सेना और सरकार के साथ हैं. शायद यही कारण है कि सरकार बार-बार यही संदेष दे रही है कि ये वक्त नहीं है विचारधारा और व्यक्तिगत मतभेद भुलाकर सभी दल एक प्लेटफार्म पर रहें, ताकि पूरी दुनिया और चीन में भारत की एकता का संदेश जाए. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. ध्यान देने वाली बात ये है कि संकट के समय राष्ट्रहित सर्वोपरि रहे क्योंकि बाकी मुद्दों पर तू-तू मैं-मै के लिए सरकार का पूरा कार्यकाल बाकी है. (ये लेखक के निजी विचार हैं) 
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