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थियेटर कमांड को बनने में अभी और लगेगा तकरीबन 3 साल का वक्त

थियेटर कमांड को बनने में अभी और लगेगा तकरीबन 3 साल का वक्त

थियेटर कमांड बनाने की प्रक्रिया पिछले कुछ सालों से जारी है.  (सांकेतिक तस्वीर)

थियेटर कमांड बनाने की प्रक्रिया पिछले कुछ सालों से जारी है. (सांकेतिक तस्वीर)

भारतीय सेना (Indian Army) अभी अपने आधुनिकीकरण के दौर से गुज़र रही है. तीनों सेना के बीच बेहतर तालमेल बनाने के लिए थियेटर कमांड बनाने की प्रक्रिया पिछले कुछ सालों से जारी है. चूंकि तीनों सेना को थियेटर में बांटना एक चुनौती पूर्ण काम है लिहाजा अब थियेटर कमांड को अस्तित्व में आने में तकरीबन तीन साल का समय और लगेगा.

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नई दिल्‍ली. भारतीय सेना (Indian Army) अभी अपने आधुनिकीकरण के दौर से गुजर रही है. तीनों सेना के बीच बेहतर तालमेल बनाने के लिए थियेटर कमांड बनाने की प्रक्रिया पिछले कुछ सालों से जारी है. चूंकि तीनों सेना को थियेटर में बांटना एक चुनौती पूर्ण काम है लिहाजा अब थियेटर कमांड को अस्तित्व में आने में तकरीबन तीन साल का समय और लगेगा. सरकारी सूत्रों के मुताबिक थिएटर कमांड के लिए कमांडर इन चीफ (Commander-in-chiefs) बनाने की प्रक्रिया को शुरू किया गया है.

कमांडर इन चीफ की नियुक्ति के बाद ये कमांड का स्वरूप तय करेंगे उसके बाद एक साल में सरकार को रिपोर्ट सौंपी जाएगी और सरकार की मंजूरी के बाद तीन साल के भीतर थियेटर कमांड अस्तित्व में आ पाएगा. सूत्र के मुताबिक भारत में कुल चार कमांड बानाए जाएंगे. जिसमें दो थलसेना जिसमें वेस्टर्न थियेटर कमांड पाकिस्तान और इस्टर्न थियेटर कमांड चीन के लिये होगी तो वही वायुसेना के लिए एयर डिफेंस कमांड और नौसेना के लिए एक कमांड होगी. इस वक्त तीनों सेना के कुल 17 कमांड है जिन्हे एक साथ मिलाकर चार थियेटर कमांड बनाए जाएंगे.

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वही सेना के नॉर्दर्न कमांड को इन थियेटर कमांड से बारह रखा गया है इस कमांड का पूरा फ़ोकस जम्मू- कश्मीर और लद्दाख पर केंद्रित होगा. साथ ही जम्मू कश्मीर में एयरफोर्स के एयर ऑफिसर कमांडिंग को भी इस थियेटर कमांड से बाहर रखा जाएगा और ये दोनो अपने मौजूदा स्वरूप में ही रहेंगी. तीनों सेना से नॉमिनेट किए जाने वाले सीएनसी दोहरी भूमिका निभाएगें एक तो वो थियेटर कमांड के लिए ढांचा तैयार करने का काम करेंगे साथ ही अपनी मौजूदा कमांडर की जिम्मेदारी भी निभाएंगे. ऐसा नही है कि 17 कमांड को चार थियेटर कमांड में बदलने के बाद बाकी कमांडरों की भूमिका खत्म हो जाएगी .

सरकारी सूत्रो के मुताबिक, बचे कमांडर मौजूदा रैंक के साथ डिप्टी थियेटर कमांड के तौर पर नियुक्त किए जाएंगे. सूत्रों के मुताबिक थिएटर कमांड बनने के बाद थिएटर कमांडर शुरू में ऑपरेशनल जिम्मेदारी संभालेंगे और बाकी चीजें मौजूदा कमांडर देखेंगे. फिर धीरे-धीरे एक एक जिम्मेदारी थियेटर कमांडर के पास आ जाएगी. थियेटर कमांड के कमांड हेडक्वाटर को लेकर भी चर्चाए जारी है. सेना का वेस्टर्न थियेटर कमांड जिसकी जिम्मेदारी पाकिस्तान से लगती सीमा होगी, उसका हेडक्वाटर जयपुर पर स्थापित करने पर चर्चा हो रही है तो चीन की सीमा की जिम्मेदारी वाली इस्टर्न कमांड के हेडक्वाटर के लिए कोलकाता या फिर लखनऊ हो सकता है तो वही नौसेना अपने कमांड के लिए कारवार को ज़्यादा तवज्जो दे रही है क्योंकि वहा पर सुविधाए और ढांचा भविष्य की चुनौतियों को देखकर ही तैयार किया गया है लिहाजा नौसेना की पहली पसंद कारवार है जबकि दूसरी पसंद के तौर पर कोच्चि भी एक विकल्प है.

वायुसेना के कमांड बेस के लिए तीन विकल्प जोधपुर, गांधीनगर और इलाहाबाद पर विचार हो रहा है. चीन अमेरिका जैसे बड़े देश में भी सेना के बेहतर तालमेल के लिए थियेटर पद्धति हैं. चीन ने तो हाल ही में अपने सात कमांड को पांच थियेटर कमांड में बदल दिया है ताकि रिसोर्सेज़ का बेहतर इसेतमाल किया जा सके. अब भारतीय सेना भी आने वाले दिनों में बेहतर तालमेल से काम करने के लिए थियेटर कमांड की भूमिका में दिखेगी.

Tags: Commander-in-chiefs, Indian army

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